फैसले का स्वागत लेकिन आपको जो करना चाहिए था, वो किया ही नहीं; CJI सूर्यकांत से क्या चाहते थे CJP के सौरव दास?
पोस्ट में आगे कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के पास इस समस्या को ठीक करने के बेहतर तरीके थे। उनका कहना है कि कोर्ट उस अस्पष्ट गैर-कानूनी जमावड़े वाले कानून को खत्म कर सकता था जिसका पुलिस गलत इस्तेमाल करती है।

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक सौरव दास ने सोशल मीडिया पोस्ट में सुप्रीम कोर्ट के उस 'असाधारण फैसले' की तारीफ की है, जिसके तहत 20 जुलाई के विरोध प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी FIR रद्द कर दी गईं हैं। CJI जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए मंगलवार (1 सितंबर) को सभी प्राथमिकी रद्द करने का आदेश दिया था।
हालांकि, सौरव दास ने इस फैसले के बाद न्यायपालिका में 'बुनियादी बदलाव' की मांग की और कानूनी जानकार गौतम भाटिया की इस बात का समर्थन किया कि भारत का आपराधिक कानूनी प्रणाली बनावट के लिहाज से सरकार के पक्ष में झुका हुआ है। सौरव दास ने गौतम भाटिया के लेख को अपने एक्स अकाउंट पर साझा करते हुए एक पोस्ट में लिखा, "सुप्रीम कोर्ट के CJP से जुड़े खास आदेश के बारे में गौतम ने अपने ब्लॉग पोस्ट में जो लिखा है, मैं उससे पूरी तरह सहमत हूँ।" इसके बाद उन्होंने भाटिया के ब्लॉग के कई अहम हिस्से भी रिपोस्ट किए।
सिस्टम बहुत हद तक सरकार के पक्ष में झुका हुआ
भाटिया के ब्लॉग पोस्ट में कहा गया है, “जैसा कि सभी जानते हैं, इन कार्यवाही की असली वजह यह है कि आपराधिक कानून का सिस्टम बहुत हद तक सरकार के पक्ष में झुका हुआ है। किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक कानूनी कार्यवाही शुरू करने में लगभग कोई खर्च नहीं आता; उन चरणों में प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपाय कमजोर हैं और ठीक से लागू नहीं किए जाते; और गलत इरादे से मुकदमा चलाने के लिए मुआवज़े का कोई प्रावधान नहीं है। आपराधिक कानून का यही ढांचा है जो सबसे पहले छात्र-प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बड़ी संख्या में FIR दर्ज करने में मदद करता है।"
कोर्ट ने सिर्फ इस एक मामले में मदद की
पोस्ट में आगे कहा गया है, "सुप्रीम कोर्ट के पास इस समस्या को ठीक करने के बेहतर तरीके थे। उनका कहना है कि कोर्ट उस अस्पष्ट "गैर-कानूनी जमावड़े" (unlawful assembly) वाले कानून को खत्म कर सकता था जिसका पुलिस गलत इस्तेमाल करती है, लोगों को गलत आरोपों से बचाने के लिए मज़बूत नियम बना सकता था, या गलत तरीके से मुकदमा झेलने वाले लोगों को मुआवज़ा देने के लिए सही सिस्टम बना सकता था लेकिन इसके बजाय, कोर्ट ने सिर्फ़ इस एक मामले में लोगों की मदद की, बिना कोई ऐसा नियम बनाए जिससे भविष्य में इसी तरह की समस्या का सामना करने वाले दूसरों की मदद हो सके। इसलिए, भले ही अभी के लिए मामला सुलझ गया हो, लेकिन असल सिस्टम ठीक नहीं हुआ है और प्रदर्शनकारियों के अगले ग्रुप को फिर से उसी तरह के गलत बर्ताव का सामना करना पड़ सकता है।"
प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी FIR रद्द
बता दें कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के 5 सितंबर को प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से कुछ दिन पहले एक नाटकीय मोड़ आया, जिसके तहत मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए पांच राज्यों में NEET-UG प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी FIR रद्द कर दीं, जिसके बाद CJP ने अपना 5 सितंबर का मार्च रद्द कर दिया। कोर्टरूम के अंदर एक अहम पल में, मंगलवार को दास ने भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच का शुक्रिया भी अदा किया था। सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करते हुए दिल्ली, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम और महाराष्ट्र में NEET विरोध प्रदर्शनों के सिलसिले में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी FIR भी रद्द कर दी है।


