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दिल्ली ब्लास्ट के बाद ED के निशाने पर अल-फलाह यूनिवर्सिटी, फंडिंग की जांच के आदेश

दिल्ली ब्लास्ट के बाद ED के निशाने पर अल-फलाह यूनिवर्सिटी, फंडिंग की जांच के आदेश

संक्षेप: जांच अब हरियाणा, जम्मू-कश्मीर और उत्तर प्रदेश तक फैल चुकी है। फॉरेंसिक टीम विस्फोटक की डिजाइन और बातचीत डेटा की जांच कर रही है। इंटेलिजेंस एजेंसियां संभावित स्थानीय सहायता नेटवर्क और फंडिंग रूट्स ट्रैक कर रही हैं।

Thu, 13 Nov 2025 02:32 PMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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दिल्ली में लाल किले के पास सोमवार शाम हुए भयानक कार बम धमाके ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। इस हमले में 13 लोगों की मौत हो गई और 20 से अधिक घायल बताए जा रहे हैं। इस ब्लास्ट के बाद हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर संदेह और बढ़ गया है। यूनिवर्सिटी से जुड़े डॉक्टरों की गिरफ्तारी के बाद केंद्र सरकार ने अब यूनिवर्सिटी की फंडिंग सोर्स और वित्तीय लेन-देन पर गहन जांच के आदेश जारी किए हैं।

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एनडीटीवी ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि सरकार ने अल फलाह विश्वविद्यालय को मिली फंडिंग की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जांच कराने का आदेश दिया है। यह विश्वविद्यालय दिल्ली विस्फोटों के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए संदिग्ध आतंकवादियों के बीच एक अहम कड़ी बनकर उभरा है। इसी संस्थान में कथित तौर पर दिल्ली कार विस्फोट की साजिश रची गई थी। विश्वविद्यालय के कम से कम चार डॉक्टरों का विस्फोट से संबंध पाया गया है।

26 लाख रुपये से ज्यादा की रकम कहां से जुटाई?

जांच का मुख्य फोकस यूनिवर्सिटी की फंडिंग पर है। इतने बड़े आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ होने के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या यूनिवर्सिटी कैंपस का इस्तेमाल कट्टरपंथी गतिविधियों के लिए कवर के रूप में किया गया? जांच एजेंसियों को संदेह है कि विदेशी स्रोतों से फंड ट्रांसफर हो सकता है, जो कथित तौर पर शैक्षणिक नेटवर्क के जरिए जुटाए गए। जांच के आदेश ऐसे समय में दिए गए हैं जब ये पता चला है कि ‘सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल’ के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए डॉक्टरों ने लाल किले के पास विस्फोट में इस्तेमाल की गई सामग्री खरीदने के लिए 26 लाख रुपये से ज्यादा की रकम जुटाई थी।

एक अधिकारी ने बताया कि चार संदिग्धों - डॉ मुजम्मिल गनई, डॉ अदील अहमद राथर, डॉ शाहीन सईद और डॉ उमर नबी ने मिलकर नकद राशि जमा की थी, जिसे सुरक्षित रखने और परिचालन उपयोग के लिए डॉ उमर को सौंप दिया गया था। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा निवासी और हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल फलाह विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर डॉ उमर सोमवार शाम को लाल किले के व्यस्त इलाके में हुए विस्फोट में इस्तेमाल हुंदै आई20 कार चला रहा था।

जांचकर्ताओं का मानना ​​है कि यह धनराशि एक बड़ी आतंकी साजिश के लिए थी। जमा की गई इस राशि से उन्होंने कथित तौर पर गुरुग्राम, नूंह और आसपास के शहरों से लगभग 3 लाख रुपये मूल्य का लगभग 26 क्विंटल एनपीके खाद खरीदा था। अधिकारियों ने बताया कि अन्य रसायनों के साथ मिश्रित इस उर्वरक का इस्तेमाल आमतौर पर इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) बनाने में किया जाता है।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि समूह द्वारा इतनी बड़ी मात्रा में खाद की खरीद, जांच में एक अहम सुराग बन गई है। उन्होंने बताया कि वित्तीय लेन-देन और आपूर्ति रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। सूत्रों ने यह भी बताया कि विस्फोट से पहले के दिनों में उमर और मुजम्मिल के बीच धन के लेन-देन को लेकर मतभेद था। जांचकर्ता इस बात की पड़ताल कर रहे हैं कि क्या इस विवाद की वजह से इस समूह की योजनाओं या हमले के समय पर असर पड़ा?

