पंजाब में ‘अच्छे स्कूल’, यूपी से बंगाल तक ‘कॉकरोचों’ को क्या मिला? अब गुजरात का नंबर

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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CJP के ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान में महाराष्ट्र, राजस्थान, बंगाल, पंजाब और यूपी के सरकारी स्कूलों की अलग तस्वीर सामने आई। कहीं कॉकरोच और जर्जर इमारत मिली तो कहीं AI लैब और स्विमिंग पूल। अब दीपके ने गुजरात जाने का संकेत दिया है।

स्कूलों की पोल खोल रही CJP: यूपी से कर्नाटक तक क्या मिला, अब गुजरात की बारी?
स्कूलों की पोल खोल रही CJP: यूपी से कर्नाटक तक क्या मिला, अब गुजरात की बारी?

कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP का ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान अब एक और राज्य की तरफ बढ़ता दिख रहा है। महाराष्ट्र के एक गांव से शुरू हुई यह मुहिम अब कई राज्यों के सरकारी स्कूलों तक पहुंच चुकी है। कहीं टूटे शौचालय मिले, कहीं बच्चों के लिए ठीक से बैठने की व्यवस्था नहीं थी, कहीं छत गिरने का खतरा दिखा तो कहीं मिड-डे मील के राशन में कीड़े मिलने का मामला सामने आया। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि पंजाब पहुंची CJP टीम को कुछ ऐसे स्कूल भी मिले, जहां आधुनिक सुविधाओं की जमकर तारीफ की गई। अब CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने गुजरात को लेकर ऐसा संकेत दिया है, जिससे माना जा रहा है कि अगला पड़ाव गुजरात हो सकता है।

दीपके ने कहा कि जिन राज्यों को लेकर उनकी टीम पर सवाल उठाए गए, वहां वे जा चुके हैं। उन्होंने पंजाब, झारखंड और कर्नाटक का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें हैरानी है कि अब तक किसी ने गुजरात जाने के बारे में नहीं पूछा। उनके इस बयान के बाद गुजरात के सरकारी स्कूलों को लेकर CJP के अगले दौरे की चर्चा तेज हो गई है।

15 अगस्त को महाराष्ट्र से शुरू हुआ था अभियान

CJP ने ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान की शुरुआत 15 अगस्त 2026 को महाराष्ट्र के हिंगोली जिले के संतुक पिंपरी गांव से की थी। अभिजीत दीपके खुद गांव के जिला परिषद स्कूल पहुंचे थे।

CJP के मुताबिक, स्कूल में शौचालय में पानी की व्यवस्था नहीं थी, खिड़कियां टूटी थीं और बच्चों के बैठने के लिए पर्याप्त बेंच नहीं थीं। बाद में स्कूल में मरम्मत का काम शुरू हुआ और कुछ दिनों के भीतर वहां पहली बार कंप्यूटर भी पहुंचा।

इसके बाद महाराष्ट्र के लातूर जिले के औसा में एक सरकारी स्कूल का दौरा भी विवादों में रहा। दीपके ने वहां कथित तौर पर ऐसे छात्रों के मौजूद होने का सवाल उठाया जो स्कूल के रिकॉर्ड में दर्ज नहीं थे और परिसर में शराब की बोतलें मिलने का दावा किया। इस दौरे को लेकर बाद में उनके खिलाफ पुलिस केस भी दर्ज हुआ। पुलिस की कार्रवाई का आधार स्कूल में कथित अनधिकृत प्रवेश और अन्य आरोप थे।

राजस्थान में स्कूल की हालत ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा

CJP के सबसे चर्चित स्कूल दौरों में राजस्थान का जयपुर स्थित रामपुरा-कनवारपुरा सरकारी प्राथमिक स्कूल शामिल रहा। स्कूल की पुरानी इमारत को असुरक्षित घोषित किया जा चुका था। रिपोर्टों के मुताबिक, वहां पढ़ने वाले करीब 18 बच्चों को वैकल्पिक जगह पर पढ़ाया जा रहा था और आसपास पशु भी रखे जाते थे। 21 अगस्त को CJP की टीम, जिसमें आशुतोष रांका भी शामिल थे, स्कूल का निरीक्षण करने पहुंची। वहां टीम और स्थानीय लोगों के बीच विवाद भी हुआ।

