लालची, मतलबी और डरपोक गद्दार...TMC बागियों पर आगबबूला हुईं महुआ मोइत्रा; दे डाली एक खुली चुनौती

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
Follow us on Google News
share

ममता बनर्जी के लिए यह संकट अब संगठनात्मक असहमति से आगे बढ़कर पार्टी की संसदीय ताकत पर से नियंत्रण खोने की आशंका में तब्दील हो गया है। इसके राष्ट्रीय स्तर पर तृणमूल और विपक्षी गठबंधन, दोनों के लिए दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।

लालची, मतलबी और डरपोक गद्दार...TMC बागियों पर आगबबूला हुईं महुआ मोइत्रा; दे डाली एक खुली चुनौती

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की करारी हार के बाद पार्टी के अंदर जो असंतोष, असहमति और विद्रोह पनपा था, वह अब कोलकाता से देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली पहुंच चुका है। सोमवार (8 जून) को TMC का यह अंदरूनी संकट तब और गहरा गया जब पार्टी की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया कि पार्टी के करीब 20 सांसदों ने केंद्र में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA)का समर्थन करने का फैसला किया है। इसी के साथ पार्टी के संसदीय दल में फूट सार्वजनिक हो गई है और पार्टी पर ममता बनर्जी का निंयत्रण और कमजोर हो गया है।

सोमवार को ही जब ममता बनर्जी भाजपा के खिलाफ आगे की लड़ाई के लिए इंडिया गठबंधन के घटक दलों के साथ भतीजे अभिषेक बनर्जी संग बैठक कर रही थीं, तभी उनकी पार्टी के 14 सांसद राज्य भाजपा प्रभारी और केंद्र सरकार में मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर गुप्त बैठक कर रहे थे। इस बैठक में शामिल सांसदों ने काकोली घोष दस्तीदार को अपना नेता बताया है और लोकसभा में अलग गुट के रूप में मान्यता देने के लिए लोकसभा अध्यक्ष को चिट्ठी लिखी है।

देखते हैं आप कितने बड़े हीरो हैं?

इस घटनाक्रम से नाराज लोकसभा सांसद और ममता बनर्जी की भरोसेमंद सांसद महुआ मोइत्रा ने बागियों पर हमला बोला है। कृष्णानगर से सांसद मोइत्रा ने सोशल मीडिया एक्स पर बागी सांसदों को खुली चुनौती दी है कि अगर उनमें दम है तो वो इस्तीफा देकर फिर से चुनाव लड़कर दिखाएं। महुआ मोइत्रा ने एक्स पर लिखा, “2024 में सांसद TMC के टिकट पर जीते थे। जनादेश NDA के लिए नहीं था। वे सभी लालची, मतलबी और डरपोक गद्दार अब BJP में शामिल हो सकते हैं - लेकिन अपनी सीटों से इस्तीफ़ा दें और BJP के टिकट पर चुनाव लड़ें। देखते हैं आप कितने बड़े हीरो हैं।”

विधायक दल से शुरू हुई बगावत संसदीय दल तक आई

इस सप्ताह के पहले दिन सोमवार को पहला झटका TMC के सीनियर नेता सुखेंदु शेखर रॉय ने अपने इस्तीफे के साथ दिया। वह 13 साल से राज्यसभा में पार्टी के चीफ व्हिप थे। उन्होंने राज्यसभा और पार्टी दोनों से इस्तीफा दे दिया। इसके तुरंत बाद, एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसमें रॉय को कम से कम पांच TMC लोकसभा सांसदों के साथ बंद कमरे में बातचीत करते देखा गया। इससे यह अटकलें तेज हो गईं कि पार्टी के विधानसभा सदस्यों के बीच शुरू हुई बगावत अब संसदीय दल तक भी फैल चुकी है।

दल-बदल के लिए कितने सांसद चाहिए

इस घटनाक्रम के महज कुछ देर बाद ही एक और अहम तस्वीर सामने आई, जिसमें पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का काफिला दिल्ली पहुंचकर केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के घर के बाहर रुका। यादव, बंगाल चुनावों के लिए BJP के मुख्य रणनीतिकार थे। उनके घर पर कथित तौर पर अधिकारी ने 20 TMC लोकसभा सांसदों की मेजबानी की। इन सांसदों वहां गुप्त बैठक की। माना जा रहा है कि इन बागियों ने भूपेंद्र यादव के घर दल-बदल की अहम रणनीति बनाई है। बता दें कि इस बागी गुट को दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित हुए बिना अलग होने के लिए तृणमूल के 28 लोकसभा सांसदों में से कम से कम 19 का समर्थन चाहिए।

ओम बिरला से क्या गुहार?

इस बैठक के बाद काकोली ने बताया कि सांसदों ने रागज को समर्थन देने के अपने फैसले के बारे में लोकसभा अध्यक्ष को सूचित कर दिया है। उन्होंने कहा, ''करीब बीस सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर राजग को औपचारिक रूप से समर्थन देने का फैसला किया है और इनमें मैं भी शामिल हूं। हमने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र भेजकर राजग को समर्थन देने की अपनी इच्छा व्यक्त की है।'' सूत्रों के मुताबिक, बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष कहा कि उनका मत है कि काकोली सदन में पार्टी की वैध मुख्य सचेतक हैं और पार्टी नेतृत्व द्वारा घोषित कोई भी बाद के बदलाव आवश्यक संसदीय प्रक्रिया के माध्यम से पूरे नहीं किए गए थे।

इस खबर पर आपकी क्या राय है?

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

और पढ़ें