जहां दलितों ने किया प्रदर्शन, उन सड़कों पर छिड़का हल्दी-दूध; अब तेलंगाना में ‘शुद्धिकरण’
तेलंगाना में दलित प्रदर्शन के बाद कथित शुद्धिकरण की रस्म को लेकर विवाद बढ़ गया। KCR के फार्महाउस के पास सड़कों पर हल्दी वाला पानी और दूध छिड़कने के आरोप में BRS समर्थकों पर तीन केस दर्ज हुए हैं। जानें पूरा मामला।

कांग्रेस शासित तेलंगाना में दलितों के प्रदर्शन के बाद कथित ‘शुद्धिकरण’ की रस्म को लेकर विवाद बढ़ गया है। सिद्दीपेट जिले में पूर्व मुख्यमंत्री और भारत राष्ट्र समिति (BRS) प्रमुख के चंद्रशेखर राव के फार्महाउस के आसपास ‘शुद्धिकरण’ किए जाने के आरोप में पुलिस ने BRS समर्थकों के खिलाफ तीन मामले दर्ज किए हैं। पुलिस के मुताबिक, यह घटनाक्रम मंगलवार को कांग्रेस के दलित कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन के कुछ घंटे बाद हुआ। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने राज्य में दलितों के अपमान और उनके खिलाफ अत्याचार के आरोपों की विस्तृत जांच का भरोसा दिया है।
खुद तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने आरोप लगाया कि पार्टी अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव के फार्महाउस के पास BRS समर्थकों ने एक 'शुद्धिकरण कार्यक्रम' किया। इसी जगह पर 8 सितंबर को कांग्रेस कार्यकर्ताओं और दलित एक्टिविस्ट्स ने स्पीकर के खिलाफ की गई 'अपमानजनक' टिप्पणियों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था। स्पीकर खुद एक दलित नेता हैं।
राज्य विधानसभा में तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने कहा, "चंद्रशेखर राव ने खुद एक फार्महाउस साजिश के तहत ये आदेश दिए थे। मैं यह साजिश या आदेश की बात खुद नहीं कह रहा हूं। BRS की संध्या राव ने कहा है कि 'आज KCR के आदेश पर, जहां-जहां दलितों ने फार्महाउस के आस-पास कदम रखे, वहां हल्दी वाले पानी से शुद्धिकरण किया गया'। क्या इससे ज्यादा अपमानजनक कुछ हो सकता है? मध्य युग के सम्राट भी ऐसा व्यवहार नहीं करते थे।"
दो गांवों में हुई ‘शुद्धिकरण’ की रस्म
तेलंगाना पुलिस के अनुसार, कथित रस्म एर्रावल्ली और वरदराजपुर गांवों में हुई। इन जगहों पर कांग्रेस के दलित कार्यकर्ताओं ने BRS के दो एमएलसी और विपक्ष के अन्य नेताओं के खिलाफ डप्पू (ढोल) बजाकर प्रदर्शन किया था।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस का कहना है कि कथित ‘शुद्धिकरण’ के दौरान उन सड़कों पर हल्दी वाला पानी और दूध छिड़का गया, जहां से कांग्रेस के दलित नेता और कार्यकर्ता गुजरे थे। तीनों मामले सिद्दीपेट कमिश्नरेट के तहत आने वाले मुर्कूक पुलिस थाने में दर्ज किए गए हैं।
किन धाराओं में दर्ज हुए मामले?
