
अवैध क्रिकेट सट्टेबाजी के पैसे से बनाई गई संपत्ति कुर्क कर सकता है ED: दिल्ली हाई कोर्ट
अदालत ने साफ किया कि आपराधिक स्रोत से मिली संपत्ति का इस्तेमाल बाद में किसी अन्य गतिविधि में हो, तो भी वह दाग बरकरार रहता है। यह फैसला ED की जांच को मजबूत बनाता है, जो अवैध सट्टेबाजी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई को बढ़ावा देगा।
दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में एक अहम फैसला सुनाया, जिसमें प्रवर्तन निदेशालय को अवैध क्रिकेट सट्टेबाजी से मिले धन को अपराध की आय के रूप में जब्त करने की इजाजत दी गई। जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल व हरिश वैद्यनाथन शंकर की बेंच ने नरेश बंसल और अन्य बनाम मामले में याचिकाओं को खारिज कर दिया। इसने कहा कि भले ही क्रिकेट सट्टेबाजी खुद PMLA की अपराध सूची में न हो, लेकिन इससे जुड़ी आपराधिक गतिविधियां जैसे जालसाजी, धोखाधड़ी और साजिश इसे अपराध की आय बनाती हैं।

अदालत ने साफ किया कि आपराधिक स्रोत से मिली संपत्ति का इस्तेमाल बाद में किसी अन्य गतिविधि में हो, तो भी वह दाग बरकरार रहता है। यह फैसला ED की जांच को मजबूत बनाता है, जो अवैध सट्टेबाजी नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई को बढ़ावा देगा। यह मामला एक बड़े हवाला नेटवर्क और यूके आधारित वेबसाइट बेटफेयर.कॉम से संचालित अंतरराष्ट्रीय सट्टेबाजी रैकेट से जुड़ा है। वडोदरा के फार्महाउस से संचालित रैकेट दिसंबर 2014 से मार्च 2015 के बीच लगभग 2,400 करोड़ रुपये का सट्टेबाजी कारोबार कर चुका था।
ईडी ने अस्थायी जब्ती का दिया आदेश
याचिकाकर्ता सुपर मास्टर आईडी से बिना केवाईसी के कई सट्टेबाजी खाते बनाने में शामिल थे, जो विदेशों से अवैध रूप से भेजे गए धन से खरीदे जाते थे। ये आईडी भारत, दुबई, पाकिस्तान समेत कई देशों में गुमनाम सट्टेबाजी नेटवर्क को सुविधा देती थी। ईडी ने पीएमएलए की धारा 2(1)(U) के तहत इन गतिविधियों को अपराध की आय घोषित कर अस्थायी जब्ती आदेश जारी किए, जिसके खिलाफ याचिकाकर्ताओं ने हाई कोर्ट में चुनौती दी। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि ईडी के पास विश्वास करने का उचित कारण नहीं था। सट्टेबाजी अनुसूचित अपराध न होने से जब्ती अमान्य है। साथ ही एकल सदस्यीय पीएमएलए अधिकरण की कार्यवाही बिना अधिकार की थी। हालांकि, कोर्ट ने इसे नहीं माना।





