5 बड़ी उपलब्धियां... संसद का मॉनसूत्र सत्र विफल रहने पर भी कांग्रेस क्यों गदगद? जयराम रमेश ने बताया
जयराम रमेश ने कहा कि इस मॉनसून सत्र में विपक्ष को 5 बड़ी उपलब्धियां हासिल हुई हैं। पहली उपलब्धि यह है कि सरकार वन नेशन, वन इलेक्शन बिल इस सेशन के दौरान पेश नहीं कर पाई। वो दो तिहाई बहुमत जुटाने में भी फेल रही।

संसद का मॉनसून सत्र समाप्त हो चुका है और दोनों सदनों को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया है। एक तरफ जहां इस बात की चर्चा हो रही है कि संसद का यह सत्र विपक्षी हंगामे की भेंट चढ़ गया और कोई खास कामकाज इस सत्र में नहीं हो सका, वहीं कांग्रेस इस बात से गदगद है कि इस सत्र में पांच उपलब्धियां उसके हाथ लगी हैं। कांग्रेस ने मॉनसून सत्र के समापन पर कहा है कि विपक्ष की एकजुटता इस सत्र की बड़ी उपलब्धि रही और उसके सामूहिक दबाव के कारण सरकार को कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर पीछे हटना पड़ा है।
कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश और लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने कांग्रेस मुख्यालय में गुरुवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि विपक्ष ने नीट परीक्षा में अनियमितता, राम मंदिर ट्रस्ट में चढ़ावा चोरी, एथेनॉल में मिलावट, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित राज्यों में भ्रष्टाचार, चीन से जुड़े मुद्दों तथा सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में भ्रष्टाचार जैसे विषयों पर चर्चा की मांग की थी, लेकिन सरकार ने इन मुद्दों पर चर्चा नहीं कराई।
विपक्ष को 5 बड़ी उपलब्धियां हासिल हुईं
जयराम रमेश ने आगे कहा, "मेरा मानना है कि इस मॉनसून सत्र में विपक्ष को 5 बड़ी उपलब्धियां हासिल हुई हैं। पहली उपलब्धि यह है कि सरकार वन नेशन, वन इलेक्शन बिल, इस सेशन के दौरान पेश करने का इरादा रखती थी लेकिन विपक्ष के विरोध को देखते हुए उसे अब शीतकालीन सत्र तक टाल दिया गया है। दूसरी बड़ी सफलता विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान (VBSA) बिल से जुड़ी है जो सभी यूनिवर्सिटीज़ का बड़े पैमाने पर सेंट्रलाइज़ेशन करने के मकसद से सरकार लाना चाहती थी लेकिन इस बिल को भी शीतकालीन सत्र तक टाल दिया गया। तीसरा बिल संविधान (एक सौ तीसवां संशोधन) बिल था, जिसमें मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों और प्रधानमंत्रियों को अपने आप हटाने का प्रस्ताव था...रिपोर्ट को फाइनल किया जा रहा था, और क्लॉज़-बाय-क्लॉज़ चर्चा चल रही थी, लेकिन मीटिंग के बीच में यह घोषणा की गई कि यह बिल भी इस सेशन में पेश नहीं की जाएगा।"
मीडिया में इस बात की बहुत चर्चा थी…
जयराम रमेश ने कहा, "पिछले 10 दिनों से, मीडिया में इस बात की बहुत चर्चा थी कि FCRA बिल बस आने ही वाला है; होम मिनिस्टर इस बात पर पूरी तरह अटल और अडिग हैं कि FCRA बिल इसी सत्र में पेश किया जाएगा। फिर अमेरिका कसे उपराष्ट्रपति का फोन आया, और हमने उसका नतीजा देखा। हमारी तरफ से और अलग-अलग संगठनों की तरफ से भी दबाव था, लेकिन US वाइस प्रेसिडेंट का दखल ज़रूर एक वजह थी...और यह बिल अब ठंडे बस्ते में चला गया।" उन्होंने कहा, "एक पांचवीं कामयाबी भी है। वे दो-तिहाई बहुमत के लिए इतने बेचैन थे कि उन्होंने पार्टियों में फूट डाली, TMC और शिवसेना को तोड़ा, और दूसरों को तोड़ने की कोशिश की, यह सब परिसीमन बिल पास करने के लिए ज़रूरी काले दो-तिहाई बहुमत जुटाने के लिए किया गया लेकिन अब, यह साफ हो गया है कि उनके पास दो-तिहाई बहुमत नहीं है। उनके पास यह काला बहुमत नहीं है, और न ही कभी होगा, चाहे वे कितनी भी तोड़फोड़ की कोशिश कर लें।”
11 वर्ष पहले 2015 में व्यापम घोटाला, इस बार नीट…
रमेश ने यह भी कहा कि 11 वर्ष पहले 2015 में व्यापम घोटाले के कारण मॉनसून सत्र बाधित हुआ था और 11 साल बाद इस बार नीट मामले के कारण सत्र में गतिरोध रहा। उन्होंने कहा कि 18 दिन तक विपक्षी दलों के नेताओं की लगातार बैठकें हुईं और विपक्षी एकता स्पष्ट रूप से सामने आई। वहीं गौरव गोगोई ने कहा कि छात्रों के आंदोलन के दबाव में सरकार को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेना पड़ा लेकिन गृहमंत्री अमित शाह से पुलिस कार्रवाई और छात्रों पर अत्याचार के संबंध में बयान देने की मांग को सरकार ने स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि सत्र के अंतिम दिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री शाह सदन में आए लेकिन इसके तुरंत बाद कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गई।


