आस्था से लेकर सत्ता तक... गाय के नाम पर क्यों भड़क जाती है देश की राजनीति?

लाइव हिन्दुस्तान
Follow us on Google News
share

Cow Politics: पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी सरकार ने पशु वध नियंत्रण अधिनियम 1950 को सख्ती से लागू किए जाने के बाद गौहत्या का मुद्दा एक बार फिर पूरे देश में सियासी और धार्मिक बहस का केंद्र बन गया है।

आस्था से लेकर सत्ता तक... गाय के नाम पर क्यों भड़क जाती है देश की राजनीति?

पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी सरकार ने पशु वध नियंत्रण अधिनियम 1950 को सख्ती से लागू किए जाने के बाद गौहत्या का मुद्दा एक बार फिर पूरे देश में सियासी और धार्मिक बहस का केंद्र बन गया है। इस कानून के प्रावधानों के अनुसार, 14 वर्ष से अधिक आयु के किसी भी पशु का वध केवल स्थानीय अधिकारियों और सरकारी पशु चिकित्सकों के लिखित अनिवार्य प्रमाणीकरण के बाद ही संभव है। इस फरमान के बाद न केवल पश्चिम बंगाल बल्कि पूरे देश में राजनीतिक दलों के बीच तीखी बहस छिड़ गई है। विपक्षी दलों ने इसे 'हिंदुत्व एजेंडे' का हिस्सा बताते हुए आलोचना की है, जबकि भाजपा ने इसे पशु क्रूरता रोकने और हिंदू भावनाओं का सम्मान करने का कदम बताया है। इस मुद्दे पर देशव्यापी चर्चा तेज हो गई है।

इसी बीच जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी और अजमेर शरीफ दरगाह के प्रमुख मौलवी सैयद सरवर चिश्ती ने केंद्र सरकार से औपचारिक अपील की है कि गाय के हिंदू समुदाय के लिए अत्यंत धार्मिक महत्व को देखते हुए उसे राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए। पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने भी इस मांग का खुलकर समर्थन किया है। अंसारी ने कहा कि अगर गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा देकर हम शांति, सद्भाव बनाए रख सकते हैं और विभिन्न समुदायों के बीच अनावश्यक संघर्ष को रोक सकते हैं, तो यह समस्या की जड़ को खत्म करने का बेहतरीन मौका है। हमें भावनात्मक मुद्दों को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने के बजाय समाधान की ओर बढ़ना चाहिए।

हिंदू-मुस्लिम तनाव का प्रमुख कारण

गौहत्या का मुद्दा भारत में एक सदी से भी अधिक समय से हिंदू-मुस्लिम संबंधों में तनाव और विश्वास की खाई का प्रमुख कारण बना हुआ है। इतिहासकारों के अनुसार, यह विवाद केवल धार्मिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनीतिक आयामों से भी जुड़ा है। मुगल सम्राट अकबर ने अपनी उदार नीतियों के तहत गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। 1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम के दौरान मुस्लिमों ने हिंदू भाइयों के साथ सद्भावना बनाए रखने के प्रतीक स्वरूप स्वेच्छा से गौहत्या रोक दी थी। इसी तरह 1919 के खिलाफत आंदोलन के समय भी मुस्लिम नेताओं ने गौहत्या पर रोक लगाई, जिसे महात्मा गांधी ने खुलकर समर्थन दिया था।

विद्वानों की क्या है राय?

इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय विद्वानों ने भी गहन अध्ययन किया है। ब्रिस्टल विश्वविद्यालय की समाजशास्त्री थेरेसे ओ टूले का मानना है कि गौ संरक्षण आंदोलन ने हिंदू समाज के रूढ़िवादी और सुधारवादी धड़ों के बीच की खाई को पाटकर एक मजबूत और एकीकृत हिंदू चेतना का निर्माण किया। वहीं, मैनचेस्टर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जॉन जावोस कहते हैं कि गौ रक्षा ने जाति व्यवस्था में बड़े बदलाव के बिना हिंदू समुदाय का क्षैतिज (Horizontal) एकीकरण संभव बनाया। इतिहासकार ज्ञानेंद्र पांडे के अनुसार, गौ रक्षा ‘गर्वित हिंदू’ होने की पहचान से गहराई से जुड़ गई, जिसके कारण यह पिछड़ी और दलित जातियों के लिए भी आकर्षक बन गई। मानवविज्ञानी पीटर वैन डेर वीर गाय को 'मां' के रूप में देखते हैं और कहते हैं कि इसका संरक्षण पितृसत्तात्मक व्यवस्था तथा हिंदू राष्ट्र की अवधारणा से सीधे जुड़ा हुआ है।

