VIDEO: अब सड़कों पर उतरी 'कॉकरोच जनता पार्टी'! सोशल मीडिया पर शुरू हुई अनोखी जंग

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सिस्टम की बदहाली और नागरिक समस्याओं के खिलाफ युवाओं ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' बनाकर अनोखा डिजिटल विद्रोह शुरू किया है। जानिए क्या है वायरल #LifeOfACockroach कैंपेन।

VIDEO: अब सड़कों पर उतरी 'कॉकरोच जनता पार्टी'! सोशल मीडिया पर शुरू हुई अनोखी जंग

देश के युवाओं ने अब जर्जर बुनियादी ढांचे और नागरिक समस्याओं के खिलाफ अपना रोष प्रकट करने का एक बेहद अनोखा और व्यंग्यात्मक तरीका ढूंढ निकाला है। सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) अब सड़कों पर उतर आई है। उनका पहला ग्राउंड कैंपेन #LifeOfACockroach इंटरनेट पर तेजी से फैल रहा है और नगर निगमों की कार्यप्रणाली पर सीधा प्रहार कर रहा है।

इस कैंपेन के तहत 'कॉकरोच जनता पार्टी' के समर्थक देशभर में पोटहोल्स, कूड़े के ढेर, टूटे स्ट्रीटलाइट्स, सरकारी दफ्तरों में लापरवाही और अन्य नागरिक समस्याओं को रिकॉर्ड करके पार्टी को टैग कर रहे हैं। पार्टी का दावा है कि ये वीडियो और तस्वीरों को अम्प्लिफाई करके प्रशासन पर दबाव बनाया जाएगा।

अभिजीत दीपके नामक व्यक्ति द्वारा शुरू की गई इस ऑनलाइन 'कॉकरोच जनता पार्टी' ने एक वीडियो शेयर किया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस तीन मिनट के वीडियो में एक व्यक्ति कॉकरोच (तिलचट्टे) के आकार का मुखौटा पहनकर शहर की सड़कों और नालियों के आसपास दिखाई देता है। वीडियो का मुख्य संदेश गंदगी, खुले नालों और खराब स्वच्छता व्यवस्था के खिलाफ जागरूकता फैलाना है।

कैंपेन की प्रमुख गतिविधियां:

गड्ढों के साथ 'सर्वाइवल सेल्फी': युवा सड़कों के बड़े-बड़े गड्ढों के पास खड़े होकर सेल्फी ले रहे हैं और कैप्शन दे रहे हैं- "आज भी बिना गिरे ऑफिस पहुंच गया, एक कॉकरोच की तरह मेरी सर्वाइवल स्किल्स कमाल की हैं।"

कचरे के ढेरों की '5-स्टार' रेटिंग: कॉलोनियों के बाहर पड़े कूड़े के ढेरों और बदबूदार नालियों को गूगल मैप्स या सोशल मीडिया पर 'पर्यटन स्थल' बताकर 5-स्टार रेटिंग दी जा रही है।

'बेस्ट सिविक फेलियर' अवार्ड्स: स्थानीय पार्षदों और अधिकारियों को टैग करते हुए उनके इलाकों की सबसे खराब सड़कों और जलभराव वाले क्षेत्रों के लिए व्यंग्यात्मक डिजिटल सर्टिफिकेट बांटे जा रहे हैं।

वायरल मीम्स और रील्स: इंस्टाग्राम और एक्स पर कॉकरोच फिल्टर का इस्तेमाल करते हुए युवा अपनी दैनिक परेशानियों (जैसे दूषित पानी, ट्रैफिक जाम, और टूटी सड़कें) पर व्यंग्यात्मक रील्स बना रहे हैं।

CJI की टिप्पणी से शुरू हुआ आंदोलन

यह सब शुरू हुआ 15 मई 2026 को, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कुछ बेरोजगार युवाओं को “कॉकरोच” और “परजीवी” कहकर संबोधित किया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग फर्जी डिग्रियों के साथ वकालत, मीडिया और सोशल मीडिया में घुसकर सिस्टम पर हमला करते हैं। CJI ने बाद में स्पष्टीकरण दिया कि उनका इशारा फर्जी डिग्री वाले लोगों की ओर था, न कि पूरे युवा वर्ग की ओर।

लेकिन इस टिप्पणी ने सोशल मीडिया पर तूफान खड़ा कर दिया। बेरोजगारी, NEET पेपर लीक, UPSC की समस्याओं और युवा निराशा से जूझ रहे लाखों युवाओं ने इसे अपना अपमान माना। इसी गुस्से और व्यंग्य को पकड़ते हुए बोस्टन यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशंस के छात्र अभिजीत दीपके ने 16 मई को Cockroach Janta Party (CJP) की घोषणा की। “कॉकरोच” शब्द को उन्होंने अपनाया और इसे प्रतिरोध का प्रतीक बना दिया।

अभिजीत दीपके, 30 वर्षीय, महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर से हैं। उन्होंने पुणे में जर्नलिज्म की पढ़ाई की और AAP के साथ 2020-2023 तक सोशल मीडिया वॉलंटियर के रूप में काम किया, खासकर 2020 दिल्ली चुनावों में मीम-बेस्ड कैंपेन पर। वर्तमान में वे बोस्टन में मास्टर्स पूरा कर रहे हैं। CJP को उन्होंने शुरू में मजाक के रूप में लॉन्च किया, लेकिन यह तेजी से युवाओं के बीच लोकप्रिय हो गया।

