TVK को तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने पर 'देरी', एक्सपर्ट्स की क्या राय?

Madan Tiwari लाइव हिन्दुस्तान, चेन्नई
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टीवीके तमिलनाडु की 238 सदस्यीय विधानसभा के लिए हाल में संपन्न चुनावों में 108 सीट पर जीत के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। पांच सीट जीतने वाली कांग्रेस ने भी टीवीके के समर्थन की घोषणा की है।

TVK को तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने पर 'देरी', एक्सपर्ट्स की क्या राय?

तमिलनाडु में अभिनेता-नेता विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) को सरकार गठन के लिए आमंत्रित किए जाने में कथित देरी पर संवैधानिक कानून विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है। कुछ विशेषज्ञों (एक्सपर्ट्स) का कहना है कि राज्यपाल को यह जानने का अधिकार है कि प्रथम दृष्टया टीवीके के पास बहुमत है या नहीं। वहीं, कुछ अन्य विशेषज्ञों का कहना है कि राज्यपाल के पास विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी टीवीके को सरकार गठन के लिए आमंत्रित करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

टीवीके तमिलनाडु की 238 सदस्यीय विधानसभा के लिए हाल में संपन्न चुनावों में 108 सीट पर जीत के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। पांच सीट जीतने वाली कांग्रेस ने भी टीवीके के समर्थन की घोषणा की है। हालांकि, पार्टी के पास अकेले दम पर सरकार बनाने के लिए पर्याप्त संख्या बल (118 सदस्यों का समर्थन) अभी भी नहीं है। टीवीके प्रमुख विजय ने पिछले 24 घंटे में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से दो बार मुलाकात कर सरकार बनाने का निमंत्रण देने का अनुरोध किया है। हालांकि, टीवीके को अभी तक सरकार गठन का निमंत्रण नहीं दिया गया है।

संवैधानिक कानून विशेषज्ञ और वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने कहा, "राज्यपाल को यह जानने और टीवीके से प्रथम दृष्टया यह साबित करने के लिए कहने का अधिकार है कि उसके पास बहुमत है या नहीं, फिर चाहे वह बाहरी समर्थन से हो या सरकार के भीतर। सरकार स्थिर होनी चाहिए।" उन्होंने कहा, "सहयोगियों से समर्थन पत्र हासिल करने में कोई कठिनाई नहीं होनी चाहिए। अगर वह असफल होते हैं, तो गतिरोध उत्पन्न हो जाएगा।" द्विवेदी ने कहा कि राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू हो सकता है, इसलिए टीवीके को समर्थन पत्र पेश करने होंगे या सरकार गठन का दावा पेश करते समय समर्थक नेताओं को उनके साथ राज्यपाल के समक्ष उपस्थित होना पड़ेगा।

'सरकार बनाने को न बुलाना बिल्कुल गलत'

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने टीवीके को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित न किए जाने को "अनुचित" बताया। सिंह ने कहा, "राज्यपाल के लिए सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने के लिए बुलाना बिल्कुल उचित है, क्योंकि अन्य दो पार्टियों के पास मिलकर भी बहुमत नहीं है। इसलिए अगर सबसे बड़ी पार्टी ने सरकार बनाने का दावा पेश किया है, तो राज्यपाल को उसे मौका देना ही होगा...।" उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि इस मामले में राज्यपाल का सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित न करना बेहद अनुचित है।"

'तुरंत सरकार बनाने के लिए बुलाया जाए'

वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत सिन्हा ने भी सिंह की राय से इत्तफाक जताया। उन्होंने कहा कि विजय को तुरंत सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया जाना चाहिए। सिन्हा ने कहा कि टीवीके प्रमुख को 10 से 15 दिनों की निर्धारित समय सीमा के भीतर विधानसभा में अपना बहुमत साबित करना चाहिए। उन्होंने कहा, "राज्यपाल सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने के लिए बाध्य हैं। सरकार का भविष्य सदन में ही तय किया जाना चाहिए।"

