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तुर्की हैंडलर 'उकासा' के संपर्क में था दिल्ली ब्लास्ट का आतंकी? आरोपों से भड़की एर्दोगन सरकार

तुर्की हैंडलर 'उकासा' के संपर्क में था दिल्ली ब्लास्ट का आतंकी? आरोपों से भड़की एर्दोगन सरकार

संक्षेप: जांच अब पाकिस्तान, कतर और तुर्की के संबंधों पर केंद्रित हो रही है। खुफिया एजेंसियों को शक है कि JeM को धन का स्रोत विदेशी चैनलों से मिल रहा है। उमर का JeM से जुड़ाव टेलीग्राम ग्रुप्स के जरिए शुरू हुआ था।

Thu, 13 Nov 2025 12:15 PMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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दिल्ली के लाल किले के पास 10 नवंबर को हुए कार ब्लास्ट की जांच में एक नया अंतरराष्ट्रीय आयाम सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक, ब्लास्ट के मुख्य आरोपी डॉक्टर मोहम्मद उमर नबी तुर्की के अंकारा में छिपे एक रहस्यमयी हैंडलर के संपर्क में था। इसका कोडनेम 'उकासा' बताया जा रहा है।

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यह हैंडलर कथित तौर पर पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़ा हुआ है। इस खुलासे के बाद तुर्की सरकार ने भारतीय मीडिया पर 'झूठी और भ्रामक' खबरें चलाने का आरोप लगाते हुए कड़ी आपत्ति जताई है। तुर्की के संचार निदेशालय ने इसे 'दुष्प्रचार अभियान' करार दिया है, जो भारत-तुर्की संबंधों को नुकसान पहुंचाने का प्रयास है।

लाल किले के पास खौफनाक धमाका

10 नवंबर की शाम, लगभग 6 बजे, दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास एक सफेद ह्यूंडई i-20 कार में जोरदार विस्फोट हो गया। यह विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि आसपास खड़ी 20 से अधिक गाड़ियां क्षतिग्रस्त हो गईं, और मेट्रो स्टेशन का सिग्नलिंग सिस्टम भी प्रभावित हुआ। इस हादसे में 13 लोगों की मौत हो गई, जबकि 25 से अधिक लोग घायल हुए। शुरुआत में इसे 'गैस लीक' या 'तकनीकी खराबी' बताया गया, लेकिन फॉरेंसिक जांच में कार में लगाए गए आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) के अवशेष मिलने के बाद इसे आतंकी हमला घोषित कर दिया गया।

केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में इस घटना को 'आतंकी साजिश' माना गया। गृह मंत्री अमित शाह ने एनआईए को जांच सौंप दी है। सूत्रों के अनुसार, विस्फोटक कार जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के निवासी डॉक्टर उमर नबी के नाम पर रजिस्टर्ड थी। उमर अल-फलाह यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर था। वह खुद कार चला रहा था। ब्लास्ट के बाद कार से मिली हड्डियों, दांतों और कपड़ों के टुकड़ों का डीएनए टेस्ट उमर की मां के सैंपल से 100% मैच कर गया।

तुर्की कनेक्शन: 'उकासा' हैंडलर और सेशन ऐप का राज

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, जांच एजेंसियों ने उमर के फोन और लैपटॉप से एक एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप 'सेशन' की चैट हिस्ट्री बरामद की है। इस ऐप के जरिए उमर लगातार तुर्की के अंकारा स्थित हैंडलर 'उकासा' से संपर्क में था। उकासा का अरबी में मतलब मकड़ी होता है। एजेंसियों को शक है कि शायद यह हैंडलर का असली नाम नहीं है, बल्कि उसकी पहचान छिपाने के लिए इस्तेमाल किया गया एक कोड नाम है। उसका ठिकाना अंकारा में पाया गया है, और अधिकारियों का मानना ​​है कि उसने वहीं से समूह की गतिविधियों, वित्तीय मामलों को हैंडल किया। सूत्रों का मानना है कि यह JeM का वरिष्ठ कमांडर हो सकता है। उमर को निर्देश मिले थे कि वह दिल्ली में भीड़-भाड़ वाले इलाके में कार को घुसाकर विस्फोट करे, ताकि अधिकतम क्षति हो।

यह भी खुलासा हुआ है कि उमर के अलावा फरीदाबाद टेरर मॉड्यूल के अन्य सदस्य- डॉक्टर मुजम्मिल शकील गनई, डॉक्टर आदिल और अन्य इस साल की शुरुआत में तुर्की की यात्रा पर गए थे। उनके पासपोर्ट से तुर्की के वीजा और टिकट बरामद हुए हैं। सूत्रों के अनुसार, अंकारा में ही इनकी मुलाकात JeM के हैंडलर्स से हुई, जहां इन्हें ब्रेनवॉश किया गया और ऑपरेशन के निर्देश दिए गए। तुर्की से लौटने के बाद इन डॉक्टरों ने देशभर में फैलने की योजना बनाई, ताकि मॉड्यूल का एक ही जगह फोकस न हो।