विवाद और सरकारी कार्रवाई

CJP की तेज रफ्तार ने सरकार को चिंतित किया। इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के इनपुट पर MeitY ने X (ट्विटर) पर मूल अकाउंट को Section 69A के तहत भारत में ब्लॉक करवा दिया। अभिजीत ने नए हैंडल @Cockroachisback से कैंपेन जारी रखी। उन्होंने इंस्टाग्राम अकाउंट हैक होने, डेथ थ्रेट्स और परिवार को धमकियों का आरोप लगाया। दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है, जिसमें अकाउंट बहाल करने की मांग की गई।

अदालत ने कॉकरोच जनता पार्टी के एक्स हैंडल को खोलने के बारे में समिति से विचार करने को कहा

दिल्ली उच्च न्यायालय ने व्यंग्यात्मक शैली वाले डिजिटल संगठन कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के 'एक्स' अकाउंट को फिर से चालू करने का आदेश देने से शुक्रवार को मना कर दिया, लेकिन आईटी नियमों के तहत समीक्षा समिति को इस मामले पर विचार कर सात जुलाई से पहले फैसला लेने को कहा।

मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके को समिति के समक्ष डिजिटल माध्यम से पेश होने की अनुमति दे दी है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर समिति इस बात पर संतुष्ट होती है कि रोक हटायी जानी चाहिए, तो वह कानूनी रूप से सीजेपी का 'एक्स' अकाउंट फिर से चालू करने का आदेश दे सकती है।

सीजेपी के अकाउंट पर रोक लगाने के खिलाफ दीपके की याचिका पर केंद्र और 'एक्स' को नोटिस जारी करते हुए अदालत ने उनसे जवाब मांगा और मामले की अगली सुनवाई सात जुलाई को तय की। अदालत ने कहा, ''निर्देश दिया जाता है कि अगली सुनवाई से पहले समीक्षा समिति सभी पहलुओं की जांच करे और उसका फैसला रिकॉर्ड पर रखा जाए।''

दीपके की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अखिल सिब्बल ने कहा कि सीजेपी अकाउंट ''पूरी तरह व्यंग्य'' था और अगर कुछ पोस्ट ''आपत्तिजनक'' थे तो सिर्फ उन्हें हटाया जाना चाहिए था न कि पूरे अकाउंट को। अकाउंट को अंतरिम रूप से बहाल करने की अपील करते हुए दीपके के वकील ने न्यायाधीश से ''ब्लॉक'' संबंधी आदेश पर विचार करने का आग्रह किया। उनका कहना था कि आदेश की प्रति अब तक उन्हें उपलब्ध नहीं कराई गई है। न्यायमूर्ति कौरव ने कहा कि यह आदेश रिकॉर्ड पर नहीं है और केंद्र का जवाब आने के बाद ही याचिकाकर्ता के अनुरोध पर विचार किया जाएगा क्योंकि इस मामले में व्यापक परिणाम शामिल हो सकते हैं।

उन्होंने कहा, ''हम विचार करेंगे। यह पूरा कानून (सोशल मीडिया अकाउंट को 'ब्लॉक' करने संबंधी) अभी शुरुआती चरण में है। हमें आज के लिए जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। उन्हें नोटिस लेने दें और हमारे पास वापस आने दें। जो भी सामग्री हो, मैं उन्हें रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दे सकता हूं।'' साथ ही उन्होंने याचिकाकर्ता को अपनी शिकायत समीक्षा समिति के सामने रखने का सुझाव दिया।

याचिका में क्या बोले दीपके?

याचिका में दीपके ने कहा कि सीजेपी का अकाउंट व्यंग्य पर आधारित है और उसे संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क) के तहत संरक्षण प्राप्त है। उन्होंने कहा कि यदि कोई सामग्री आपत्तिजनक थी तो अधिकारियों को पूरे अकाउंट पर कार्रवाई करने के बजाय केवल उसी सामग्री पर रोक लगानी चाहिए थी। याचिका में इस कार्रवाई को ''असंगत'' बताया गया है।

याचिका में कहा गया है कि इस तरह सोशल मीडिया खाते पर रोक लगाना न्याय के सिद्धांतों और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम की धारा 69ए के तहत निर्धारित प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों का पूरी तरह ये उल्लंघन है, क्योंकि अधिकारियों ने बिना पूर्व सूचना के कार्रवाई की और याचिकाकर्ता को कोई कारण भी नहीं बताया। याचिका में कहा गया है कि इसलिए यह कार्रवाई मनमानी, अपारदर्शी और याचिकाकर्ता के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

(इनपुट एजेंसी)

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Amit Kumar

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डिजिटल पत्रकारिता की बदलती लहरों के बीच समाचारों की तह तक जाने की ललक अमित कुमार को इस क्षेत्र में खींच लाई। समकालीन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पैनी नजर रखने के साथ-साथ अमित को जटिल विषयों के गूढ़ विश्लेषण में गहरी रुचि है। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले अमित को मीडिया जगत में एक दशक का अनुभव है। वे पिछले 4 वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।


अमित न केवल समाचारों के त्वरित प्रकाशन में माहिर हैं, बल्कि वे खबरों के पीछे छिपे 'क्यों' और 'कैसे' को विस्तार से समझाने वाले एक्सप्लेनर लिखने में भी विशेष रुचि रखते हैं। डिजिटल पत्रकारिता के नए आयामों, जैसे कि कीवर्ड रिसर्च, ट्रेंड एनालिसिस और एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन को वे बखूबी समझते हैं। उनकी पत्रकारिता की नींव 'फैक्ट-चेकिंग' और सत्यापन पर टिकी है। एक मल्टीमीडिया पत्रकार के तौर पर अमित का सफर देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ रहा है। उन्होंने अमर उजाला, वन इंडिया, इंडिया टीवी और जी न्यूज जैसे बड़े मीडिया घरानों के साथ काम किया है।


अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।

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