बीच रमजान भूखे-प्यासे की निर्मम हत्या हुई, खामेनेई की मौत पर कांग्रेस ने जताया दुख
अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत ने मध्य पूर्व में तनाव को और बढ़ा दिया है। इजरायल और अमेरिका के हमलों को ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम और प्रॉक्सी युद्धों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई माना जा रहा है। दुनिया भर में प्रतिक्रियाएं विभाजित हैं।

कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल में पार्टी नेता सलमान खुर्शीद और पवन खेड़ा ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन पर दुख जताया। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा, 'शोक प्रस्ताव में मैंने और सलमान खुर्शीद ने कांग्रेस पार्टी की तरफ से ईरान के लोगों के लिए संदेश लिखा। इस कुर्बानी को बर्बाद नहीं होने देना चाहिए। हम सबको इस कुर्बानी से सिखना चाहिए। इस कुर्बानी को याद रखकर और इसके साथ-साथ हमें कुछ सीखना भी यही हमने अपने शोक संदेश में लिखा।' उन्होंने कहा कि रजमान के बीच और 10वें रोजे पर भूखे-प्यासे एक रहनुमा की हत्या हुई। यह बात आने वाली नश्लें याद रखेंगी।
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत 28 फरवरी को एक बड़े संयुक्त हमले में हुई, जिसमें अमेरिका और इजरायल ने तेहरान पर हवाई हमले किए। 86 वर्षीय खामेनेई तेहरान स्थित अपने कंपाउंड में थे, जब इजरायली और अमेरिकी स्ट्राइक्स ने उनके दफ्तर और आसपास के इलाकों को निशाना बनाया। ईरानी राज्य मीडिया ने 1 मार्च को उनकी मौत की आधिकारिक पुष्टि की, जिसमें उन्हें शहीद घोषित किया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी हमले के तुरंत बाद उनकी मौत की जानकारी दी। इस हमले में खामेनेई के परिवार के कुछ सदस्य भी मारे गए, जिससे ईरान में गहरा सदमा फैल गया। ईरान ने 40 दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित किया और कई शहरों में स्मृति सभाएं आयोजित की गईं।
चार दशकों तक देश की सत्ता पर मजबूत पकड़
अयातुल्ला अली खामेनेई 1989 से ईरान के सुप्रीम लीडर थे और उन्होंने लगभग चार दशकों तक देश की सत्ता पर मजबूत पकड़ बनाए रखी। उनकी मौत ने ईरान की राजनीति में ऐतिहासिक मोड़ ला दिया, क्योंकि सुप्रीम लीडर का पद इस्लामी क्रांति के बाद से अत्यंत शक्तिशाली रहा है। हमले के बाद तेहरान में विरोध प्रदर्शन और जश्न दोनों देखे गए। कई लोग, खासकर युवा और विरोधी, सड़कों पर उतरकर खुशी जाहिर कर रहे थे, जबकि शिया समुदाय और समर्थक गहरे शोक में डूबे थे। बगदाद जैसे शहरों में भी उनके समर्थकों ने प्रदर्शन किए। उत्तराधिकार को लेकर चर्चा तेज हो गई, जिसमें उनके बेटे को संभावित उम्मीदवार माना जा रहा है, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह बदलाव ईरान की आंतरिक स्थिरता और क्षेत्रीय संघर्षों को प्रभावित करेगा।
खामेनेई की मौत ने मध्य पूर्व में तनाव को और बढ़ा दिया है। इजरायल और अमेरिका के हमलों को ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम और प्रॉक्सी युद्धों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई माना जा रहा है। दुनिया भर में प्रतिक्रियाएं विभाजित हैं। कुछ देशों में शोक मनाया जा रहा है, जबकि कई जगहों पर इसे एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। ईरान अब अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है, जहां नया नेतृत्व चुनना और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखना बड़ी चुनौती बनेगा।
लेखक के बारे में
Niteesh Kumarपत्रकार नीतीश कुमार 8 साल से अधिक समय से मीडिया इंडस्ट्री में एक्टिव हैं। जनसत्ता डिजिटल से बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर शुरुआत हुई। लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ने से पहले टीवी9 भारतवर्ष और दैनिक भास्कर डिजिटल में भी काम कर चुके हैं। पत्रकार नीतीश कुमार को खबरें लिखने के साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग का शौक है। लाइव हिन्दुस्तान यूट्यूब चैनल के लिए लोकसभा चुनाव 2024, दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 और बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की कवरेज कर चुके हैं। फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान के लिए नेशनल और इंटरनेशनल सेक्शन की खबरें लिखते हैं। पत्रकार नीतीश कुमार को ब्रेकिंग न्यूज लिखने के साथ खबरों का गहराई से विश्लेषण करना पसंद है। राजनीति से जुड़ी खबरों पर मजबूत पकड़ और समझ रखते हैं। समसामयिक राजनीतिक मुद्दों पर कई सारे लंबे लेख लिख चुके हैं। पत्रकार नीतीश कुमार ने पत्रकारिता का पढ़ाई IIMC, दिल्ली (2016-17 बैच) से हुई। इससे पहले दिल्ली यूनिवर्सिटी के महाराजा अग्रसेन कॉलेज से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन किया। पत्रकार नीतीश कुमार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के रहने वाले हैं। राजनीति, खेल के साथ सिनेमा में भी दिलचस्पी रखते हैं। फिल्में देखना और रिव्यू करना व उन पर चर्चा करना हॉबी है।
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