अब मुझे किरेन रिजिजू से सीखना पड़ेगा? किस बात पर भड़क गए 84 साल के मल्लिकार्जुन खरगे
संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हुआ है और अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी और नीट प्रश्नपत्र लीक को लेकर प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई सहित विभिन्न मुद्दों पर गतिरोध बने होने के कारण कार्यवाही बार-बार बाधित होती रही है।

संसद के उच्च सदन राज्यसभा में आज भी जमकर हंगामा हुआ। सत्ता पक्ष औक विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक के बीच सदन में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू पर भड़क गए। 84 वर्षीय खरगे ने कहा कि उन्हें किरेन रिरिजू ससंदीय नियम न सिखाएं। खरगे ने ये भी कहा कि सदन में क्या बोलना है और क्या नहीं, यह उनका अधिकार है। रिजिजू के टोकने पर भड़के खरगे ने आसन की ओर मुखातिब होते हुए कहा, सर, क्या अब रिजिजू से मुझे सीखना पड़ रहा है। नियम मैं भी जानता हूं। आपके चैम्बर में आकर बोलते हैं कि रोज वही लिखकर आकर पढ़कर बोलते हैं। अगर मैं यहां रूल्स नहीं पढ़ूंगा, अगर अपना विषय पढ़कर नहीं बोलूंगा, तो क्या तुमने जो दिए, उसे मैं पढ़ूं? अरे! यह मेरा अधिकार है कि मैं क्या बोलूं, कब बोलूं और कैसे बोलूं?'
दरअसल, विपक्ष पिछले कई दिनों से गृह मंत्री अमित शाह को संसद में बुलाने की मांग कर रहा है। खरगे ने आज फिर उस मांग को दोहराया कि 20 जुलाई को दिल्ली में छात्रों पर हुए पुलिसिया हमले पर गृह मंत्री सदन में आकर जवाब दें। विपक्ष चर्चा के लिए तैयार है। एक बार स्थगन के बाद दोपहर 12 बजे जब सदन में प्रश्नकाल की कार्यवाही शुरू हुई तो नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कुछ कहना चाहा। विपक्ष की नारेबाजी के बीच पर्यटन मंत्रालय से संबंधित पहला प्रश्न पूरा होने के बाद सभापति राधाकृष्णन ने उन्हें बोलने का मौका दिया। तब खरगे ने उनसे अनुरोध किया कि वह प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को सदन में आने का निर्देश दें।
सभापति ने किरेन रिजिजू को टोका
इसी पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने आपत्ति जताते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष मांग कर सकते हैं, अनुरोध कर सकते हैं लेकिन वह सदन को अपने हिसाब से नहीं चला सकते। उन्होंने कोई नियम नहीं बताया है और सीधे आसन को निर्देश दे रहे हैं। वह यह तय नहीं कर सकते कि किस मंत्री को किस दिन आना है। इस पर सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने किरेन रिजिजू को टोका और कहा कि नेता प्रतिपक्ष खरगे ने कोई निर्देश नहीं दिया है। उन्होंने कहा, "उन्होंने (नेता प्रतिपक्ष ने) मेरे जरिये अनुरोध भर किया है। उन्होंने विपक्ष की भावना व्यक्त की है। संसदीय कार्य मंत्री के रूप में आपको उस भावना को गृह मंत्री तक पहुंचाना है, यह मेरा अनुरोध है।" इस पर रिजिजू ने उन्हें आश्वासन दिया कि वह गृह मंत्री तक यह बात पहुंचा देंगे।
पवन खेड़ा के मामले पर भी बोले खरगे
कांग्रेस अध्यक्ष ने संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू की ओर से कांग्रेस के नवनिर्वाचित संसद पवन खेड़ा पर की गई टिप्पणी का भी जवाब दिया। सत्ता पक्ष की तरफ से शोर-शराबे के बीच खरगे ने अपनी बात रखते समय सुबह शून्यकाल के दौरान कांग्रेस के पवन खेड़ा पर संसदीय कार्य मंत्री की टिप्पणी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा, "आपने पवन खेड़ा का नाम लेकर उनका अपमान किया है, जैसे आप ही सर्वेसर्वा हैं।" उन्होंने पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली के राज्यसभा में दिये गये एक वक्तव्य का अंश भी पढ़ा जिसमें भाजपा नेता ने कहा था कि व्यवधान लोकतंत्र का हिस्सा है, सदस्य प्रक्रिया से संबंधित कोई भी प्रश्न उठा सकते हैं। खरगे ने आरोप लगाया कि जब विपक्ष प्रश्न पूछता है तो सरकार उत्तर नहीं देती है।
सदन में चलता रहा हंगामा
रिजिजू ने कहा कि सभापति ने नेता प्रतिपक्ष को हर दिन बोलने का मौका दिया है लेकिन उन्होंने बार-बार वहीं बात उठायी। नियम 240 कहता है कि एक सदस्य उसी बात को दोबारा नहीं उठा सकता जो वह आसन की अनुमति से पहले उठा चुका है। इसके बाद कानून मंत्रालय से संबंधित एक और प्रश्न पूछा गया। इस बीच दूसरे विपक्षी सदस्यों ने भी व्यवस्था का प्रश्न उठाते हुए कुछ मुद्दे उठाने चाहे। संसदीय कार्यमंत्री को उनके निर्देश के बाद भी विपक्ष का हंगामा शांत न होता देख दोपहर 12.30 बजे के करीब सभापति ने सदन की कार्यवाही अपराह्न 2.15 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।