इस मामले में बाद में बड़ा प्रशासनिक कदम सामने आया। स्कूल की जर्जर इमारत को गिरा दिया गया और नई इमारत के लिए 18 लाख रुपये की व्यवस्था की गई- 12 लाख रुपये सरकार की तरफ से और 6 लाख रुपये स्थानीय विधायक निधि से। 2 सितंबर को पुरानी इमारत को गिराए जाने की भी पुष्टि हुई। यानी CJP के अभियान में राजस्थान वाला स्कूल ऐसा मामला बना, जहां स्कूल की हालत सामने आने के बाद वास्तविक प्रशासनिक कार्रवाई भी हुई।

हरियाणा के स्कूल में राशन में मिले कीड़े, शिक्षक पर कार्रवाई

हरियाणा के भिवानी जिले के सांगवान गांव का सरकारी प्राथमिक स्कूल भी CJP के अभियान के निशाने पर आया। 18 अगस्त को CJP की टीम ने स्कूल का दौरा किया। टीम ने वीडियो जारी कर दावा किया कि मिड-डे मील के लिए रखे गेहूं में कीड़े थे, मूंगफली में चींटियां थीं। इसके अलावा स्कूल की दीवारों में दरारें और खराब हालत वाले शौचालय भी दिखाए गए।

इसके बाद शिक्षा विभाग ने स्कूल की प्रभारी शिक्षिका को निलंबित कर दिया और दो रसोइयों को हटा दिया। मिड-डे मील प्रभारी को कारण बताओ नोटिस भी दिया गया। यही नहीं, हरियाणा में CJP के स्कूल निरीक्षणों के बाद सरकार ने सरकारी स्कूल परिसरों में बाहरी लोगों के प्रवेश को लेकर भी सख्ती की। सरकार का कहना था कि बच्चों की सुरक्षा और पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए। सितंबर में हरियाणा सरकार ने राज्य के सरकारी स्कूलों की 2,814 असुरक्षित इमारतों/ढांचों को गिराने का आदेश भी दिया। CJP ने इस मुद्दे को अपने अभियान की बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश किया।

पश्चिम बंगाल में स्कूल की तस्वीर दिखाने के बाद हिंसा का आरोप

पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले में भी ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान चर्चा में आया। इंदास थाना क्षेत्र के करिशुंडा गांव में CJP समर्थक अब्दुल हाफिज ने अपने पुराने स्कूल की स्थिति की तस्वीरें और वीडियो बनाए थे।

इसके बाद उनके और उनके पिता पर हमला किए जाने का आरोप लगा। हाफिज के पिता की बाद में मौत हो गई। CJP ने इस मामले में बीजेपी कार्यकर्ताओं पर आरोप लगाया, जबकि घटना के राजनीतिक पहलू की जांच की बात पुलिस ने कही। पुलिस ने कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेने की भी जानकारी दी थी। इस घटना के बाद अभिजीत दीपके ने पश्चिम बंगाल जाने और परिवार को न्याय दिलाने के लिए कदम उठाने की बात कही थी।

कर्नाटक में आशुतोष रांका की टीम को मिली अलग तस्वीर

सितंबर में CJP ने कर्नाटक के बेंगलुरु में भी सरकारी स्कूलों का दौरा किया। इस बार अभियान की अगुवाई CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने की। रांका की टीम ने बेंगलुरु के चार सरकारी स्कूलों का दौरा किया। इनमें वर्थुर का सरकारी उर्दू स्कूल भी शामिल था। CJP ने दावा किया कि वहां करीब 70 फीसदी कक्षाएं छत की खराब हालत के कारण इस्तेमाल नहीं हो रही थीं। छह शिक्षकों में से केवल तीन स्थायी शिक्षक होने की बात भी सामने आई।

कैकोंड्रहल्ली के एक स्कूल में आठ में से सात शिक्षक SIR की ड्यूटी पर लगाए जाने की बात CJP ने कही। यशवंतपुरा और जेपी नगर के स्कूलों में भी बड़ी संख्या में शिक्षकों की ड्यूटी दूसरी जिम्मेदारियों में लगाए जाने का मुद्दा उठाया गया। वर्थुर स्कूल के मामले में एक दिलचस्प घटनाक्रम भी हुआ। रांका ने शिक्षा मंत्री मधु बंगारप्पा से मुलाकात की और स्कूलों में मिली कमियों पर चर्चा की। इसके बाद CJP ने दावा किया कि वर्थुर स्कूल की छत की मरम्मत का काम शुरू हो गया।

