बंगाल में बकरीद पर बकरे की कुर्बानी पर लगा ग्रहण, शुभेंदु सरकार ने बनाए कड़े नियम
राज्य सरकार ने सार्वजनिक स्लॉटर हाउस पर भी प्रतिबंध लगा दिया है। नए नियमों के अनुसार, पशुओं का वध केवल नगर पालिका की वधशाला या स्थानीय प्रशासन द्वारा निर्दिष्ट वधशाला में ही किया जा सकेगा।

Bengal Government: पश्चिम बंगाल की नई नवेली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने राज्य में पशु वध को लेकर कड़े निर्देश जारी किए हैं। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार ने 'बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950' और 2018 के कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए एक नोटिस जारी किया है। इस नोटिस के अनुसार, अब अनिवार्य फिटनेस सर्टिफिकेट के बिना किसी भी मवेशी या भैंस के वध पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। भाजपा सरकार का यह आदेश बकरीद के ठीक पहले जारी किया गया है, जिससे बंगाल की सियासत गरमाने सकती है। आपको बता दें कि 26 मई को ईद उल-अजहा मनाया जाएगा, जिसमें बकरे की खुलेआम कुर्बानी दी जाती है।
सरकार द्वारा स्पष्ट किया गया है कि फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रिया काफी सख्त होगी। इसके लिए कई शर्तें अनिवार्य की गई हैं। यह प्रमाणपत्र किसी भी नगर पालिका के अध्यक्ष या पंचायत समिति के अध्यक्ष द्वारा सरकारी पशु चिकित्सा अधिकारी के साथ संयुक्त रूप से जारी किया जाएगा। दोनों अधिकारियों को लिखित रूप में इस बात पर सहमत होना होगा कि पशु वध के योग्य है। प्रमाणपत्र केवल तभी दिया जाएगा जब पशु की आयु 14 वर्ष से अधिक हो, वृद्धावस्था, चोट, विकृति या किसी लाइलाज बीमारी के कारण स्थायी रूप से अक्षम हो गया हो।
सार्वजनिक वध पर रोक
राज्य सरकार ने सार्वजनिक स्लॉटर हाउस पर भी प्रतिबंध लगा दिया है। नए नियमों के अनुसार, पशुओं का वध केवल नगर पालिका की वधशाला या स्थानीय प्रशासन द्वारा निर्दिष्ट वधशाला में ही किया जा सकेगा। पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950 के उल्लंघन को गंभीर अपराध माना जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने पर छह महीने तक की जेल या 1,000 तक का जुर्माना या जेल और जुर्माना दोनों हो सकते हैं।
यदि किसी व्यक्ति को फिटनेस सर्टिफिकेट देने से मना कर दिया जाता है, तो वह इस निर्णय के विरुद्ध 15 दिनों के भीतर राज्य सरकार के पास अपील कर सकता है।
आपको बता दें कि ममता बनर्जी के 15 साल के शासन को समाप्त करने के बाद शुभेंदु अधिकारी सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर निर्णयों की झड़ी लगा दी है। 2026 के विधानसभा चुनाव परिणामों ने राज्य की राजनीति में एक बड़ा बदलाव दिखाया है। 294 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा ने 206 सीटें जीतकर निर्णायक जनादेश हासिल किया है। पिछले चुनाव की 77 सीटों के मुकाबले एक बड़ी छलांग है। वहीं, तृणमूल कांग्रेस (TMC) इस बार मात्र 80 सीटों पर सिमट कर दूसरे स्थान पर रही है।
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