
सिखों से जुड़े पवित्र स्थल पर नाच-गान, फिर विवादों में फंसा पाकिस्तान; अब ‘मर्यादा उल्लंघन’ के आरोप
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री और PSGPC के अध्यक्ष रमेश सिंह अरोड़ा ने कहा है कि इस मामले को अनावश्यक रूप से तूल दिया जा रहा है और उसे सनसनीखेज बनाया जा रहा है।
गुरु नानक देव की 556वीं जयंती यानी प्रकाश पर्व मनाने के लिए पाकिस्तान के ननकाना साहिब गए करीब 2000 से अधिक भारतीय सिख तीर्थयात्रियों का जत्था लौटने की तैयारी में है। इस बीच, लाहौर में बुधवार की शाम सिखों के दूसरे पवित्र स्थल श्री देहरा साहिब के पास कथित तौर पर एक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया है। इस आयोजन ने वहां विवाद खड़ा कर दिया है। सिख समुदाय इसे सिखों की मर्यादा का उल्लंघन करार दे रहे हैं।

सूत्रों के हवाले से द ट्रिब्युन की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान सरकार द्वारा पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (PSGPC) और इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ETPB) के अधिकारियों की मौजूदगी में श्री देहरा साहिब के पास भांगड़ा, नृत्य और गायन का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। आलोचकों का मानना है कि पाँचवें सिख गुरु, गुरु अर्जन देव की शहादत स्थल के पास इस तरह का कार्यक्रम आयोजित करना सिख 'मर्यादा' (आचार संहिता) और उस स्थान की पवित्रता का उल्लंघन है।
पाक का पवित्रता उल्लंघन से इनकार
दूसरी तरफ, पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री और PSGPC के अध्यक्ष रमेश सिंह अरोड़ा ने कहा है कि इस मामले को अनावश्यक रूप से तूल दिया जा रहा है और उसे सनसनीखेज बनाया जा रहा है। एक ऑडियो संदेश में अरोड़ा ने स्पष्ट किया कि यह कार्यक्रम सिख तीर्थयात्रियों के सम्मान में आयोजित किया गया था, जो एक "सूफी नाइट" था और गुरुद्वारा परिसर से दूर हजूरी बाग में आयोजित किया गया था।
मस्जिद परिसर में कार्यक्रम का दावा
उन्होंने दावा किया कि कार्क्रम स्थल श्री देहरा साहिब के पास स्थित न होकर एक मस्जिद परिसर का हिस्सा है और शाही किला के सामने स्थित है। इस स्थान का उपयोग आमतौर पर राजकीय अतिथियों के कार्यक्रमों के लिए किया जाता है। उन्होंने कहा, “यह कोई 'नाच-गान' का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि हमारे कलाकारों द्वारा प्रस्तुत एक सूफी नाइट थी लेकिन कुछ सिखों ने बीच में अपनी लय पर कुछ नृत्य प्रस्तुत करने का प्रयास किया... हमारी ओर से किसी ने उन्हें ऐसा करने के लिए नहीं कहा था।”
अटारी-वाघा बॉर्डर पर भी हुआ था विवाद
बता दें कि सिखों के प्रथम गुरु श्री गुरु नानक देव जी की जयंती के उपलक्ष्य में मुख्य कार्यक्रम 7 नवंबर को उनके जन्मस्थान श्री ननकाना साहिब स्थित गुरुद्वारा जन्म स्थान में आयोजित किया गया था। इस जत्थे को पहले भी एक अलग विवाद का सामना करना पड़ा था, जब कुछ तीर्थयात्रियों को अटारी-वाघा सीमा के रास्ते पाकिस्तान में प्रवेश करने से कथित तौर पर इसलिए मना कर दिया गया था क्योंकि वे सिख समुदाय से संबंधित नहीं थे। हालांकि, पाकिस्तान ने उन दावों को भी निराधार और भ्रामक बताते हुए खारिज कर दिया था।



