Explainer: कल बीवी-बेटे को नोटिस, आज दल बदल; मदन मित्रा ने यूं ही नहीं झटका ‘ममता दीदी का हाथ’; इनसाइड स्टोरी

लाइव हिन्दुस्तान, कोलकाता
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ममता बनर्जी की सरकार में लंबे समय तक मंत्री रहे मदन मित्रा ने बुधवार (15 जुलाई) को दीदी का हाथ झटकते हुए TMC में ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई वाले बागी गुट में शामिल हो गए।

Madan Mitra

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले विधायक और पूर्व मंत्री मदन मित्रा ने दीदी को झटका दे दिया है और पाला बदलते हुए बागी गुट यानी नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई वाले गुट में शामिल हो गए हैं। कामरहाटी से विधायक मित्रा ने बताया कि उन्होंने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी की सभी राष्ट्रीय और राज्य समितियों से इस्तीफा दे दिया था। विधायक ने कहा कि उन्होंने तत्काल प्रभाव से पार्टी के मुख्य सचेतक पद से भी इस्तीफा दे दिया है।

मित्रा ने ऋतब्रत बनर्जी से मुलाकात के बाद पत्रकारों से कहा, ''मैंने अपना कमरा बदला है, मकान नहीं। मैं टीएमसी का ही हिस्सा हूं।'' इस घटनाक्रम को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, जो बीते कुछ महीने से अभूतपूर्व बगावत का सामना कर रही है लेकिन बड़ी बात यह है कि मदन मित्रा का यह हृदय परिवर्तन और दल-बदल अकारण नहीं हुआ है बल्कि इसके पीछे सियासी वजह से ज्यादा पारिवारिक और केंद्रीय जांच एजेंसी है।

बीवी-बेटे पर ED का शिकंजा

जी हां, एक दिन पहले ही यानी मंगलवार (14 जुलाई) को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पश्चिम बंगाल में कथित नगर निकाय भर्ती घोटाले से जुड़ी धन शोधन जांच के सिलसिले में मदन मित्रा की पत्नी और उनके दो बेटों को समन जारी करते हुए अगले हफ्ते पूछताछ के लिए बुलाया है। ईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, मदन मित्रा के परिवार के सदस्यों का संबंध इस मामले में जांच के दायरे में आए कुछ वित्तीय लेन-देन से जुड़ा पाया गया है, जिसके बाद यह समन जारी किया गया है।

अगले हफ्ते बयान दर्ज कराने के निर्देश

ईडी के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वित्तीय लेन-देन की जांच में विधायक की पत्नी और उनके दो बेटों के नाम सामने आए। उन्हें अपने बयान दर्ज कराने के लिए अगले हफ्ते बुलाया गया है। यह घटनाक्रम कथित भर्ती घोटाले के सिलसिले में मित्रा से जुड़े कई परिसरों पर ईडी द्वारा एक साथ तलाशी लिए जाने के कुछ हफ्ते बाद हुआ है।

मदन मित्रा का विवादों और घोटालों से पुराना नाता

मदन मित्रा न केवल चर्चित राजनीतिक हस्ती हैं बल्कि वह एक विवादित नेता भी रहे हैं, जिनका कई घोटालों में नाम आ चुका है। ममता सरकार में मंत्री रहे मदन मित्रा का नाम म्युनिसिपल भर्ती घोटाला, सारदा चिट फंड घोटाला और नारदा स्टिंग ऑपरेशन में भी आ चुका है। सारदा चिट फंड घोटाले में वह 22 महीने जेल में रह चुके हैं, जबकि नारदा स्टिंग ऑपरेशन में भी वह गिरफ्तार हो चुके हैं। उन्होंने 2025 में भगवान श्रीराम को मुसलमान बताकर एक बड़ा धार्मिक विवाद भी खड़ा किया था।

मित्रा ने ममता गुट छोड़ने की क्या वजह बताई?

ममता सरकार में मंत्री रह चुके मदन मित्रा ने कहा कि वह चाहते थे कि ममता बनर्जी के भतीजे और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी, जिन पर कई बागियों ने TMC में फूट का आरोप लगाया है, छह महीने के लिए पार्टी से हट जाएं, लेकिन जब यह मांग नहीं मानी गई, तो उन्होंने पार्टी छोड़ दी। मित्रा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "मैंने (अभिषेक) से कहा था कि चलो पार्टी को मज़बूत करते हैं, और फिर तुम वापस आकर अपनी जगह ले सकते हो, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। बकौल मित्रा उन्होंने कहा, 'मैं पार्टी नहीं छोड़ूंगा।' पार्टी डूब रही है; नाव डूब चुकी है। लोग मर रहे हैं। फिर भी, पार्टी ने यह तय किया, या यूं कहें कि उसे यह मानने के लिए मजबूर किया गया कि बाकी सब मर जाएं तो ठीक, लेकिन अभिषेक को बचाना जरूरी है। यह बहुत दुखद है।"

ऋतब्रत बनर्जी उनके बगल में बैठे थे

जिस समय मित्रा प्रेस कॉन्फ्रेन्स कर रहे थे, उस समय ऋतब्रत बनर्जी उनके बगल में बैठे थे, जिनके साथ TMC के ज़्यादातर विधायक हैं और जो अभी विधानसभा में विपक्ष के नेता हैं। बता दें कि मई में आए बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों में BJP की जीत और 15 साल बाद ममता की सरकार से विदाई होने के बाद से ही उनकी पार्टी में बगावत गहरी हो गई और पार्टी टूटती चली गई। ज़्यादातर विधायकों और सांसदों के बागी गुट में शामिल होने या तकनीकी रूप से त्रिपुरा की एक छोटी पार्टी में "विलय" हो जाने के कारण, असली TMC किसके पास है, इस मुद्दे पर चुनाव आयोग के सामने लड़ाई चल रही है।

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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