'PoK के लोग आज हमारे साथ आते, अगर...' CM उमर अब्दुल्ला ने क्यों कही ऐसी बात?

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उमर अब्दुल्ला ने कहा कि नियंत्रण रेखा (LoC) के पार की बदहाली को देखकर जम्मू-कश्मीर के लोगों को यह अहसास होता है कि 1947 में भारत के साथ रहने का हमारे पूर्वजों का फैसला बिल्कुल सही था।

Omar Abdullah Srinagar
जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने श्रीनगर में 80वें स्वतंत्रता दिवस पर परेड के दौरान।

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने स्वतंत्रता दिवस पर श्रीनगर के बख्शी स्टेडियम में आयोजित मुख्य समारोह को संबोधित करते हुए पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) में जारी राजनीतिक और आर्थिक उथल-पुथल पर बड़ा बयान दिया है।

उमर अब्दुल्ला ने कहा कि नियंत्रण रेखा (LoC) के पार की बदहाली को देखकर जम्मू-कश्मीर के लोगों को यह अहसास होता है कि 1947 में भारत के साथ रहने का हमारे पूर्वजों का फैसला बिल्कुल सही था।

'अगर 2019 का बदलाव न हुआ होता...'

बख्शी स्टेडियम में विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने PoJK की मौजूदा स्थिति पर चिंता व्यक्त की।

CM उमर अब्दुल्ला ने कहा, "जब हम LoC के उस पार की स्थिति देखते हैं, तो हमें दुख और अफसोस होता है। अगर 2019 में हमारे हालात न बदले गए होते (अनुच्छेद 370 न हटाया गया होता), तो आज उस पार के लोग हमारे साथ विलय करने की कोशिश कर रहे होते।"

उन्होंने याद दिलाया कि भारत और जम्मू-कश्मीर की विधानसभा में PoK के निवासियों को अपना माना गया है। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में 24 सीटें आज भी पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले क्षेत्रों (PoK) के लिए आरक्षित रखी गई हैं।

उन्होंने कहा कि भारतीय सेना के पहुंचने से पहले 1947 में पाकिस्तानी कबाइलियों का मुकाबला करने वाले जम्मू-कश्मीर के आम लोगों और पूर्व मुख्यमंत्री शेख मोहम्मद अब्दुल्ला के योगदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता।

उमर अब्दुल्ला ने क्या मांग की?

विशेष राज्य के दर्जे और राज्य के अधिकारों का मुद्दा उठाते हुए उमर अब्दुल्ला ने केंद्र-राज्य संबंधों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर अपनी छीनी गई संवैधानिक गारंटियों (विशेष दर्जे और पूर्ण राज्य का दर्जा) की वापसी चाहता है।

सीएम ने कहा कि जब केंद्रीय एजेंसियां राज्यों के कामकाज में जरूरत से ज्यादा दखल देती हैं, तो संघीय ढांचे को नुकसान पहुंचता है और इसका नतीजा सड़कों पर असंतोष के रूप में देखने को मिलता है।

PoK में क्यों मची है खलबली?

गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों से पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) में महंगाई, बिजली संकट, आटे की किल्लत और पाकिस्तानी सेना के मानवाधिकार उल्लंघनों के खिलाफ अवामी एक्शन कमेटी के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर हिंसक प्रदर्शन और नागरिक अवज्ञा आंदोलन चल रहा है। इसी पृष्ठभूमि में उमर अब्दुल्ला का यह बयान रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Shubham Sharma

लेखक के बारे में

Shubham Sharma
शुभम शर्मा साल 2017 से पत्रकारिता और मीडिया जगत में काम कर रहे हैं। टीवी में इनपुट असाइनमेंट से शुरुआत करते हुए डिजिटल मीडिया की दुनिया में कदम रखा। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक का अनुभव। TV9 भारतवर्ष और मनीकंट्रोल हिंदी (Network 18) जैसे बड़े संस्थानों के बाद अब लाइव हिंदुस्तान में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर खबरों को आप तक पहुंचाने के काम कर रहे हैं। और पढ़ें
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