15 KM के दायरे में बने सभी अवैध ढांचों पर चलाएं बुलडोजर, अमित शाह ने क्यों दिए ऐसे निर्देश

पीटीआई, बीकानेर
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गृह मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि सीमावर्ती जिलों को अपराधों और मादक पदार्थों की समस्या के स्रोतों, स्वरूपों और नेटवर्क का गहन अध्ययन करने और स्थायी समाधान विकसित करने का निर्देश दिया गया है ताकि ये समस्याएं दोबारा न उभरें।

15 KM के दायरे में बने सभी अवैध ढांचों पर चलाएं बुलडोजर, अमित शाह ने क्यों दिए ऐसे निर्देश

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अधिकारियों को देश की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के 15 किलोमीटर के दायरे में अवैध निर्माणों के खिलाफ 'कतई बर्दाश्त न करने की नीति' को सख्ती से लागू करने और पिछले कुछ वर्षों में बने ऐसे सभी ढांचों को ध्वस्त करने का निर्देश दिया है। अधिकारियों ने बताया कि गृह मंत्रालय ने जिला मजिस्ट्रेटों को सीमावर्ती क्षेत्रों में सभी बैंकों द्वारा बैंकिंग लेनदेन के कानूनी और वित्तीय अनुपालन को सुनिश्चित करने, बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का सत्यापन करने, उनके वित्तपोषण स्रोतों की जांच करने, फर्जी खातों और फर्जी कंपनियों का पता लगाने, फर्जी आधार कार्डों की पहचान करने और सीमा पार तस्करी को नियंत्रित करने की बढ़ी हुई जिम्मेदारी सौंपी है।

मंगलवार को बीकानेर में एक सिक्योरिटी रिव्यू मीटिंग की अध्यक्षता करते हुए शाह ने भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर राजस्थान के बॉर्डर जिलों में सिक्योरिटी से जुड़े मुद्दों का मूल्यांकन किया। इस बैठक में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, राज्य के वरिष्ठ अधिकारी और पांच सीमावर्ती जिलों - बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर, श्री गंगानगर और फलोदी के जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक उपस्थित थे।

360 डिग्री सुरक्षा कवच तैयार करने पर जोर

गृह मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि सीमावर्ती जिलों को अपराधों और मादक पदार्थों की समस्या के स्रोतों, स्वरूपों और नेटवर्क का गहन अध्ययन करने और स्थायी समाधान विकसित करने का निर्देश दिया गया है ताकि ये समस्याएं दोबारा न उभरें। शाह ने नागरिकों, सरकारी तंत्र और सुरक्षा एजेंसियों को शामिल करते हुए प्रत्येक सीमावर्ती जिले के लिए 360 डिग्री सुरक्षा कवच तैयार करने पर जोर दिया।

जीरो टॉलरेंस नीति लागू करने पर जोर

अधिकारियों ने बताया कि गृह मंत्री ने अवैध निर्माणों, विशेष रूप से आंतरिक सीमाओं के 0 से 15 किलोमीटर के भीतर, के खिलाफ शून्य सहिष्णुता नीति को सख्ती से लागू करने और ऐसी सभी संरचनाओं को ध्वस्त करने का आह्वान किया है। उन्होंने घुसपैठ, मादक पदार्थों की तस्करी, अतिक्रमण, आतंकवाद के वित्तपोषण और अन्य सीमा पार अपराधों से निपटने के लिए बीएसएफ, सीबीडीटी, एनसीबी और राज्य तंत्र को शामिल करते हुए सीमा प्रबंधन के लिए एक समन्वित दृष्टिकोण के महत्व पर जोर दिया।

दो महीने बाद फिर से समीक्षा

मंत्रालय के बयान में कहा गया है, "अंतिम छोर के शासन को मजबूत करने, आर्थिक अपराधों पर अंकुश लगाने, बुनियादी ढांचे की कमियों को पूरा करने और सीमावर्ती आबादी का समर्थन करने के लिए 'वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम' (वीवीपी)-II के सफल कार्यान्वयन पर जोर दिया गया।" बैठक में शाह ने सीमावर्ती गांवों में सभी सरकारी योजनाओं की 100 प्रतिशत पहुंच सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया और साइबर अपराधों से निपटने के लिए '1930' कॉल सेंटर के प्रभावी उपयोग का आह्वान किया। बयान में कहा गया है, "इन मुद्दों पर दो महीने बाद फिर से समीक्षा और प्रतिक्रिया ली जाएगी; इसलिए, जिलों को परिणामोन्मुखी कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी।"

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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