चीन के प्रति मोदी सरकार की नीति '4C' वाली, केंद्र पर क्यों भड़की कांग्रेस; ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट पर जताई चिंता
पूर्व पर्यावरण मंत्री ने आरोप लगाया कि ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को प्रधानमंत्री द्वारा बुलडोज किया जा रहा है और पूरी संभावना है कि यह 'मोदानी' व्यापारिक साम्राज्य का हिस्सा बनेगी । उन्होंने चेतावनी दी कि इसके विनाशकारी प्रभाव होंगे।

मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने चीन के प्रति केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के दृष्टिकोण पर कड़ा प्रहार किया है और इसे "4C नीति" करार दिया है। कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने बुधवार (20 मई) को बीजिंग के प्रति मोदी सरकार के रवैये को लेकर निशाना साधा और आरोप लगाया कि वह चीन के सामने लगातार, नपी-तुली हार मानने की '4C नीति' अपना रही है। रमेश ने सरकार पर हमला बोलने के लिए ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट का मुद्दा भी उठाया। उनके अनुसार, केंद्र सरकार बीजिंग के सामने "कंटिन्यूड, कैलिब्रेटेड कैपिटुलेशन" (लगातार, नपा-तुला समर्पण) की राह पर चल रही है।
रमेश ने सरकार पर ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना के पर्यावरणीय दुष्प्रभाव को लेकर आवाज उठाने वालों के खिलाफ दुष्प्रचार अभियान चलाने का आरोप भी लगाया और कहा कि यह एक विशुद्ध व्यावसायिक परियोजना है, जिसमें सैन्य अवसंरचना का कोई तत्व नहीं जुड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए उन लोगों को "चीन पर नरम" होने का तमगा दे रही है, जो ग्रेट निकोबार परियोजना पर सवाल उठा रहे हैं। जयराम रमेश ने यह भी कहा कि इस मामले को चीन से जोड़कर सरकार पाखंड का परिचय दे रही है क्योंकि वह खुद इस पड़ोसी देश के सामने निरंतर समर्पण की नीति पर अमल कर रही है।
4C यानी चीन के प्रति निरंतर और सुनियोजित समर्पण
रमेश ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर पोस्ट किया, "मोदी सरकार अब अपने तंत्र के जरिए एक दुष्प्रचार अभियान चला रही है, जिसमें ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना से होने वाली पर्यावरणीय तबाही को लेकर चिंता करने वालों को 'चीन के प्रति नरम' दिखाने की कोशिश की जा रही है।" उन्होंने दावा किया कि यह पाखंड की पराकाष्ठा है, क्योंकि यही सरकार चीन के प्रति 4सी यानी "कन्टिन्यूइंग, कैलिब्रेटेड कैपिचुलेशन टू चाइना" वाली नीति (चीन के प्रति निरंतर और सुनियोजित समर्पण की नीति) अपना रही है।"
चीन को 'क्लीन चिट' और बढ़ता व्यापार घाटा
कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री पर हमला बोलते हुए कहा कि 19 जून, 2020 को चीन को दी गई "अस्पष्ट क्लीन चिट" लद्दाख में शहीद हुए 20 जवानों का अपमान था। कांग्रेस नेता ने आगे कहा, "19 जून 2020 को खुद प्रधानमंत्री ने चीन को एक तरह से क्लीन चिट दे दी थी, जो लद्दाख में शहीद हुए 20 जवानों का सीधा अपमान था।" इसके साथ ही रमेश ने दावा किया कि चीन के साथ बातचीत में मोदी सरकार ने लद्दाख के कई इलाकों में पारंपरिक गश्त और उन इलाकों में पशुओं को चराने के अधिकार छोड़ दिए हैं।
उनका कहना है, “प्रधानमंत्री की निगरानी में ही 2025-26 में भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा रिकॉर्ड लगभग 115 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिसका सबसे ज्यादा नुकसान भारतीय उद्योगों, खासकर MSME को हुआ। मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की प्रतिक्रिया की योजना, निगरानी और उसे कार्यान्वित करने में चीन की निर्णायक भूमिका को लेकर वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के खुलासों पर भी प्रधानमंत्री ने कुछ नहीं कहा।”
ग्रेट निकोबार परियोजना: सामरिक या व्यावसायिक?
जयराम रमेश ने ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना की रणनीतिक आवश्यकता पर भी सवाल उठाए हैं। रमेश ने सुझाव दिया कि सरकार को 'आईएनएस बाज़' (INS Baaz) जैसे मौजूदा स्थानों पर बुनियादी ढांचे का विस्तार करना चाहिए, लेकिन इसे नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा, "सच्चाई यह है कि भारत को चीन की आर्थिक और रणनीतिक चुनौती का लगातार कई मोर्चों पर सामना करना है। लेकिन ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना मुख्य रूप से एक व्यावसायिक परियोजना है, और इसका जो ट्रांसशिपमेंट पोर्ट हिस्सा है, उसमें सैन्य अवसंरचना का कोई तत्व नहीं है। INS बाज और अंडमान एवं निकोबार कमांड के अन्य ठिकानों पर सैन्य ढांचे के विस्तार के सुझाव दिए गए हैं, लेकिन उन्हें लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है, क्योंकि जिस ग्रेट निकोबार परियोजना को प्रधानमंत्री बुलडोजर चलाकर आगे बढ़ा रहे हैं, उसके मोदानी कारोबारी साम्राज्य का हिस्सा बनने की पूरी संभावना है।" रमेश ने कहा, "दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि इसका पर्यावरण और मानवीय स्तर पर बेहद विनाशकारी असर पड़ेगा।"
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लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।