महात्मा गांधी का स्पष्ट रुख

महात्मा गांधी गाय से बेहद प्रेम करते थे और उन्हें 'गौमाता' मानते थे, लेकिन उन्होंने हमेशा अहिंसा, संवाद और समझौते पर जोर दिया। ‘हिंद स्वराज’ में उन्होंने लिखा था कि यदि कोई मुसलमान गाय मारने की कोशिश करे तो हिंदू उसे विनती करें, समझाएं और जरूरत पड़ी तो अपनी जान दे दें, लेकिन कभी मुसलमान भाई को नुकसान न पहुंचाएं। गांधीजी ने गौ रक्षा समितियों को 'गौ-हत्या समितियां' कहकर तीखी आलोचना की थी। 1921 में ‘यंग इंडिया’ में उन्होंने लिखा कि गाय बचाने के नाम पर किसी मनुष्य की हत्या करना हिंदू धर्म नहीं है। 1927 में उन्होंने हिंदू-मुस्लिम समझौते का प्रस्ताव रखा था, जिसमें मुसलमान गोमांस खाना छोड़ दें और हिंदू मस्जिदों के सामने संगीत न बजाएं।

संविधान सभा में हुई तीखी बहस

भारतीय संविधान सभा में ठाकुरदास भार्गव और सेठ गोविंद दास ने गौ संरक्षण को मौलिक अधिकार बनाने की पुरजोर कोशिश की। हालांकि, डॉ बीआर अंबेडकर के नेतृत्व में इसे मौलिक अधिकार की बजाय अनुच्छेद 48 के तहत राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांतों में शामिल किया गया। इस अनुच्छेद में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि राज्य गायों, बछड़ों और अन्य दुधारू पशुओं के संरक्षण और सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाएगा।

आजादी के बाद का राजनीतिक सफर

आजादी के बाद से अब तक कई प्रदेशों की सियासत गाय के इर्दगिर्द घूमती रही है। 1955 में उत्तर प्रदेश सरकार ने गौहत्या पर प्रतिबंध की सिफारिश स्वीकार की, लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने केंद्र स्तर पर ऐसे किसी कानून का कड़ा विरोध किया और यहां तक कहा कि वे प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे लेकिन झुकेंगे नहीं।

बिहार और मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकारों ने 1955 और 1959 में गौहत्या विरोधी कानून पारित किए। 1966 में दिल्ली में साधुओं के हिंसक प्रदर्शन के दौरान पुलिस फायरिंग में कई मौतें हुईं, जिसका 1967 के चुनावों में जनसंघ को फायदा मिला। 2004 में उमा भारती की सरकार ने मध्य प्रदेश में सख्त गौहत्या कानून लागू किया।

वहीं, 2017 में मोदी सरकार ने पशु बाजारों में मवेशी बिक्री पर प्रतिबंध लगाया, हालांकि बाद में इसे कुछ हद तक ढीला कर दिया गया। वर्तमान में भाजपा शासित अधिकांश राज्यों में गौहत्या कानूनों को और सख्त बना दिया गया है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है?

Devendra Kasyap

लेखक के बारे में

Devendra Kasyap

देवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।

देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।

मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।

और पढ़ें

Hindi News , इंडिया न्यूज़ , आज का मौसम , विधानसभा चुनाव और उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से जुड़ी नवीनतम खबरों और पल-पल की जानकारी के लिए हमारे साथ जुड़े रहें। सभी बड़ी खबरें सबसे पहले पाने के लिए लाइव हिन्दुस्तान ऐप अभी डाउनलोड करें।