जेफरी एपस्टीन से बात क्यों कर रहे थे हरदीप पुरी, तुरंत इस्तीफा दें; कांग्रेस के गंभीर आरोप
हरदीप पुरी ने उनके खिलाफ आरोप लगाने के लिए राहुल गांधी पर पलटवार किया था। उन्होंने कहा कि उनकी मुलाकात जेफ्री एपस्टीन से कुछ मौकों पर हुई थी, लेकिन उसके साथ हुई बातचीत का उन अपराधों से कोई लेना-देना नहीं था।

विपक्षी सांसदों ने एपस्टीन फाइल से जुड़े मामले में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के इस्तीफे की मांग की है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने एएनआई से बातचीत में कहा, 'स्पष्ट रूप से हरदीप सिंह पूरी के इस्तीफे की मांग कांग्रेस पार्टी कर रही है। इस व्यक्ति को 1 सेकंड के लिए अपने पद पर बने रहने का हक नहीं है। नैतिक अधिकार कतई नहीं है। पिछले 48 घंटों में हरदीप पुरी ने केवल झूठ बोला।' उन्होंने सवाल किया कि डिजिटल इंडिया लॉन्च होने से पहले एपस्टीन से हरदीप बात क्यों कर रहे थे? उस वक्त तो हरदीप कुछ नहीं थे। वह एक रिटायर्ड डिप्लोमैट थे।
हरदीप सिंह पुरी के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष ने शुक्रवार को संसद परिसर में प्रदर्शन किया। कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने संसद भवन के मकर द्वार के निकट एकत्रित होकर प्रदर्शन किया और 'हरदीप पुरी इस्तीफा दो' के नारे लगाए। उन्होंने एक बड़ा बैनर भी ले रखा था जिस पर जेफ्री एपस्टीन और पुरी की तस्वीर थी।
राहुल गांधी ने भी उठाए सवाल
पेट्रोलियम मंत्री पुरी ने उनके खिलाफ आरोप लगाने के लिए बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर पलटवार किया था। उन्होंने कहा था कि उनकी मुलाकात जेफ्री एपस्टीन से कुछ मौकों पर हुई थी, लेकिन उसके साथ हुई बातचीत का उन अपराधों से कोई लेना-देना नहीं था जिनमें अमेरिकी यौन अपराधी शामिल था। पुरी का स्पष्टीकरण गांधी के उस दावे के बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि केंद्रीय मंत्री का नाम अमेरिका में जारी एप्स्टीन फाइल्स में सामने आया है।
हरदीप पुरी ने अपने बयान में क्या कहा
हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि इस मामले में अनावश्यक विवाद खड़ा करने की कोशिश की जा रही है। बेबुनियाद आरोप लगाना राहुल गांधी की आदत हो गई है। उनकी राजनीतिक बयानबाजी में मनोरंजन का तत्व अधिक दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि एपस्टीन फाइल से जुड़े कई दस्तावेज पहले से सार्वजनिक डोमेन में मौजूद हैं और लगभग 30 लाख ई-मेल जारी हुए हैं। पुरी ने स्पष्ट किया कि मई 2009 से लेकर आठ वर्षों तक वह न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि के रूप में कार्यरत रहे और वर्ष 2017 में मंत्री बने। इस अवधि के दौरान अंतरराष्ट्रीय बैठकों और कार्यक्रमों में कई वैश्विक व्यक्तियों से उनकी मुलाकातें हुईं, जिनमें एपस्टीन से तीन-चार मुलाकातें भी शामिल थीं।


