भारत पर कैसे भरोसा करें? विदेश में उठे सवाल पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर का जवाब
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि भारत ने मालदीव के राष्ट्रपति मुइज्जू के इंडिया आउट कैंपेन के बावजूद उनकी मदद की। इतना ही नहीं भारत ने इसके बदले में भी कुछ नहीं मांगा। इस मानवीय सहायता के बाद दोनों देशों के संबंधों में नरमी आई।

Shashi Tharoor: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नार्डिक देशों की हालिया यात्रा के दौरान एक नार्वे की पत्रकार ने भारत को लेकर कुछ सवाल उठाए थे। विदेश मंत्रालय की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकार हेले लिंग ने पूछा कि आखिर दुनिया कैसे भारत पर भरोसा करे। उस दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सिबी जॉर्ज ने इसका बेहतरीन जवाब दिया था। अब इसी तरह के एक सवाल का जवाब कांग्रेस सांसद और वैश्विक नीति के जानकार शशि थरूर ने दिया है। उन्होंने भारत के विश्वास बनाने की नीति को हाल में मालदीव और भारत के घटनाक्रम का उदाहरण दिया।
द फ्लेचर स्कूल में एक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने मालदीव के वर्तमान राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के इंडिया आउट कैंपेन का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मुईज्जू इंडिया आउट कैंपेन की दम पर ही सत्ता में आए, लेकिन इसके बाद भी जब उन्हें जरूरत पड़ी, तो भारत ही मदद के लिए सबसे आगे खड़ा हुआ मिला। इसके बाद दोनों देशों के संबंधों में सुधार देखने को मिला।
थरूर ने किया भारत मालदीव रिश्तों का जिक्र
थरूर ने कहा, "पिछले मालदीव चुनाव में जो व्यक्ति राष्ट्रपति बना है, वह अपने पूरे अभियान के दौरान इंडिया आउट कैंपेन चलाता रहा। चुनाव को जीतने के बाद ही उसने तुरंत भारत और हमारी कंपनियों के साथ हुए अनुबंद रद्द कर दिए। इतना ही नहीं उसने दशकों पहले से मालदीव में मौजूद भारतीय सैनिकों को भी वहां से निकलने के लिए कह दिया।"
थरूर ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि भारत के साथ रिश्तों में काफी कड़वाहट आ गई। लेकिन इसके बाद वहां का एकमात्र डिसेलिनेशन प्लांट खराब हो गया और पूरे मालदीव में पानी कि किल्लत हो गई। थरूर ने कहा, "मालदीव की राजधानी का एक मात्र डिसेलिनेशन प्लांट खराब हो गया, हालात यह हुए कि अचानक मालदीव के लोगों के पास पीने का पानी नहीं था। ऐसे मौके पर भारत ने लाखों लीटर बोतल बंद पानी मालदीव भेजा। इसके बदले में हमने कुछ नहीं मांगा। भारत की तरफ से यह पड़ोसी देश होने के नाते मानवीय कदम था।"
थरूर ने कहा कि नई दिल्ली के इस कदम से मुइज्जू के इंडिया आउट रुख में काफी नरमी आई और दोनों देशों के बीच में संबंध बेहतर हुए। उन्होंने कहा कि 'भारत इसी तरह से विश्वास बनाता है।'
भारत और मालदीव के रिश्ते
गौरतलब है कि शशि थरूर ने भारत और मालदीव के संबंधों को लेकर बात की है। 2023 में मालदीव के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान मुईज्जू ने इंडिया आउट कैंपेन चलाया था। इसके बाद वह जीत दर्ज करके राष्ट्रपति बने थे। चीन के करीब माने जाने वाले मुइज्जू ने मालदीव की मदद के लिए वहाँ पर मौजूद कुछ भारतीय सैन्य कर्मियों को वापस भेजा। बल्कि चीन के साथ अपनी नजदीकी भी बढ़ानी चाही। भारत की तरफ से इस पर संयमित रुख बनाए रखा गया। इसके बाद जब मालदीव को जरूरत पड़ी तो भारत ही उनके काम आया।
इतना ही नहीं, 2024 में पीएम मोदी की लक्ष्यद्वीप यात्रा को लेकर भी मुईज्जू के कुछ मंत्रियों ने प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ अपमान जनक टिप्पणी भी की थी। इसके बाद मुइज्जू ने ही उनके खिलाफ कार्रवाई की थी। इसके बाद भी भारत ने अपने रुख को संयमित बनाए रखा।
बता दें, समय में कई बार भारत अपने पड़ोसियों और सामान्य तौर पर दूसरे देशों की मानवता के आधार पर मदद करता रहता है। तुर्किए शुरुआत से ही पाकिस्तान का समर्थक देश है। लेकिन इसके बाद भी जब वहां भूकंप आया तो मदद के लिए सबसे पहले भारत ही वहां पर पहुंचा था। इसके श्रीलंका में राजपक्षे के शासन काल के दौरान चीन की तरफ उसका झुकाव बढ़ा था। इसके बाद भी जब जरूरत पड़ी, तो भारत ही उसकी मदद के लिए आया था। पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल समेत तमाम ऐसे देश हैं, जिनकी मदद भारत ने कई बार मानवीय आधार पर की है।
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लेखक के बारे में
Upendra Thapakउपेंद्र ने डिजिटल पत्रकारिता की शुरुआत लाइव हिन्दुस्तान से की है। पिछले एक साल से वे होम टीम में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की कवरेज की है। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली (बैच 2023-24) से पूरी करने वाले उपेंद्र को इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, राजनीति, खेल, विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों में गहरी रुचि है। स्नातक स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने के कारण उन्हें मेडिकल और वैज्ञानिक विषयों की भाषा की भी अच्छी समझ है। वे मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के निवासी हैं।
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