हिंदू कोई धर्म नहीं है, हिंदू राष्ट्र क्यों कहते हैं? दिग्विजय सिंह का बड़ा बयान
दिग्विजय सिंह ने टी-20 विश्व कप में भारतीय क्रिकेटरों की ओर से पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ न मिलाने के मुद्दे पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, ‘उन्हें हाथ मिलाना चाहिए। यह खेल भावना है। खेल के मैदान पर राजनीति नहीं हावी होनी चाहिए।'

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने हिंदू राष्ट्र पर अपने विवादास्पद बयान पर शनिवार को सफाई दी। उन्होंने कहा, 'मैंने कहा था कि हिंदू कोई धर्म नहीं है। भारत एक देश है और भारतीय संविधान में लिखा है- हम भारत के लोग, अर्थात् भारत। इसलिए हमें इसे भारतवर्ष क्यों नहीं कहते? हिंदू राष्ट्र क्यों कहते हैं?' उन्होंने इस मुद्दे पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत की पहचान संवैधानिक रूप से भारत है, न कि किसी एक धर्म से जुड़ी। दिग्विजय सिंह ने इस बयान से स्पष्ट किया कि वे भारत को धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के रूप में देखते हैं और हिंदू राष्ट्र की अवधारणा को अस्वीकार करते हैं।
दिग्विजय सिंह ने टी-20 विश्व कप में भारतीय क्रिकेटरों की ओर से पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ न मिलाने के मुद्दे पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, 'उन्हें हाथ मिलाना चाहिए। यह खेल भावना है।' उन्होंने जोर देकर कहा कि खेल के मैदान पर राजनीति नहीं हावी होनी चाहिए और स्पोर्ट्समैनशिप के तहत दोनों टीमों को आपसी सम्मान दिखाना चाहिए। यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत-पाकिस्तान मैचों में हाल के वर्षों में हाथ न मिलाने की परंपरा शुरू हुई है, जिसे कई पूर्व क्रिकेटरों ने भी आलोचना की है।
RSS को लेकर मोहन भागवत का बयान
इस बीच, आरएसएस के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि संघ की तुलना किसी अन्य संगठन से नहीं की जा सकती, क्योंकि संघ जैसा कोई दूसरा है ही नहीं। उन्होंने कहा कि संघ की शाखा और संचलन को देखकर कुछ लोग इसे पैरा-मिलिट्री संगठन समझ लेते हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि संघ व्यक्ति निर्माण की कार्यशाला है, जहां व्यक्ति के सर्वांगीण विकास की प्रक्रिया को मूर्त रूप दिया जाता है। भागवत मेरठ व ब्रज प्रांत की प्रमुख जन संवाद गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।
'भारत में रहने वाला हर व्यक्ति हिन्दू'
मोहन भागवत ने कहा, 'संघ की स्थापना ऐसे समय में हुई जब देश पराधीन था और समाज अनेक कुरीतियों व असमानताओं से ग्रस्त था। केशव बलिराम हेडगेवार के संपर्क उस समय के कई स्वतंत्रता सेनानियों बाल गंगाधर तिलक, मदन मोहन मालवीय, सुभाषचंद्र बोस, विनायक दामोदर सावरकर, भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद से थे। उस समय एक प्रमुख चिंता यह थी कि भारत बार-बार पराधीन क्यों होता है।' उन्होंने कहा कि भारत में रहने वाला हर व्यक्ति हिन्दू है। हिन्दू शब्द का अर्थ किसी मत-पंथ विशेष से नहीं, बल्कि उस जीवन दृष्टि से है जो सबको जोड़ने, सबके हित में सोचने और समस्त सृष्टि के कल्याण की प्रेरणा देती है। भागवत ने कहा कि मत, पंथ और पूजा पद्धतियां अलग हो सकती हैं, लेकिन सांस्कृतिक पहचान एक है।


