'आपके पास 5 साल है', राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ वैज्ञानिकों को दी कौन सी चुनौती
राजनाथ सिंह ने वैज्ञानिकों से अपील की, ‘अगर 25 साल लगते हैं, तो मान लीजिए कि 20 साल बीत चुके हैं और अब सिर्फ 5 साल बाकी हैं। यह कोई झटका नहीं, बल्कि चुनौती है।’

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ के वैज्ञानिकों को स्वदेशी एयरो इंजन विकसित करने के लिए बड़ी चुनौती दी है। सोमवार को बेंगलुरु स्थित गैस टरबाइन रिसर्च एस्टेब्लिशमेंट (GTRE) में उन्होंने कहा कि भारत को केवल 5वीं पीढ़ी के इंजनों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि छठी पीढ़ी की उन्नत तकनीकों पर तुरंत काम शुरू करना होगा। उन्होंने जोर दिया कि एयरो इंजन जैसी जटिल तकनीक में आत्मनिर्भरता राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। वैश्विक भू-राजनीतिक स्थिति तेजी से बदल रही है, सप्लाई चेन टूट रही हैं और नए इकोसिस्टम बन रहे हैं। ऐसे में केवल वही देश सुरक्षित रह सकता है जिसके पास अपनी तकनीक हो। राजनाथ सिंह ने जीटीआरई को भारत की रणनीतिक क्षमता का आधार बताया और वैज्ञानिकों की सराहना की।
रक्षा मंत्री ने पारंपरिक समयसीमा पर सवाल उठाते हुए कहा कि सामान्यतः एक एयरो इंजन विकसित करने में 20-25 साल लगते हैं, लेकिन भारत की वर्तमान परिस्थितियों, रणनीतिक जरूरतों और राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं को देखते हुए अब केवल 5 साल बचे हैं। उन्होंने वैज्ञानिकों से अपील की, 'अगर 25 साल लगते हैं, तो मान लीजिए कि 20 साल बीत चुके हैं और अब सिर्फ 5 साल बाकी हैं। यह कोई झटका नहीं, बल्कि चुनौती है।' उन्होंने कहा कि इन 5 सालों में हमें वह हासिल करना होगा जो अन्य देश 20 साल में करते हैं और उसमें भी अपना सर्वश्रेष्ठ देना होगा। यह समय सीमा कम करने का आह्वान भारत की तेजी से बदलती रक्षा जरूरतों को दर्शाता है, जहां लड़ाकू विमान, ट्रांसपोर्ट प्लेन, हेलीकॉप्टर और यूएवी के लिए शक्तिशाली इंजनों की आवश्यकता है।
छठी पीढ़ी की तकनीकों पर फोकस
रक्षा मंत्री ने जोर दिया कि भारत अब सिर्फ पांचवीं पीढ़ी के इंजनों पर निर्भर नहीं रह सकता। एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) जैसे प्रोजेक्ट्स के साथ आगे बढ़ते हुए छठी पीढ़ी की तकनीकों पर फोकस करना होगा। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और एडवांस्ड मटेरियल्स का इस्तेमाल शामिल होगा। उन्होंने कहा कि एयरो इंजन विकास थर्मोडायनामिक्स, मटेरियल साइंस, फ्लुइड मैकेनिक्स और मैकेनिकल इंजीनियरिंग का जटिल संयोजन है, जिसे कुछ ही देशों ने मास्टर किया है। विदेशी निर्भरता से सप्लाई प्रतिबंध और अपग्रेड सीमाएं जैसी कमजोरियां आती हैं, इसलिए स्वदेशी क्षमता मजबूत करनी होगी।
एयरो इंजन विकास पर जोर
रक्षा मंत्री ने अपने लगभग 7 साल के कार्यकाल में एयरो इंजन विकास को प्राथमिकता देने का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सत्ता में आने के बाद आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के कई कदम उठाए गए हैं। जीटीआरई में कावेरी इंजन के फुल आफ्टरबर्नर टेस्ट जैसे माइलस्टोन को याद करते हुए उन्होंने वैज्ञानिकों से राष्ट्रव्यापी इकोसिस्टम बनाने और अगली पीढ़ी के इंजनों पर तेजी से काम करने का आह्वान किया। यह चुनौती भारत को रक्षा क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जो राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं को साकार करने में मदद करेगी।