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लाल किले के धमाका

सोमवार शाम दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के बाहर एक आई-20 कार में विस्फोट हो गया।इस आतंकी हमले में अमोनियम नाइट्रेट और अन्य ज्वलनशील सामग्री का इस्तेमाल किया गया। धमाके से आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई। दिल्ली पुलिस और एनएसजी की टीमों ने मौके पर पहुंचकर बचाव कार्य चलाया।

एनआईए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि धमाके में इस्तेमाल वाहन डॉ. उमर नबी के नाम पर रजिस्टर्ड था, जो अल फलाह मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर था। जांच एजेंसियों ने फरीदाबाद में डॉ. उमर नबी, डॉ. मुजम्मिल गनाई और डॉ. शाहीन सईद को गिरफ्तार किया। इनके कब्जे से 2,900 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री, हथियार और कुछ डायरी बरामद हुई हैं, जिनमें कोडेड नोट्स और वित्तीय संदर्भ मिले हैं। अधिकारीयों का कहना है कि यह एक सुनियोजित आतंकी मॉड्यूल का हिस्सा लगता है, जो जम्मू-कश्मीर, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में सक्रिय था। संदेह है कि पाकिस्तान समर्थित जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों के हैंडलर्स से संपर्क था।

अल-फलाह विश्वविद्यालय को मान्यता के झूठे दावे को लेकर एनएएसी से नोटिस मिला

राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) ने अल-फलाह विश्वविद्यालय को अपनी वेबसाइट पर गलत मान्यता प्रदर्शित करने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया है। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। यह विश्वविद्यालय दिल्ली विस्फोट मामले की जांच के घेरे में है।

कारण बताओ नोटिस में एनएएसी ने कहा कि उसने पाया है कि अल-फलाह विश्वविद्यालय, 'जो न तो मान्यता प्राप्त है और न ही उसने एनएएसी द्वारा मान्यता के लिए आवेदन किया है', उसने अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया है कि ‘अल-फलाह विश्वविद्यालय अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट का एक प्रयास है, जो परिसर में तीन कॉलेज चला रहा है - अल फलाह स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (1997 से एनएएसी द्वारा ग्रेड ए), ब्राउन हिल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (2008 से) और अल-फलाह स्कूल ऑफ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग (2006 से एनएएसी द्वारा ग्रेड ए)।’

कारण बताओ नोटिस में कहा गया है कि यह पूरी तरह से गलत है और जनता विशेषकर अभिभावकों, छात्रों और हितधारकों को गुमराह कर रहा है। एनएएसी ने विश्वविद्यालय से स्पष्टीकरण मांगा है और उसे निर्देश दिया है कि वह अपनी वेबसाइट तथा अन्य सार्वजनिक रूप से उपलब्ध या वितरित दस्तावेजों से एनएएसी मान्यता संबंधी विवरण हटा दे। सोमवार को दिल्ली में लाल किले के पास एक कार में हुए एक उच्च-तीव्रता वाले विस्फोट में 13 लोग मारे गए और कई अन्य घायल हो गए। यह घटना एक ‘सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल’ के भंडाफोड़ के कुछ ही घंटों बाद हुई। गिरफ्तार लोगों में अल-फलाह विश्वविद्यालय से जुड़े तीन चिकित्सक भी शामिल हैं।

Amit Kumar

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अमित कुमार एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया इंडस्ट्री में नौ वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। हिन्दुस्तान डिजिटल के साथ जुड़ने से पहले अमित ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया है। अमित ने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला (डिजिटल) से की। इसके अलावा उन्होंने वन इंडिया, इंडिया टीवी और जी न्यूज जैसे मीडिया हाउस में काम किया है, जहां उन्होंने न्यूज रिपोर्टिंग व कंटेंट क्रिएशन में अपनी स्किल्स को निखारा। अमित ने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा और गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी, हिसार से मास कम्युनिकेशन में मास्टर (MA) किया है। अपने पूरे करियर के दौरान, अमित ने डिजिटल मीडिया में विभिन्न बीट्स पर काम किया है। अमित की एक्सपर्टीज पॉलिटिक्स, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेट रिपोर्टिंग और मल्टीमीडिया स्टोरीटेलिंग सहित विभिन्न क्षेत्रों में फैली हुई है। अमित नई मीडिया तकनीकों और पत्रकारिता पर उनके प्रभाव को लेकर काफी जुनूनी हैं। और पढ़ें
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