सोनम वांगचुक के बाद मनोज जरांगे, अभिजीत दीपके फिर तैयार; दे दी वॉर्निंग
जरांगे मराठा समुदाय को ओबीसी श्रेणी के तहत आरक्षण देने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा वह मराठियों को कुनबी जाति के प्रमाणपत्र जारी करने की मांग भी कर रहे हैं। उनके सपोर्ट में अभिजीत दीपके उतरे हैं।

कॉकरोच पार्टी के अभिजीत दीपके एक बार फिर मैदान में उतरे हैं। इस बार उनके निशाने पर महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस की सरकार है। अभिजीत दीपके ने मराठा समुदाय को OBC श्रेणी के तहत आरक्षण दिलाने और कुनबी प्रमाणपत्र जारी करने की मांग को लेकर अनशन पर बैठे मराठी नेता मनोज जरांगे पाटिल का समर्थन किया है। अभिजीत दीपके शुक्रवार को मनोज जरांगे से मिलने पहुंचे। यहां उन्होंने CM फडणवीस की सरकार को निर्दयी तक कह दिया। बता दें कि जरांगे बीते 14 दिन से अनशन पर बैठे हैं।
शुक्रवार को कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दिपके ने जरांगे पाटिल से मुलाकात की। मुलाकात के बाद मीडिया से बात करते हुए अभिजीत दिपके ने भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “यह सरकार बेहद निर्दयी है। एक व्यक्ति यहां अपने लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के बच्चों को अच्छी शिक्षा और रोजगार दिलाने के लिए 14 दिनों से अनशन पर बैठा है और सरकार मिलने तक नहीं आई।”
जो सोनम वांगचुक के साथ हुआ…
नीट पेपर लीक आंदेलन की अगुवाई करने वाली CJP के फाउंडर ने कहा है कि जो सोनम वांगचुक के साथ किया गया, वह मनोज जरांगे के साथ नहीं किया जाना चाहिए। अभिजीत दीपके ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने सोनम वांगचुक के साथ उनके अनशन के दौरान जो किया, वैसा करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा, "यह महाराष्ट्र है। यहां ऐसा बिल्कुल नहीं चलेगा। अगर आपने मनोज जरांगे को हाथ भी लगाया, तो पूरा महाराष्ट्र यहां आ जाएगा।" बता दें कि नीट पेपर लीक के दौरान जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन के बीच दिल्ली पुलिस सोनम वांगचुक को अचानक उठाकर अस्पताल लेकर चली गई थी। सेहत बिगड़ने के बाद उन्हें जबरन अस्पताल ले जाया गया था।
फडनवीस सरकार पर निशाना
दीपके ने आगे कहा कि मनोज जरांगे के अनशन को 14 दिन हो चुके हैं, लेकिन सरकार ने अब तक उनसे कोई बातचीत नहीं की है। हमें नहीं पता कि हमारे राज्य और देश में क्या हो रहा है। जिन्हें जनता ने चुनकर भेजा है, वे जनता को छोड़कर हर किसी से मिल रहे हैं।”
अभिजीत दिपके ने सवाल उठाया कि क्या मनोज जरांगे जैसे सामाजिक कार्यकर्ताओं को मरने के लिए छोड़ दिया जाएगा? वे अच्छे शिक्षा और रोजगार की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे हैं। अगर उन्हें अच्छी शिक्षा और रोजगार दिया गया होता, तो क्या उन्हें भूख हड़ताल पर बैठने की जरूरत पड़ती? यह सरकार की नाकामी है। आपने जनता को मुश्किल में छोड़ दिया है। सरकार को समझना होगा कि मनोज जरांगे आरक्षण की मांग क्यों कर रहे हैं।… अगर सरकार ने अपना काम किया होता और जरूरी सुविधाएं दी होतीं, तो उन्हें भूख हड़ताल पर बैठने की जरूरत नहीं पड़ती।


