
सिद्धारमैया का बदला इरादा, अब तोड़ रहे वादा? शिवकुमार संग उस दिन क्या हुई थी डील
Karnataka Congress: कर्नाटक में मुख्यमंत्री परिवर्तन के मुद्दे पर सत्तारूढ़ कांग्रेस के भीतर जारी कथित सत्ता संघर्ष के बीच उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार का समर्थन करने वाले विधायकों का एक और समूह पार्टी आलाकमान से मिलने के लिए दिल्ली पहुंचा है।
Karnataka Congress: कर्नाटक कांग्रेस में सियासी उथल पुथल जारी है। एक ओर जहां उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का समर्थन कर रहा विधायकों का एक समूह दिल्ली में डेरा डाले है। वहीं, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का कहना है कि पार्टी आलाकमान फैसला करता है, तो वह सीएम बने रहेंगे। दरअसल, मौजूदा संघर्ष साल 2023 में हुए एक कथित सत्ता साझेदारी समझौते के चलते हो रहा है। इसमें कहा गया था कि 2.5 सालों के बाद नेतृत्व शिवकुमार को मिलेगा। हालांकि, इस कथित समझौते को लेकर कांग्रेस की ओर से आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है।
क्या हुई थी डील!
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, शिवकुमार खेमे के सूत्र बताते हैं कि सत्ता साझा करने का समझौता 18 मई 2023 को हुआ था। इसके लिए सिद्धारमैया, शिवकुमार, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल, रणदीप सुरजेवाला और सांसद डीके सुरेश के बीच लंबी बातचीत हुई थी। सुरेश कर्नाटक के डिप्टी सीएम के भाई हैं।
कथित तौर पर इस समझौते में कहा गया था कि सिद्धरमैया को ढाई साल (20 नवंबर तक) मुख्यमंत्री रहना था और इसके बाद यह जिम्मेदारी उपमुख्यमंत्री शिवकुमार को मिलनी थी। राज्य में कांग्रेस सरकार ने 20 नवंबर को अपने ढाई साल पूरे कर लिए। हालांकि, शिवकुमार ने तब कहा था कि उन्हें विधायकों के खरगे से मिलने के लिए दिल्ली जाने की जानकारी नहीं है।
रिपोर्ट के अनुसार, शिवकुमार ने शुरुआती ढाई सालों की मांग की थी, लेकिन वरिष्ठ होने का हवाला देकर सिद्धारमैया ने इनकार कर दिया था। इसके बाद समझौता हुआ था कि पद पर पहले सिद्धारमैया रहेंगे और बचा हुआ कार्यकाल शिवकुमार संभालेंगे। कथित तौर पर सुरेश ने इस समझौते को सार्वजनिक करने की मांग की थी। हालांकि, नेतृत्व ने इसे नहीं माना और चेताया कि ऐसा करने से सरकार पर असर पड़ेगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, उस समय बातचीत के दौरान मौजूद रहे एक बड़े नेता बैठक को याद करते हैं। वह बताते हैं कि एक मौके पर सिद्धारमैया सुरेश की तरह मुड़े और बोले, 'सुरेश, मैं सिद्धारमैया हूं। मैंने जो वादा किया है उसपर अडिग रहूंगा। ढाई साल पूरे होने के एक सप्ताह पहले मैं इस्तीफा दे दूंगा।'
एक और तनाव
पीटीआई भाषा ने पार्टी सूत्रों के हवाले से बताया कि सिद्धरमैया अपने मंत्रिमंडल में फेरबदल पर जोर दे रहे हैं, वहीं शिवकुमार चाहते हैं कि पार्टी पहले नेतृत्व परिवर्तन पर फैसला करे। एजेंसी ने कहा कि पार्टी के कई अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, अगर कांग्रेस आलाकमान मंत्रिमंडल में फेरबदल को मंजूरी दे देता है, तो यह संकेत होगा कि सिद्धरमैया पांच साल का अपना कार्यकाल पूरा करेंगे लेकिन इससे शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने की संभावनाएं कम हो जाएंगी।

लेखक के बारे में
Nisarg Dixitनिसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।
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