खून-खराबा हो या जुल्मो-सितम: PoK में हर उत्पीड़न के लिए कायर पाकिस्तान जिम्मेदार; MEA की हुंकार
भारत ने मंगलवार को दू टूक कहा कि पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर (PoK) में हो रहे विरोध-प्रदर्शन, पाकिस्तान द्वारा दशकों से किए जा रहे लगातार शोषण और लोगों को बुनियादी अधिकारों से वंचित रखने का नतीजा है।

भारत ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में जारी विरोध-प्रदर्शनों को इस्लामाबाद की ओर से क्षेत्र में दशकों से जारी सुनियोजित उत्पीड़न और प्रशासनिक दमन का सीधा नतीजा करार दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को एक प्रेस वार्ता में कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय समुदाय से उम्मीद करता है कि वह पीओके में हो रहे "गंभीर अत्याचारों और गलत कृत्यों" के लिए पाकिस्तान को "पूरी तरह जवाबदेह" ठहराएगा। उन्होंने कहा कि पीओके में हो रहे हरेक खून-खराबा से लेकर जुल्म-ओ-सितम के लिए पाकिस्तान जिम्मेदार है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी उसे इसके लिए जिम्मेदार मानता है।
जायसवाल ने कहा, "पीओके में जारी विरोध-प्रदर्शन पाकिस्तान की ओर से अपने अवैध नियंत्रण वाले इलाकों में दशकों से किए जा रहे सुनियोजित उत्पीड़न, लोगों को बुनियादी अधिकारों से वंचित किए जाने और प्रशासनिक दमन का सीधा नतीजा हैं।" उन्होंने कहा, “स्थानीय लोगों की जायज शिकायतों का समाधान करने के बजाय पाकिस्तान ने महिलाओं और बच्चों सहित आम लोगों के खिलाफ पुलिस की अत्यधिक बर्बरता का सहारा लिया है। खाद्य सामग्री और दवाओं जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति रोकी गई, इंटरनेट सेवाएं बंद की गईं और निहत्थे नागरिकों पर घातक बल का प्रयोग किया गया, जिससे कई लोगों की मौत हो गई।”
POK में प्रदर्शनकारियों पर जुल्म
जायसवाल ने कहा, "हम उम्मीद करते हैं कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इन गंभीर अत्याचारों और गलत कृत्यों के लिए पाकिस्तान को पूरी तरह जवाबदेह ठहराएगा।" बता दें कि PoK में महंगाई, कथित प्रशासनिक उदासीनता, राजनीतिक भेदभाव और अल्पसंख्यकों पर अत्याचार के खिलाफ पिछले महीने से बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं। इन प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कथित बर्बरता की खबरें भी सामने आई हैं, जिनमें कई प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई और कई घायल हो गए।
शिकायत दूर करने की बजाय बल प्रयोग हो रहा
विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस्लामाबाद पर आरोप लगाया कि उसने लोगों की शिकायतों को दूर करने के बजाय, जनता के विरोध का जवाब बहुत ज़्यादा बल प्रयोग करके दिया। भारत का हमेशा से यह कहना रहा है कि पाकिस्तान के कब्ज़े वाला जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। भारत ने बार-बार पाकिस्तान पर मानवाधिकारों के उल्लंघन और इस इलाके में रहने वाले लोगों के अधिकारों को दबाने का आरोप लगाया है। पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों के अलावा, विदेश मंत्रालय ने पश्चिम एशिया में हो रही घटनाओं पर भी प्रतिक्रिया दी।
दो जहाज़ों पर हुए हमलों को लेकर भारत चिंतित
विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह पश्चिम एशिया की स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रहा है। साथ ही, इस इलाके में कमर्शियल जहाज़ों पर हुए हमलों के बाद मंत्रालय ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से सुरक्षित और बिना रुकावट के आवाजाही की मांग की। रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत दो जहाज़ों पर हुए हमलों को लेकर बहुत चिंतित है, जिनमें एक भारतीय नाविक की मौत हो गई थी। उन्होंने कहा, "हम पश्चिम एशिया में हो रही घटनाओं पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं। हम होर्मुज़ से सुरक्षित और बिना रुकावट के आवाजाही और व्यापार जारी रखने की मांग करते हैं। यह दुनिया भर के लोगों की आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बहुत ज़रूरी है।" (भाषा इनपुट्स के साथ)
लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।


