Hindi NewsIndia NewsDelhi Police issues notice to Karnataka Dy CM Shivakumar in National Herald case
दिल्ली पुलिस ने इस राज्य के उपमुख्यमंत्री को भेजा नोटिस, मांगा लेनदेन का ब्यौरा व पूछे कई सवाल

दिल्ली पुलिस ने इस राज्य के उपमुख्यमंत्री को भेजा नोटिस, मांगा लेनदेन का ब्यौरा व पूछे कई सवाल

संक्षेप:

EOW की तरफ से जारी नोटिस में कहा गया है, 'आपको सूचित किया जाता है कि दिल्ली पुलिस की EOW, ऊपर बताए गए FIR मामले की जांच कर रही है और उम्मीद है कि आपके पास उपरोक्त मामले के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी है।'

Dec 05, 2025 09:29 pm ISTSourabh Jain पीटीआई, नई दिल्ली
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नेशनल हेराल्ड मामले की जांच कर रही दिल्ली पुलिस ने कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को एक नोटिस जारी करते हुए उनसे वित्तीय लेनदेन संबंधी जानकारी मांगी है। EOW (इकोनॉमिक ऑफेंस विंग) ने यह नोटिस इसलिए जारी किया है, क्योंकि उसे उम्मीद है कि शिवकुमार के पास नेशनल हेराल्ड मामले से संबंधित उस केस के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी हो सकती है, जिसे इस साल 3 अक्टूबर को कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज किया गया था। 29 नवंबर को जारी इस नोटिस में, EOW ने शिवकुमार से 19 दिसंबर तक उसके सामने पेश होने या मांगी गई जानकारी देने के लिए कहा है।

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EOW की तरफ से जारी इस नोटिस में कहा गया है, 'आपको सूचित किया जाता है कि दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा, नेशनल हेराल्ड केस में दर्ज FIR मामले की जांच कर रही है और उम्मीद है कि आपके पास उपरोक्त मामले के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी है।'

EOW ने डीके शिवकुमार से पूछे यह सवाल

जांच अधिकारियों ने कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री से उनके व्यक्तिगत बैकग्राउंड, कांग्रेस पार्टी के साथ उनके जुड़ाव और उनके या संबंधित संस्थाओं द्वारा 'यंग इंडियन' को भेजी गई राशि का पूरा ब्यौरा मांगा है। EOW द्वारा भेजे गए नोटिस में डीके शिवकुमार से उनके द्वारा किए गए बैंक ट्रांसफर का मकसद, इन फंड्स का सोर्स, उनके और यंग इंडियन या AICC (अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी) के अधिकारियों के बीच किसी भी बातचीत के ब्यौरे के बारे में पूछा गया है, साथ ही सवाल किया गया है कि क्या ये भुगतान किसी के कहने पर किए गए थे, और क्या उन्हें फंड्स के इस्तेमाल के बारे में पता था।

इसके अलावा EOW ने कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री से आयकर रिकॉर्ड, वित्तीय विवरण और भुगतान के संबंध में जारी किए गए किसी भी दान प्रमाण पत्र की भी मांग की है।

DK Shivakumar (PTI)

साल 2013 में सामने आया था मामला

नेशनल हेराल्ड मामला मूल रूप से साल 2013 में भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी की एक निजी शिकायत से शुरू हुआ था, यह मामला इस आरोप पर आधारित है कि एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) की 988 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति AICC से जुड़े 2010 के एक लेनदेन के माध्यम से 'यंग इंडियन' द्वारा 50 लाख रुपए में हासिल की गई थी।

इस मामले में दिल्ली पुलिस के EOW ने एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट की शिकायत के आधार पर FIR दर्ज की है, जिसमें AJL की प्रॉपर्टी को यंग इंडियन कंपनी में ट्रांसफर करने के मामले में क्रिमिनल साज़िश, धोखाधड़ी और क्रिमिनल ब्रीच ऑफ़ ट्रस्ट का आरोप लगाया गया है। इस कंपनी में सोनिया गांधी और राहुल गांधी की कुल 76 प्रतिशत हिस्सेदारी है। पुलिस ने आरोप लगाया है कि गांधी परिवार ने निजी लाभ के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया।

कांग्रेस ने कहा था बदले की राजनीति का परिणाम

उधर इस मामले में दिसंबर में केस दर्ज होने के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए इसे भाजपा की प्रतिशोध तथा उत्पीड़न की राजनीति का हिस्सा बताया था। उनका कहना था कि ईडी ने यह कार्रवाई भाजपा के इशारे पर की है और इसका मकसद असल मुद्दों से ध्यान हटाना है।

सिंघवी ने नेशनल हेराल्ड प्रकाशित करने वाली कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड का इतिहास बताते हुए कंपनी के वित्तीय पुनर्गठन की प्रक्रिया समझाई थी और कहा था कि यह कंपनी ब्रिटिश काल में अंग्रेजों के खिलाफ खड़ी रही थी। बाद में कंपनी आर्थिक रूप से कमजोर हो गई लेकिन कंपनी की मशाल जलाए रखने के लिए कांग्रेस ने समय-समय पर उसे ऋण दिया, जो एक वक्त 90 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। इसलिए इस कंपनी को ऋण मुक्त करने के लिए उस ऋण को इक्विटी में बदलने का निर्णय लिया गया और इसके लिए 'यंग इंडियन' नामक एक गैर-लाभकारी कंपनी बनाई गई। कंपनी में श्रीमती गांधी, राहुल गांधी, मोतीलाल वोरा, सैम पित्रोदा, सुमन दुबे और ऑस्कर फर्नांडिस जैसे कांग्रेसी नेता शामिल थे।

सिंघवी के अनुसार 'यंग इंडियन' के पास कंपनी की 99 प्रतिशत शेयर होल्डिंग आ गई। 'यंग इंडियन' न तो कोई लाभ नहीं कमा सकती है और न ही इसके निदेशकों को कोई वेतन या भत्ता मिलता है। उन्होंने कहा कि चूंकि इस मामले में न तो कोई धनराशि का लेन-देन हुआ, न कोई लाभ अर्जित किया गया, और न ही कोई चल या अचल संपत्ति का हस्तांतरण हुआ, इसलिए इस पूरे प्रकरण में मनी लॉन्ड्रिंग का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने ईडी की कार्रवाई को भाजपा के इशारे पर की गई कार्रवाई बताया था और कहा था कि भाजपा विपक्ष को थकाओ, झूठ को सजाओ और एजेंसियों को नचाओ की राजनीति करती है।

Sourabh Jain

लेखक के बारे में

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सौरभ जैन पत्रकारिता में लगभग 15 वर्ष से जुड़े हुए हैं। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत जुलाई 2009 में ZEE24 छत्तीसगढ़ न्यूज चैनल से की थी। इसके बाद वे IBC24 और दैनिक भास्कर जैसी संस्थाओं में भी सेवाएं दे चुके हैं। सौरभ साल 2023 से लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े हुए हैं और यहां पर स्टेट डेस्क में कार्यरत हैं। सौरभ मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के रहने वाले हैं और उन्होंने अपनी स्कूली पढ़ाई और ग्रेजुएशन दोनों यहीं से किया है। इसके बाद उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में मास्टर्स की डिग्री ली है। सौरभ को राजनीति, बॉलीवुड और खेल की खबरों में विशेष रुचि है। और पढ़ें
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