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 और नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किए हैं।
इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196 और 352 भी लगाई गई हैं। इनमें समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने और शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करने से संबंधित प्रावधान शामिल हैं।
पहले केस में BRS नेता समेत 11 लोग आरोपी
गजवेल ग्रामीण पुलिस निरीक्षक डी रवि राजू के मुताबिक, पहला मामला स्थानीय BRS नेता और पूर्व एर्रावल्ली सरपंच बालाराजू समेत 11 लोगों के खिलाफ दर्ज किया गया है। शिकायत एर्रावल्ली गांव के एम स्वामी ने की थी। उन्होंने पुलिस को बताया कि वह दलित प्रदर्शन में शामिल थे और उनके तथा अन्य प्रदर्शनकारियों के वहां से चले जाने के तुरंत बाद ‘शुद्धिकरण’ की रस्म की गई।
दूसरे मामले में वरदराजपुर गांव के BRS समर्थकों बालमणि, अप्पला प्रवीण, राजू और छह अन्य को आरोपी बनाया गया है। यह शिकायत गांव के किसान बी श्रीकांत ने की। तीसरा मामला BRS समर्थक पवानी गौड़ और आठ अन्य के खिलाफ दर्ज किया गया है। यह शिकायत वारंगल के बी मोहन की ओर से की गई।
BRS ने भी दर्ज कराई शिकायत, तस्वीरों को बताया AI से बनी
BRS ने इन आरोपों के जवाब में पुलिस में काउंटर-कम्प्लेंट दी है। पार्टी का कहना है कि कांग्रेस नेताओं की ओर से ‘शुद्धिकरण’ की रस्म का आरोप लगाने के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीरें भ्रामक हैं और AI से बनाई गई हैं।
पुलिस के मुताबिक, तीसरे मामले की शिकायत में कहा गया कि शिकायतकर्ता ने खबरों में गौड़ और अन्य BRS समर्थकों को वरदराजपुर और एर्रावल्ली फार्महाउस के बीच कथित शुद्धिकरण करते हुए देखा था।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
यह पूरा विवाद सोमवार को BRS के एमएलसी ताता मधुसूदन, जिन्हें ताता मधु के नाम से भी जाना जाता है, और नवीन कुमार रेड्डी पर विधानसभा अध्यक्ष जी. प्रसाद कुमार और उनकी मां के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोपों के बाद शुरू हुआ।
मंगलवार को पुलिस ने दोनों एमएलसी को गिरफ्तार किया था। बाद में स्थानीय अदालत ने उन्हें निजी मुचलके पर रिहा कर दिया। इस विवाद के बीच विधानसभा अध्यक्ष सदन में भावुक हो गए और उनकी आंखों से आंसू निकल आए। इसके बाद कांग्रेस के विधायक और मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने विधानसभा अध्यक्ष के समर्थन में खड़े होने की बात कही।
इसके बाद कांग्रेस के दलित नेताओं ने मंगलवार को डप्पू प्रदर्शन आयोजित किया। वे कथित मौखिक दुर्व्यवहार के विरोध में KCR के फार्महाउस तक मार्च करके पहुंचे थे।
अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं
सिद्दीपेट पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि इस मामले में और केस दर्ज किए जा सकते हैं। पुलिस के मुताबिक, राज्य के अलग-अलग थानों में भी ‘शुद्धिकरण’ की घटना को लेकर शिकायतें मिली हैं। इन्हें जीरो एफआईआर के रूप में सिद्दीपेट ट्रांसफर किया जा सकता है। फिलहाल इन मामलों में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। हालांकि पुलिस ने जांच के लिए फोरेंसिक सबूत जुटाए हैं। इनमें सड़कों पर छिड़का गया हल्दी वाला पानी भी शामिल है।
हल्द्वानी में खरगे की रैली के बाद भी हुआ था ‘शुद्धिकरण’
‘शुद्धिकरण’ को लेकर तेलंगाना का यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब उत्तराखंड के हल्द्वानी में भी कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद कथित शुद्धिकरण को लेकर विवाद हुआ था। 8 अगस्त को खरगे ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में रैली को संबोधित किया था। इसके दो दिन बाद 10 अगस्त को उसी स्थान पर कथित तौर पर शुद्धिकरण की रस्म किए जाने की बात सामने आई। इस घटना को लेकर कांग्रेस ने इसे जातिगत भेदभाव से जोड़ते हुए विरोध किया था। मामले में पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की है।