रांका ने यह भी दावा किया कि उनकी टीम ने पिछले एक महीने में कर्नाटक के 200 से ज्यादा स्कूलों का ऑडिट किया है।

पंजाब में कहानी कुछ अलग निकली

अब आते हैं उस राज्य पर, जिसने इस पूरी मुहिम को राजनीतिक बहस के बीच ला दिया- पंजाब। CJP के प्रवक्ता सौरव दास की अगुवाई में टीम ने लुधियाना के तीन सरकारी स्कूलों का दौरा किया। इनमें एक School of Eminence, एक सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल और एक सरकारी प्राइमरी स्कूल शामिल था।

यहां CJP को हर जगह बदहाल स्कूल नहीं मिले।

स्कूल ऑफ एमिनेंस में टीम ने स्विमिंग पूल, बैडमिंटन कोर्ट, दिव्यांगों के लिए रैंप, AI लैब और कंप्यूटर लैब जैसी सुविधाएं देखीं। सौरव दास ने स्कूल के इंफ्रास्ट्रक्चर की तारीफ की और कहा कि कई सुविधाएं निजी स्कूलों से भी बेहतर नजर आईं।

हालांकि, CJP ने इस स्कूल में भी कुछ कमियां गिनाईं और उन्हें शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस के सामने रखने की बात कही। दूसरी तरफ, लुधियाना के सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, जंडियाली में तस्वीर अलग थी। 1936 में स्थापित इस स्कूल का बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर काफी पुराना बताया गया। सौरव दास ने कहा कि स्कूल में रखरखाव के बावजूद बच्चों को बेहतर सुविधाओं की जरूरत है।

पंजाब के दौरे के बाद AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल ने CJP की ओर से उठाए गए मुद्दों की तारीफ की और समस्याओं को दूर करने की बात कही। यहीं से CJP पर सवाल भी उठे। राजस्थान और दूसरे बीजेपी शासित राज्यों में खराब स्कूलों की तस्वीरें दिखाने वाली टीम ने पंजाब में एक अच्छे स्कूल की तारीफ क्यों की? कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने इसी को लेकर CJP से कहा कि पंजाब में भी वही सख्ती और उसी नजरिए से स्कूलों का ऑडिट किया जाना चाहिए।

झारखंड भी पहुंची टीम

CJP ने झारखंड में भी स्कूलों के सोशल ऑडिट की जानकारी दी है। अभिजीत दीपके ने खुद बाद में पंजाब, झारखंड और कर्नाटक का जिक्र करते हुए कहा कि जिन राज्यों को लेकर उनसे सवाल पूछे गए, वहां उनकी टीम पहुंची है। झारखंड में CJP की मौजूदगी को लेकर रांची से पाकुड़ तक कार्यक्रमों की जानकारी सामने आई है। हालांकि, अलग-अलग स्कूलों की विस्तृत सूची और हर स्कूल में मिली कमियों का उतना विस्तृत स्वतंत्र रिकॉर्ड अभी उपलब्ध नहीं है जितना महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा या कर्नाटक के मामलों में है।

यूपी में पहुंचते ही नया विवाद

15 सितंबर को CJP ने ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान को उत्तर प्रदेश के नोएडा तक पहुंचाया। यहां सौरव दास की टीम ने गौतमबुद्ध नगर के गरही चौखंडी स्थित एक सरकारी प्राथमिक स्कूल का निरीक्षण किया।

CJP के मुताबिक, स्कूल में गंदे शौचालय, टूटे गेट, पुरानी इमारत और खराब हालत का एक पुराना कमरा मिला। टीम ने यह भी कहा कि करीब 300 बच्चों में से कुछ बच्चे उचित कक्षाओं की कमी के कारण बरामदे में पढ़ रहे थे।

इसके बाद आसपास के चार और स्कूलों में टीम को प्रवेश नहीं मिला। सौरव दास ने दावा किया कि स्कूलों के गेट जानबूझकर बंद रखे गए और अधिकारियों ने शिक्षकों को CJP की टीम को अंदर नहीं आने देने को कहा था।