वरिष्ठ अधिवक्ता विकास पाहवा ने कहा, "राज्यपाल के पास संविधान के अनुच्छेद-164 के तहत काम करते समय उन स्थितियों में बेहद सीमित संवैधानिक अधिकार होते हैं, जहां विधानसभा में किसी भी पार्टी के पास स्पष्ट बहुमत नहीं होता।" उन्होंने कहा कि संविधान के मुताबिक राज्यपाल का मुख्य कर्तव्य यह सुनिश्चित करना है कि एक ऐसी स्थिर सरकार बने, जिसे विधानसभा में बहुमत हासिल हो। पाहवा ने कहा, "आम तौर पर सबसे बड़ी पार्टी को पहले सरकार बनाने का दावा पेश करने आमंत्रित किया जाता है और फिर उससे उचित समय के भीतर विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए कहा जाता है। हालांकि, संविधान में ऐसा कोई स्पष्ट या यांत्रिक प्रावधान नहीं है, जो राज्यपाल को किसी भी परिस्थिति में हमेशा सबसे बड़ी पार्टी को आमंत्रित करने के लिए बाध्य करता हो।"

'राज्यपाल जांच कर सकते हैं'

एक अन्य वरिष्ठ अधिवक्ता अमित आनंद तिवारी ने कहा कि राज्यपाल के लिए किसी पार्टी को केवल इस आधार पर आमंत्रित करना अनिवार्य नहीं है कि वह सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। उन्होंने कहा, "राज्यपाल यह जांच कर सकते हैं और खुद को संतुष्ट कर सकते हैं कि क्या वह सबसे बड़ी पार्टी सरकार बना सकती है या सदन में बहुमत साबित कर सकती है। यह संतुष्टि राज्यपाल के अधिकार क्षेत्र में आती है और इस विवेकाधिकार पर सवाल नहीं उठाया जा सकता।" तिवारी ने कहा, "मेरी समझ के हिसाब से टीवीके के मामले में पार्टी ने यह नहीं कहा है कि उसे अन्य विधायकों का समर्थन हासिल है।" उन्होंने कहा कि टीवीके के पास अभी भी पर्याप्त संख्या बल नहीं है, इसलिए राज्यपाल को पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने से पहले खुद संतुष्ट होना होगा।

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Madan Tiwari

लेखक के बारे में

Madan Tiwari

लखनऊ के रहने वाले मदन तिवारी वरिष्ठ पत्रकार हैं और मीडिया में एक दशक से ज्यादा का अनुभव है।
परिचय, अनुभव एवं शिक्षा
वर्तमान में मदन हिन्दुस्तान अखबार की न्यूज वेबसाइट लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स डिजिटल) में डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से पत्रकारिता की पढ़ाई की। कक्षा 12वीं के बाद से ही दैनिक जागरण, अमर उजाला, जनसत्ता समेत तमाम अखबारों में संपादकीय पृष्ठ पर लिखना शुरू किया। महज दो सालों में विभिन्न राष्ट्रीय और क्षेत्रियों अखबारों में दो सौ से अधिक आलेख प्रकाशित हुए। ग्रेजुएशन करते समय ही मीडिया में नौकरी की शुरुआत की। लाइव हिन्दुस्तान में अभी दूसरी पारी है और दोनों पारियों को मिलाकर यहां आठ साल से ज्यादा हो चुके हैं। कुल एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। मदन आजतक जैसे अन्य संस्थानों में भी काम कर चुके हैं।

यूपी-बिहार की पॉलिटिक्स से लेकर राष्ट्रीय स्तर की राजनीतिक खबरों को कवर करने का लंबा अनुभव है। पॉलिटिकल न्यूज में ज्यादा रुचि है और पिछले एक दशक में देशभर में हुए विभिन्न विधानसभा चुनावों के साथ-साथ लोकसभा चुनावों को भी कवर किया है। लाइव हिन्दुस्तान के लिए मदन देश-विदेश में रोजाना घटित होने वाली खबरों के साथ-साथ पॉलिटिकल खबरों का एनालिसिस, विभिन्न अहम विषयों पर एक्सप्लेनर, ब्रेकिंग न्यूज, वायरल न्यूज आदि कवर करते हैं। इसके अलावा, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ वॉर से लेकर मिडिल ईस्ट में असली वॉर तक की इंटरनेशनल खबरों पर लिखते-पढ़ते रहते हैं। पिछले एक दशक में पत्रकारिता क्षेत्र में कई पुरस्कार मिल चुके हैं।

मीडिया में अवॉर्ड्स.
मदन ने लाइव हिन्दुस्तान में काम करते हुए जर्नलिस्ट ऑफ द ईयर, मंथली अवॉर्ड्स, पॉपुलर च्वॉइस, एचटी स्टार अवॉर्ड्स समेत एक दर्जन से ज्यादा पुरस्कार जीते हैं।

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