इसे 'आतंकी कृत्य' करें घोषित ; TCS के धर्मांतरण केस में BJP नेता ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा

Pramod Praveen पीटीआई, नई दिल्ली
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याचिका में केंद्र और राज्यों को धर्मांतरण के मामलों से निपटने के लिए विशेष अदालतें स्थापित करने और यह घोषित करने के निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है कि धोखे से किए गए धर्मांतरण के लिए सजा एक साथ नहीं बल्कि क्रमिक होगी।

इसे 'आतंकी कृत्य' करें घोषित ; TCS के धर्मांतरण केस में BJP नेता ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा

महाराष्ट्र के नासिक स्थित बहुराष्ट्रीय कंपनी के अंदर चल रहे धर्मांतरण और यौन उत्पीड़न के खेल का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। भाजपा नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय ने गुरुवार (16 अप्रैल) को शीर्ष न्यायालय में एक याचिका दायर कर वहां चल रहे जबरदस्ती धर्म परिवर्तन की हरकतों को "आतंकवादी कृत्य" घोषित करने की मांग की है। याचिका में धोखाधड़ीपूर्ण धर्मांतरण को नियंत्रित करने के लिये निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है। यह याचिका नासिक में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़ (TCS) के दफ़्तर में धर्म परिवर्तन और यौन उत्पीड़न के आरोपों के सामने आने के बाद दायर की गई है।

अपनी याचिका में अश्विनी उपाध्याय ने दलील दी है कि "धोखे से धर्म परिवर्तन" न केवल "संप्रभुता, धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र और स्वतंत्रता के लिए एक गंभीर खतरा है, बल्कि भाईचारे, गरिमा, एकता और राष्ट्रीय एकता के लिए भी एक संकट है।" याचिका में कहा गया है, “नासिक में संगठित धर्म परिवर्तन ने पूरे देश के नागरिकों की अंतरात्मा को झकझोर दिया है। इसलिए, याचिकाकर्ता धोखे से धर्म परिवर्तन पर रोक लगाने के लिए निर्देश और घोषणाएं जारी करने की मांग करते हुए यह आवेदन दायर कर रहा है।”

यह एक सुनियोजित साज़िश है

अधिवक्ता अश्विनी दुबे के माध्यम से दायर याचिका में धर्मांतरण को नियंत्रित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार को कड़े कदम उठाने के निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। इसमें आगे कहा गया, “ज़बरदस्ती या धोखे से धर्म परिवर्तन कोई अलग-थलग धार्मिक कृत्य नहीं है, बल्कि यह एक सुनियोजित साज़िश है, जिसे अक्सर विदेशी संस्थाओं द्वारा वित्तपोषित किया जाता है, ताकि जनसांख्यिकीय संतुलन को बदला जा सके और इस तरह भारत की एकता, अखंडता और सुरक्षा को खतरा पहुँचाया जा सके। ऐसे में, यह UAPA की धारा 15 के तहत परिभाषित 'आतंकवादी कृत्य' के दायरे में आता है।”

"आतंकवादी कृत्य" के दायरे में आता है

याचिका में यह तर्क दिया गया कि जबरन धर्मांतरण का अपराध, जब एक व्यवस्थित, संगठित और जबरदस्ती अभियान के हिस्से के रूप में किया जाता है, तो भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 113 के तहत परिभाषित "आतंकवादी कृत्य" के दायरे में आता है। इसमें केंद्र और राज्यों को धर्मांतरण के मामलों से निपटने के लिए विशेष अदालतें स्थापित करने और यह घोषित करने के निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है कि धोखे से किए गए धर्मांतरण के लिए सजा एक साथ नहीं बल्कि क्रमिक होगी। याचिका में कहा गया है कि धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार में धोखाधड़ी, बल प्रयोग, दबाव या छल के माध्यम से दूसरों को धर्मांतरित करने का अधिकार शामिल नहीं है।

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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