एफिल टावर विवाद में कूदे कॉकरोच, अभिजीत दीपके बोले- धर्म के ठेकेदार न बनें पिछड़ी सोच वाले पुरुष!
पेरिस के इस ऐतिहासिक स्मारक को उस समय कर्मचारियों के विरोध प्रदर्शन के कारण अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा, जब BAPS से जुड़े लगभग 100 सदस्यों के एक प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को वहां का दौरा किया।

फ्रांस की राजधानी पेरिस स्थित एफिल टॉवर में एक हिंदू प्रतिनिधिमंडल के दौरे के दौरान महिला कर्मचारियों को दूर हटाए जाने के आरोपों पर उठा विवाद गहरा गया है। इस पूरे मामले पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि धर्म को "पिछड़ी सोच वाले पुरुषों" के हाथों की कठपुतली नहीं बनने देना चाहिए।
अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर पोस्ट करते हुए लिखा, "पिछड़ी सोच वाले पुरुषों को धर्म का कस्टोडियन (संरक्षक) मत बनने दीजिए। जो पुरुष धर्म का इस्तेमाल महिलाओं पर अपनी सोच थोपने, नैतिकता तय करने और दूसरों की स्वतंत्रता छीनने के लिए करते हैं, वे धर्म और देश दोनों के लिए सिर्फ बदनामी लाते हैं।"
एफिल टॉवर पर क्या हुआ था?
पेरिस के इस ऐतिहासिक स्मारक को उस समय कर्मचारियों के विरोध प्रदर्शन के कारण अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा, जब BAPS (बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था) से जुड़े लगभग 100 सदस्यों के एक प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को वहां का दौरा किया।
ट्रेड यूनियन प्रतिनिधि ने आरोप लगाया कि प्रतिनिधिमंडल के गुजरने के दौरान महिला कर्मचारियों को उनके वर्कस्टेशन से हटा दिया गया।
एफिल टॉवर का संचालन करने वाली कंपनी SETE ने स्वीकार किया कि प्रतिनिधिमंडल ने महिलाओं के साथ बातचीत और संपर्क सीमित करने का अनुरोध किया था। कंपनी ने माना कि ऐसी शर्तों को "स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए था"।
फ्रांस के राजनीतिक गलियारों में भारी आक्रोश
इस घटना के सामने आते ही फ्रांसीसी नेताओं और कर्मचारियों ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया। पेरिस के मेयर इमैनुएल ग्रेगोइरे ने इस व्यवस्था को पूरी तरह से "अस्वीकार्य" बताया।
नेशनल असेंबली की अध्यक्ष येल ब्रौन-पिवेट ने कहा कि किसी विदेशी प्रतिनिधिमंडल या मेहमानों की मांगों को पूरा करने के लिए महिलाओं को कभी भी "एक तरफ हटने" के लिए नहीं कहा जाना चाहिए।
BAPS पेरिस संस्था ने मांगी माफी
मामले के तूल पकड़ने के बाद BAPS हिंदू मंदिर पेरिस ने एक आधिकारिक बयान जारी कर माफी मांगी है। संस्था ने कहा कि इस घटना से "किसी को भी पहुंचे दुख या असुविधा के लिए हम क्षमाप्रार्थी हैं।"
संस्था ने साफ किया कि वे इस चिंता को बेहद गंभीरता से ले रहे हैं और पारस्परिक सम्मान व निस्वार्थ सेवा के मूल्यों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।


