अब कनाडा में 'कॉकरोच' जैसा प्रदर्शन, सड़कों पर उतरे हजारों भारतीय छात्र; विदेशी भी शामिल
कॉकरोच प्रोटेस्ट की तरह कनाडा में भी छात्रों का विरोध प्रदर्शन। कनाडा में पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट रिजेक्ट होने पर 1,000 से अधिक भारतीय छात्र कैलगरी की सड़कों पर भूख हड़ताल कर रहे हैं।

भारत में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले हुए विरोध प्रदर्शन की तरह कनाडा में भी हजारों की संख्या में छात्र सड़कों पर उतर आए हैं। इन इंटरनेशनल छात्रों में सबसे ज्यादा भारत के पंजाब राज्य के छात्र शामिल हैं। यह विवाद पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट (PGWP) को लेकर है। परमिट की अर्जियां बड़े पैमाने पर रिजेक्ट होने के विरोध में 1,000 से अधिक अंतरराष्ट्रीय छात्र कैलगरी की सड़कों पर उतर आए हैं। ये छात्र पिछले करीब 10 दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं और क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठे हैं। इसी बीच, प्रदर्शन वाली जगह पर कनाडा की बॉर्डर सर्विस एजेंसी (CBSA) के छापे ने हड़कंप मचा दिया है।
धरने वाली जगह पर अधिकारियों की रेड
कनाडा बॉर्डर सर्विसेज एजेंसी के अधिकारियों ने कैलगरी में उस जगह पर अचानक छापा मारा, जहां छात्र धरने पर बैठे थे। मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार, अधिकारियों ने वहां मौजूद प्रदर्शनकारियों के इमिग्रेशन दस्तावेजों की बारीकी से जांच की।
यह कार्रवाई पूरे कनाडा में इमिग्रेशन कानूनों को सख्ती से लागू करने, नियमों के उल्लंघन की जांच करने और डिपोर्टेशन यानी देश निकाला देने की कार्यवाही के मद्देनजर की गई है।
आखिर क्यों सड़कों पर उतरे हैं छात्र?
छात्रों के गुस्से का मुख्य कारण पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट की अर्जियों को थोक के भाव रिजेक्ट किया जाना है। प्रभावित ग्रेजुएट्स का कहना है कि उनके परिवारों ने उन्हें विदेश भेजने के लिए बड़ा आर्थिक निवेश किया है। छात्रों ने इस भरोसे के साथ भारी ट्यूशन फीस भरी थी और कोर्स पूरा किया था कि पढ़ाई के बाद उन्हें वर्क परमिट मिल जाएगा।
छात्र लगातार मांग कर रहे हैं कि उनकी अर्जियों पर दोबारा विचार किया जाए। उनका तर्क है कि उन्होंने पुरानी समझ और नियमों के आधार पर पूरी ईमानदारी से अपनी अर्जियां जमा की थीं, इसलिए उनके मामलों का दोबारा मूल्यांकन होना चाहिए।
जालंधर की इमिग्रेशन कंपनी से जुड़े हैं तार
ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, इस पूरी स्थिति का संबंध आंशिक रूप से पंजाब के जालंधर में स्थित एक इमिग्रेशन फर्म से भी बताया जा रहा है। माना जा रहा है कि कई छात्रों ने इसी फर्म के जरिए दाखिला लिया था और अब यह विवाद का रूप ले चुका है।
कनाडा के इमिग्रेशन विभाग का क्या कहना है?
छात्रों के दावों और प्रदर्शन पर इमिग्रेशन, रिफ्यूजीज एंड सिटिजनशिप कनाडा (IRCC) ने भी अपना रुख साफ किया है। विभाग का कहना है कि उनके हालिया अपडेट में केवल 'नॉन-क्रेडिट प्रोग्राम' से जुड़ी मौजूदा योग्यताओं को स्पष्ट किया गया है। वर्क परमिट हासिल करने के जो मुख्य मापदंड हैं, उनमें कोई बदलाव नहीं किया गया है।
भारत में भी सड़कों पर हैं छात्र
कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में दिल्ली के जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक छात्र आंदोलन चला था जो पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ समाप्त हुआ था। सीजेपी ने सरकार के साथ बातचीत के बाद 25 जुलाई को अपना देशव्यापी विरोध प्रदर्शन वापस ले लिया था। नीट (राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा) पेपर लीक मामले को लेकर जंतर-मंतर पर उसका आंदोलन 36 दिनों तक चला था, जिसे विपक्षी नेताओं के अलावा देशभर के छात्रों और युवाओं का समर्थन मिला था। इस बीच झारखंड भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का विरोध प्रदर्शन बृहस्पतिवार को 20वें दिन भी जारी है। वहीं, प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगें पूरी होने तक आंदोलन वापस लेने से इनकार कर दिया है।
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अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।
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