भारत में तलवार की नोक पर नहीं फैला इस्लाम, बल्कि… शशि थरूर ने बताई क्या वजहें?
शशि थरूर ने कहा कि भारत में इस्लाम एक खबर की तरह, यानी लोगों के जरिए आया, न कि किसी जबरन थोपे गए शासन के रूप में। उनके अनुसार, बराबरी और भाईचारे का संदेश लोगों को आकर्षित करता था, जिसकी वजह से लोगों ने इसे अपनाया।

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने हाल ही में एक कार्यक्रम में भारत में इस्लाम के प्रचार को लेकर कुछ अहम टिप्पणियां की हैं। थरूर ने अपने विचार साझा करते हुए इतिहास को लेकर चुनिंदा व्याख्याओं पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा है कि भारत में इस्लाम युद्ध या तलवार के जरिए नहीं आया, बल्कि शांतिपूर्ण व्यापार, सांस्कृतिक मेलजोल और सूफी परंपरा के जरिए इसका प्रसार हुआ।
नई दिल्ली में आयोजित नेशनल हिस्ट्री कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए शशि थरूर ने कहा कि भारत का इतिहास साझा और कई परतों से मिलकर बना है, जिसे सिर्फ हिंसा की नजर से नहीं देखा जा सकता। केरल का उदाहरण देते हुए थरूर ने कहा कि वहां मुस्लिम समुदाय का विकास व्यापार के जरिए हुआ। स्थानीय लोग, जो ज्यादातर हिंदू थे, मुस्लिम व्यापारियों के संपर्क में आए और इसी मेलजोल से धीरे-धीरे समाज में बदलाव आया, न कि किसी सैन्य जीत के कारण।
उन्होंने आगे कहा कि इस्लाम भारत में एक ‘खबर की तरह’, यानी लोगों के जरिए आया। कांग्रेस सांसद के मुताबिक लोगों को बराबरी और भाईचारे का संदेश आकर्षित करता था, जिसकी वजह से लोग इसकी तरफ खिंचे चले आए।
इतिहास को चुनिंदा तरीके से पेश किया जा रहा- थरूर
थरूर ने आगे अपनी बात रखते हुए कहा कि आज इतिहास को चुनिंदा तरीके से पेश किया जा रहा है, जहां भारत में मुस्लिमों को सिर्फ एक नजरिए से दिखाया जाता है, जबकि असल तस्वीर इससे कहीं ज्यादा व्यापक और संतुलित है। थरूर ने यहां एक पुरानी कहानी का जिक्र किया, जिसमें एक हिंदू राजा के पैगंबर से मिलने की बात कही जाती है। इसके जरिए उन्होंने बताने की कोशिश की कि भारत की पहचान हमेशा से अलग-अलग संस्कृतियों और विचारों के मेल से बनी है, न कि किसी एक जैसी परंपरा से।
कांग्रेस सांसद की एक चेतावनी
थरूर ने चेतावनी दी कि आज की राजनीति अक्सर इतिहास को बहुत सीमित तरीके से दिखाती है, जहां केवल संघर्ष और टकराव को ही उभारा जाता है। उनके मुताबिक, इससे भारत की असली बहुस्तरीय और जटिल विरासत नजरअंदाज हो जाती है। उन्होंने मौलाना अबुल कलाम आजाद और अल्लाह बख्श सूमरो जैसे नेताओं का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत में इस्लाम की सोच और राजनीति कभी एक जैसी नहीं रही। यह अलग-अलग विचारों और रास्तों का मिश्रण था, जिसे अक्सर भुला दिया जाता है। उन्होंने कहा है कि अगर हम अपने साझा और विविध इतिहास को सही तरीके से नहीं समझेंगे, तो समाज में और ज्यादा विभाजन पैदा होगा। इसलिए जरूरी है कि अतीत को व्यापक नजरिए से देखा जाए, ताकि आज के समय में समाज में फैली दूरियां कम की जा सकें।
लेखक के बारे में
Jagriti Kumariजागृति को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 2 साल पहले लाइव हिन्दुस्तान के साथ करियर की शुरुआत हुई। उससे पहले डिग्री-डिप्लोमा सब जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में। भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और संत जेवियर्स कॉलेज रांची से स्नातक के बाद से खबरें लिखने का सिलसिला जारी। खबरों को इस तरह से बताना जैसे कोई बेहद दिलचस्प किस्सा, जागृति की खासियत है। अंतर्राष्ट्रीय संबंध और अर्थव्यवस्था की खबरों में गहरी रुचि। लाइव हिन्दुस्तान में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शानदार कवरेज के लिए इंस्टा अवॉर्ड जीता और अब बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर रोजाना कुछ नया सीखने की ललक के साथ आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा सिनेमा को समझने की जिज्ञासा है।
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