लेकिन यहां प्रशासन का पक्ष अलग है। गौतमबुद्ध नगर के बेसिक शिक्षा अधिकारी राहुल पंवार ने कहा कि जिले के सभी स्कूल सामान्य रूप से चल रहे हैं और स्कूल बंद करने का कोई आदेश नहीं दिया गया था। उनके मुताबिक, बड़ी भीड़ के कारण बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षा प्रभावित होने की आशंका थी, इसलिए CJP टीम को प्रवेश नहीं दिया गया। यानी यूपी में CJP के दावे और प्रशासन के जवाब के बीच साफ टकराव दिखाई दिया है।

तो अब गुजरात क्यों चर्चा में है?

यही सवाल इस समय सबसे ज्यादा चर्चा में है। CJP की मुहिम को लेकर यह सवाल लगातार उठता रहा है कि क्या टीम केवल बीजेपी शासित राज्यों के स्कूलों को निशाना बना रही है। इसके जवाब में CJP ने पंजाब, कर्नाटक और झारखंड जैसे विपक्षी दलों की सरकार वाले राज्यों में भी स्कूलों का दौरा किया।

अब अभिजीत दीपके ने गुजरात का नाम खुद लिया है। उनका कहना है कि पंजाब, झारखंड और कर्नाटक जाने के बाद उन्हें हैरानी है कि अभी तक कोई उनसे गुजरात जाने के लिए नहीं कह रहा। यह बयान सीधे तौर पर गुजरात में स्कूल ऑडिट की घोषणा नहीं है, लेकिन इससे साफ संकेत मिलता है कि CJP अब वहां भी अपनी टीम भेज सकती है।

कौन-कौन से CJP नेता मैदान में दिखे?

‘स्कूल ठीक करो’ अभियान में अब तक तीन नाम सबसे ज्यादा सामने आए हैं।

अभिजीत दीपके - CJP के संस्थापक। महाराष्ट्र के हिंगोली में अभियान की शुरुआत की और महाराष्ट्र के दूसरे स्कूलों का भी दौरा किया।

आशुतोष रांका - CJP के सह-संयोजक। राजस्थान के रामपुरा-कनवारपुरा स्कूल के दौरे में टीम के साथ रहे और बाद में बेंगलुरु में चार सरकारी स्कूलों के निरीक्षण का नेतृत्व किया।

सौरव दास - CJP के प्रमुख प्रवक्ताओं में से एक। पंजाब के लुधियाना के तीन स्कूलों के दौरे में टीम का नेतृत्व किया और अब उत्तर प्रदेश के नोएडा में अभियान लेकर पहुंचे हैं।

इनके अलावा अलग-अलग राज्यों में CJP के स्थानीय सदस्य और स्वयंसेवक भी स्कूलों का सोशल ऑडिट करते रहे हैं।

अब तक की तस्वीर क्या कहती है?

15 अगस्त से शुरू हुए इस अभियान में सामने आई तस्वीर एक जैसी नहीं है। कहीं स्कूलों में टूटे शौचालय और खिड़कियां मिलीं, कहीं बच्चों के बैठने के लिए बेंच की कमी थी। हरियाणा में मिड-डे मील के राशन में कीड़े और खराब इंफ्रास्ट्रक्चर का मामला उठा। राजस्थान में असुरक्षित स्कूल भवन का मुद्दा सामने आया और बाद में नई इमारत के लिए 18 लाख रुपये की व्यवस्था हुई। कर्नाटक में शिक्षकों की कमी और गिरती छतों का मामला उठा। वहीं पंजाब के School of Eminence में स्विमिंग पूल, AI लैब और कंप्यूटर लैब जैसी सुविधाएं भी मिलीं। अब देखना यह है कि अभिजीत दीपके का अगला पड़ाव गुजरात बनता है या नहीं।

Amit Kumar

लेखक के बारे में

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डिजिटल पत्रकारिता की बदलती लहरों के बीच समाचारों की तह तक जाने की ललक अमित कुमार को इस क्षेत्र में खींच लाई। समकालीन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पैनी नजर रखने के साथ-साथ अमित को जटिल विषयों के गूढ़ विश्लेषण में गहरी रुचि है। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले अमित को मीडिया जगत में एक दशक का अनुभव है। वे पिछले 4 वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।


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अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।

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