ईरान के युद्ध में भारत को भी खींचा जा सकता है? शशि थरूर बोले- बड़ा नुकसान हो सकता है
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच होने वाले युद्ध का सीधा असर भारत पर भी पड़ रहा है। कांग्रेस के सीनियर नेता शशि थरूर ने कहा कि भारत को सीधे तौर पर युद्ध में नहीं खींचा जा सकता लेकिन उसे शांति का प्रयास जरूर करना चाहिए।

ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच हो रहे युद्ध का सीधा प्रभाव पूरी दुनिया पर देखा जा रहा है। इसी बीच कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद शशि थरूर ने कहा कि भारत को इस युद्ध में खींचा तो नहीं जाएगा लेकिन इसका प्रभाव साफ तौर पर नजर आएगा। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक थरूर ने कहा कि भारत का प्रयास यही होना चाहिए कि किसी भी तरह से यह युद्ध जल्द से जल्द रुक जाए। उन्होंने कहा कि भारत को भी युद्ध को रोकने और शांति स्थापित करने में पीछे नहीं रहना चाहिए।
थरूर ने कहा कि भारत के लाखों लोग खाड़ी देशों में रहते हैं। इसके अलावा ईरान में ही बड़ी संख्या में भारतीय रहते हैं। वे सभी इस युद्ध से बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा, लगभग एक करोड़ के आसपास भारतीय खाड़ी देशों में रहते हैं। उनका ना केवल आना जाना प्रभावित हुआ है बल्कि जीविका पर भी संकट आ गया है।
बता दें कि अमेरिका ने भारत समेत कई देशों को रूस से तेल खरीदने की 30 दिन की छूट दे दी है। युद्ध की वजह से दुनियाभरमें कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने यह फैसला किया है। उन्होंने कहा कि अगर कंपनियां रूस से तेल खरीदती भी हैं तब भी एक महीने बाद उन्हें फिर से समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शुक्रवार को कहा कि जी20 इस तरह से विकसित हो सकता है जिससे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रधानता को खतरा पैदा हो सकता है क्योंकि यह आज की समकालीन वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करता है और किसी चार्टर से बाधित नहीं है। 'रायसीना डायलॉग' के एक सत्र में थरूर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र का अस्तित्व बना रहेगा और भले ही यह वह संयुक्त राष्ट्र नहीं हो सकता है जिसकी 1945 में कल्पना की गई थी, लेकिन यह अंतरराष्ट्रीय सहयोग का केंद्र होगा।
उनका कहना था, ''मैं जो देख रहा हूं वह अंतरराष्ट्रीय सहयोग के कई स्वरूप हैं। उनमें से सबसे उल्लेखनीय जी20 है जो संयुक्त राष्ट्र के विपरीत किसी चार्टर द्वारा बाधित नहीं है।' संयुक्त राष्ट्र के पूर्व अवर महासचिव ने कहा, 'जी20 संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की तुलना में कहीं अधिक प्रतिनिधि संस्था है, क्योंकि यह संस्था 1945 की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करती है जबकि जी20 आज की समकालीन वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करती है।'' थरूर ने कहा, ''यह मंच इस तरह से विकसित हो सकता है जिससे सुरक्षा परिषद की प्रधानता को खतरा हो सकता है।'
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Ankit Ojhaविद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।
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अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।
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