फरीदाबाद में मुजम्मिल के ठिकानों से 2900 किलो विस्फोटक बरामद हुए हैं, जो इसी मॉड्यूल से जुड़े हैं। जांचकर्ताओं का शक है कि फरीदाबाद में साथियों की गिरफ्तारी के बाद उमर घबरा गया और कार को गलत तरीके से हैंडल करते हुए विस्फोट हो गया। इसके अलावा, उमर को ब्लास्ट से ठीक पहले कनॉट प्लेस और मयूर विहार में सीसीटीवी में i-20 कार के साथ देखा गया। एक संदिग्ध ब्रेजा कार भी फरीदाबाद के पास खाली मिली, जिसमें मौत का सामान लदा होने का शक है।

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एर्दोगन सरकार की प्रतिक्रिया: आरोपों को सिरे से खारिज, भारतीय मीडिया पर तीखा प्रहार

इस खुलासे के बाद तुर्की सरकार ने तीखी प्रतिक्रिया दी। तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैय्यप एर्दोगन के नेतृत्व वाली सरकार के संचार निदेशालय ने आधिकारिक बयान जारी कर इन आरोपों को 'पूरी तरह झूठा और तथ्यहीन' बताया। निदेशालय के सेंटर फॉर काउंटरिंग डिसइंफॉर्मेशन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा कि भारत के कुछ मीडिया आउटलेट्स में जानबूझकर ऐसी खबरें चलाई जा रही हैं कि तुर्की आतंकवादियों को लॉजिस्टिक, आर्थिक या कूटनीतिक मदद देता है। ये सब एक दुष्प्रचार अभियान का हिस्सा हैं, जिसका मकसद भारत-तुर्की संबंधों को नुकसान पहुंचाना है। बयान में जोर देकर कहा गया कि तुर्की हर प्रकार के आतंकवाद का विरोध करता है और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए इसकी लड़ाई लड़ रहा है। तुर्की की भारत या किसी अन्य देश में कट्टरपंथी गतिविधियों से कोई भूमिका नहीं है। तुर्की ने यह भी संकेत दिया कि वह एनआईए की जांच में सहयोग करने को तैयार है, लेकिन मीडिया ट्रायल को रोकने की मांग की।

पाकिस्तान, कतर और धन स्रोत पर नजर

जांच अब पाकिस्तान, कतर और तुर्की के संबंधों पर केंद्रित हो रही है। खुफिया एजेंसियों को शक है कि JeM को धन का स्रोत विदेशी चैनलों से मिल रहा है। उमर का JeM से जुड़ाव टेलीग्राम ग्रुप्स के जरिए शुरू हुआ था, जहां एक संदिग्ध पोस्टर में राफेल जेट की तस्वीरें और धमकी भरे संदेश थे। इसके अलावा, उमर की तुर्कमान गेट मस्जिद के पास की तस्वीरें भी बरामद हुई हैं, जो उसके कट्टरपंथी झुकाव को दर्शाती हैं। एक हिरासत में व्यक्ति से पूछताछ चल रही है, जो ब्रेजा कार से जुड़ा हो सकता है। एनआईए का मानना है कि यह मॉड्यूल बड़ा था, और अन्य शहरों में भी ऐसी साजिशें रची जा रही थीं।

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अमित कुमार एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया इंडस्ट्री में नौ वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। हिन्दुस्तान डिजिटल के साथ जुड़ने से पहले अमित ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया है। अमित ने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला (डिजिटल) से की। इसके अलावा उन्होंने वन इंडिया, इंडिया टीवी और जी न्यूज जैसे मीडिया हाउस में काम किया है, जहां उन्होंने न्यूज रिपोर्टिंग व कंटेंट क्रिएशन में अपनी स्किल्स को निखारा। अमित ने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा और गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी, हिसार से मास कम्युनिकेशन में मास्टर (MA) किया है। अपने पूरे करियर के दौरान, अमित ने डिजिटल मीडिया में विभिन्न बीट्स पर काम किया है। अमित की एक्सपर्टीज पॉलिटिक्स, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेट रिपोर्टिंग और मल्टीमीडिया स्टोरीटेलिंग सहित विभिन्न क्षेत्रों में फैली हुई है। अमित नई मीडिया तकनीकों और पत्रकारिता पर उनके प्रभाव को लेकर काफी जुनूनी हैं। और पढ़ें
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