Hindi NewsIndia NewsCongress tells Assam poll ticket aspirants Pay Rs 50000 upfront as Priyanka Gandhi oversee screening
टिकट चाहिए तो 50000 एडवांस दो, कांग्रेस का दावेदारों को साफ निर्देश; प्रियंका कर रहीं निगरानी

टिकट चाहिए तो 50000 एडवांस दो, कांग्रेस का दावेदारों को साफ निर्देश; प्रियंका कर रहीं निगरानी

संक्षेप:

कुछ विधानसभा सीटें गठबंधन सहयोगियों के लिए छोड़ी जा सकती हैं। ऐसे मामलों में आवेदन शुल्क लौटाने की बात कही गई है, लेकिन रिफंड की प्रक्रिया और समय-सीमा को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।

Jan 08, 2026 08:34 am ISTAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, गुवाहाटी
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कांग्रेस ने असम में 2026 के विधानसभा चुनावों की तैयारियां तेज कर दी हैं। इसके साथ ही पार्टी ने टिकट के दावेदारों को एक स्पष्ट संदेश दे दिया है कि अगर टिकट की दौड़ में शामिल होना चाहते हैं तो पहले 50,000 रुपये जमा करें। यह निर्देश ऐसे समय सामने आया है जब कांग्रेस ने टिकट स्क्रीनिंग की जिम्मेदारी प्रियंका गांधी वाड्रा को सौंपी है।

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द ट्रिब्यून के हाथ लगे एक सर्कुलर के मुताबिक, असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (APCC) ने पार्टी टिकट के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं, लेकिन आवेदन के साथ 50,000 रुपये की राशि जमा करना अनिवार्य कर दिया गया है। सर्कुलर में कहा गया है कि आवेदन 5 जनवरी से 20 जनवरी के बीच स्वीकार किए जाएंगे और केवल वही आवेदन विचार योग्य होंगे, जिनके साथ APCC के नाम से बना डिमांड ड्राफ्ट संलग्न होगा।

यह निर्देश APCC अध्यक्ष गौरव गोगोई के निर्देश पर जारी किया गया है। पार्टी इस रकम को ‘आवेदन शुल्क’ बता रही है, लेकिन इस फैसले ने संगठन के भीतर हलचल पैदा कर दी है, खासकर तब जब इसकी तुलना अन्य राज्यों में अपनाई गई प्रक्रिया से की जा रही है।

अन्य राज्यों से तुलना में असम अलग क्यों?

उदाहरण के लिए, 2024 के आंध्र प्रदेश चुनावों में कांग्रेस ने लोकसभा टिकट के लिए आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों से 15,000 रुपये और अन्य से 25,000 रुपये लिए थे। विधानसभा टिकट के लिए सामान्य वर्ग से 10,000 रुपये और आरक्षित वर्ग से 5,000 रुपये शुल्क था। इसी तरह हरियाणा विधानसभा चुनावों में सामान्य वर्ग से 20,000 रुपये प्रति आवेदन प्रति निर्वाचन क्षेत्र और अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग तथा महिलाओं से 5,000 रुपये लिए गए थे।

इन उदाहरणों के उलट, असम में बिना किसी श्रेणीगत भेद के सभी उम्मीदवारों से 50,000 रुपये की समान राशि लिए जाने का फैसला किया गया है। 126 सदस्यीय असम विधानसभा में टिकट पाने की आंतरिक प्रतिस्पर्धा पहले ही तीखी मानी जा रही है, ऐसे में यह फैसला जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच असहजता पैदा कर रहा है।

गठबंधन सीटों पर रिफंड का जिक्र, लेकिन स्पष्टता नहीं

APCC ने सर्कुलर में यह भी उल्लेख किया है कि कुछ विधानसभा सीटें गठबंधन सहयोगियों के लिए छोड़ी जा सकती हैं। ऐसे मामलों में आवेदन शुल्क लौटाने की बात कही गई है, लेकिन रिफंड की प्रक्रिया और समय-सीमा को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।

आवेदन प्रक्रिया क्या होगी?

  • उम्मीदवारों को निर्धारित फॉर्म भरना होगा
  • एक अंडरटेकिंग और वोटर लिस्ट की प्रमाणित प्रति (जिसमें नाम दर्ज हो) संलग्न करनी होगी
  • आवेदन APCC मुख्यालय में जमा करना होगा
  • आवेदन फॉर्म और डिमांड ड्राफ्ट की जेरॉक्स कॉपी संबंधित जिला और ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्षों को भी देनी होगी

पार्टी के भीतर उठ रहे सवाल

पार्टी के भीतर ही कुछ कार्यकर्ता निजी तौर पर सवाल उठा रहे हैं कि क्या यह वित्तीय शर्त एक तरह का अनौपचारिक फिल्टर बनती जा रही है। ऐसे समय में जब कांग्रेस खुद को संसाधन-सम्पन्न सत्ताधारी दल के मुकाबले आम कार्यकर्ताओं की पार्टी के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही है, यह कदम उसकी राजनीतिक छवि को लेकर नई बहस खड़ी कर रहा है।

स्क्रीनिंग कमेटी में कौन-कौन?

प्रियंका गांधी वाड्रा के अलावा स्क्रीनिंग कमेटी में साप्तगिरी शंकर उलाका, इमरान मसूद और सिरिवेल्ला प्रसाद को शामिल किया गया है। यह समिति उम्मीदवारों की शॉर्टलिस्टिंग और चुनाव से पहले आंतरिक परामर्श की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी। कुल मिलाकर, असम में कांग्रेस की टिकट नीति ने चुनावी तैयारियों के साथ-साथ पार्टी के भीतर एक नई बहस को जन्म दे दिया है- क्या टिकट की दौड़ अब संगठनात्मक कामकाज से ज्यादा आर्थिक क्षमता पर निर्भर होती जा रही है?

Amit Kumar

लेखक के बारे में

Amit Kumar
अमित कुमार एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया इंडस्ट्री में नौ वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। हिन्दुस्तान डिजिटल के साथ जुड़ने से पहले अमित ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया है। अमित ने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला (डिजिटल) से की। इसके अलावा उन्होंने वन इंडिया, इंडिया टीवी और जी न्यूज जैसे मीडिया हाउस में काम किया है, जहां उन्होंने न्यूज रिपोर्टिंग व कंटेंट क्रिएशन में अपनी स्किल्स को निखारा। अमित ने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा और गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी, हिसार से मास कम्युनिकेशन में मास्टर (MA) किया है। अपने पूरे करियर के दौरान, अमित ने डिजिटल मीडिया में विभिन्न बीट्स पर काम किया है। अमित की एक्सपर्टीज पॉलिटिक्स, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेट रिपोर्टिंग और मल्टीमीडिया स्टोरीटेलिंग सहित विभिन्न क्षेत्रों में फैली हुई है। अमित नई मीडिया तकनीकों और पत्रकारिता पर उनके प्रभाव को लेकर काफी जुनूनी हैं। और पढ़ें
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