दिल्ली दौरे से पहले सीएम विजय ने पीएम मोदी से लगाई एक गुहार, कांग्रेस सरकार के खिलाफ आवाज
दिल्ली दौरे से पहले तमिलनाडु के सीएम विजय ने अपनी ही सहयोगी कांग्रेस की कर्नाटक सरकार के खिलाफ पीएम मोदी से गुहार लगाई है। उन्होंने कहा है कि कर्नाटक सरकार के मेकेदुतु परियोजना पर विराम लगाना चाहिए और कावेरी पर जलाशयों का निर्माण रोक देना चाहिए।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय जल्द ही दिल्ली का दौरा कर सकते हैं और इस दौरान वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात कर सकते हैं। इससे पहले उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि मेकेदातु परियोजना के लिए कर्नाटक के डीपीआर को खारिज कर दिया जाए और उसे सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी जाए। उन्होंने कहा कि मेकेदातु परियोजना के लिए भूमि पूजा की घोषणा उच्चतम न्यायालय के फैसले और कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण के निर्णय का उल्लंघन है।
कर्नाटक की कांग्रेस सरकार के खिलाफ गुहार
तमिलनाडु के सीएम ने कहा कि कर्नाटक द्वारा नए जलाशय के निर्माण का प्रस्ताव निर्देशों का 'स्पष्ट उल्लंघन' है। सीएम विजय ने जल शक्ति मंत्रालय और केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के राज्य की याचिका पर विचार किए बिना मेकेदातु परियोजना के लिए कर्नाटक के प्रस्ताव को स्वीकार करने पर मंगलवार को हैरानी जताई। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखे एक पत्र में यह भी आग्रह किया कि वह संबंधित अधिकारियों को कर्नाटक द्वारा तैयार की गई विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को खारिज करने का निर्देश दें, क्योंकि यह कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण के आदेश और उच्चतम न्यायालय के फैसले के विपरीत है।
तमिलनाडु के किसानों की चिंता
उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को कर्नाटक सरकार को सलाह देनी चाहिए कि वह नदी क्षेत्र के अन्य राज्यों की सहमति के बिना कोई भी नई परियोजना शुरू न करे और उच्चतम न्यायालय के फैसले का उल्लंघन न करे। पत्र में विजय ने कहा कि कावेरी नदी पर मेकेदातु जलाशय के भूमि पूजन की घोषणा और कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार के बयानों ने तमिलनाडु के लाखों किसानों में गहरी चिंता पैदा कर दी है, जो अपनी आजीविका के लिए कावेरी नदी पर निर्भर हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा, ''आप भली-भांति अवगत होंगे कि कावेरी जल विवाद जैसे संवेदनशील मुद्दे का समाधान करीब तीन दशक लंबी कानूनी लड़ाई के बाद निकला था और 16 फरवरी 2018 का फैसला फिलहाल लागू किया जा रहा है।'
क्या है मेकेदातु प्रोजेक्ट विवाद
कावेरी नदी को दक्षिण भारत की जीवनरेखा कहा जाता है। कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच पानी के बंटवारे का मुद्दा बहुत पुराना है। कावेरी नदी कर्नाटक और तमिलनाडु में बहती है। यह कर्नाटक के कोडागु जले के वेस्टर्न घाट की ब्रह्मगिरी की पहाड़ियों से निकलती है और तमिलनाडु के बड़े हिस्से में बहते हुए पुडुचेरी से होकर गुजरात में बंगाल की खाड़ी में गिरती है। इसका 54 फीसदी हिस्सा तमिलनाडु में और 41 फीसदी कर्नाटक में है।
1892 और 1924 में इसको लेकर समझौता हुआ था। मैसूर रियासत और मद्रास प्रेसिडेंसी के बीच पानी के बंटवारे को लेकर दो समझौते हुए थे। तमिलनाडु का कहना है कि इन समझौतों के तहत कावेरी के जल पर उनका अधिकार है। वहीं कर्नाटक सरकार इन फैसलों को औपनिवेशिक काल का बताती हैं और कहती है कि अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए उनका पहला हक कावेरी के जल पर है। 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कावेरी नदी को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित कर दिया था। तमिलनाडु के लिए पानी का आवंटन थोड़ा कम कर दिया गया था और कर्नाटक का बढ़ा दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि सामान्य म़ॉनसून के दौरान पानी की कमी होती ही नहीं है। वहीं जब बारिश नहीं होती है तब कर्नाटक तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ने में असमर्थता जताता है। वहीं तमिलनाडु की भी प्रमुख फसलें कावेरी के जल पर निर्भर है।
मेकेदातु का अर्थ होता है बकरी की छलांग। तमिलनाडु के रामनगर जिले के कनकपुरा के पास एक जलाशय है। यहां कावेरी और अर्कावती नदी का संगम होता है। यहां कर्नाटक सरकार 9 हजार करोड़ की लागत से जलाशय बनाना चाहती है। इमें 67 टीएमसी पानी स्टोर किया जा स केगा। इसका उद्देश्य बेंगलुरु और आसपास के इलाके में पानी की व्यवस्था करना है। हालांकि तमिलनाडु इसका विरोध करता है। कर्नाटक का तर्क है कि मॉनसून के वक्त बहकर जाने वाले पानी को बांध में स्टोर किया जाएगा और संकट के समय में छोड़कर तमिलनाडु की भी मदद होगी। तमिलनाडु का कहना है कि इससे कावेरी के प्रवाह प र नियंत्रण किया जाएगा और कावेर के पानी पर कर्नाटक का ही अधिकार हो जाएगा।
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Ankit Ojhaविद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।
राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।
अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।
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