Gen Z की भावनाओं से खेलने नहीं देंगे, अब किस बात पर भड़के कॉकरोच; सरकार को बड़ी चेतावनी
कॉकरोच जनता पार्टी ने एक बार फिर सरकार को चेतावनी दे डाली है। सीजेपी की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर की लिस्ट मांग रही है। लेकिन केंद्र सरकार यह लिस्ट शीर्ष अदालत में पेश करने में आनाकानी कर रही है।

कॉकरोच जनता पार्टी ने एक बार फिर सरकार को चेतावनी दे डाली है। सीजेपी की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर की लिस्ट मांग रही है। ताकि उन्हें एक साथ रद्द किया जा सके। लेकिन केंद्र सरकार यह लिस्ट शीर्ष अदालत में पेश करने में आनाकानी कर रही है। कॉकरोच पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने इसको लेकर एक्स पर बयान जारी किया है। इसमें कहा गया है कि हम सरकार को भारत के छात्रों, जेनेरेशन-जी और युवा नागरिकों के भरोसे के साथ खिलवाड़ की अनुमति नहीं देंगे। अगर सरकार तुरंत ही 25 जुलाई की प्रतिबद्धताओं को सम्मान देने के लिए ठोस कदम नहीं दिखाती है, तो कॉकरोच जनता पार्टी अगले दो दिनों में अपनी राष्ट्रीय कार्य समिति बुलाई जाएगी ताकि पूरे देश में आगे की कार्रवाई का फैसला किया जा सके। बयान में आगे कहा गया है कि सीजेपी का अगला कदम पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि भारत सरकार अभी क्या करने का चुनाव करती है।
वादा पूरा नहीं कर रही सरकार
सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहाकि सुप्रीम कोर्ट ने दिन की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार से एफआईआर की एक संयुक्त सूची तीन बार मांगी। लेकिन केंद्र के अधिवक्ता ने जानकारी देने का कोई वादा नहीं किया और इस कदम का विरोध किया। सौरव दास ने इस घटनाक्रम को उन वादों से जोड़ा जो सरकार ने 25 जुलाई को किए थे, जब सीजेपी ने अपना देशव्यापी आंदोलन वापस ले लिया था। उनके अनुसार इन वादों में प्राथमिकी वापस लेना, प्रदर्शनकारियों को दंडात्मक कार्रवाई से बचाना और प्रभावित परिवारों को मुआवजा देना शामिल था। उन्होंने कहाकि शीर्ष अदालत की ओर से संयुक्त सूची की मांग किए जाने से केंद्र और भाजपा/राजग शासित राज्यों द्वारा किए गए वादों को लागू करने में मदद मिल सकती है।
सरकार के इरादों पर सवाल
सौरव दास ने यह भी दावा किया कि अदालत ने एक विकल्प भी सुझाया, जिसके तहत गंभीर आपराधिक अपराधों का इतिहास रखने वाले लोगों से जुड़ी प्राथमिकी की अलग से पहचान की जा सकती है, ताकि ऐसे मामलों पर उनके अलग-अलग आधारों पर विचार किया जा सके। उन्होंने सरकार के इरादों पर सवाल उठाते हुए कहा कि युवाओं को यह जानने का अधिकार है कि क्या 25 जुलाई के वादों को लागू किया जाएगा या वे केवल देशव्यापी आंदोलन को खत्म करने के लिए किये गये थे। सीजेपी नेता ने कहाकि संगठन ने संयम बरता है, सरकार के साथ अच्छे इरादों से बातचीत की है और वादों को पूरा करने के लिए पर्याप्त समय दिया है।
अगर ठोस कदम नहीं उठाया तो
उन्होंने चेतावनी दी कि पार्टी का धैर्य खत्म हो रहा है और कहाकि अगर सरकार 25 जुलाई के वादों को पूरा करने की दिशा में तत्काल और ठोस कदम नहीं उठाती है, तो सीजेपी अगले दो दिनों के भीतर अपनी राष्ट्रीय कार्य समिति की बैठक बुलायेगी। उन्होंने कहा कि समिति पार्टी की अगली देशव्यापी कार्रवाई के बारे में फैसला करेगी। कॉकरोच पार्टी के प्रवक्ता ने कहाकि आगे की कार्रवाई का स्वरूप सरकार की ओर से उठाए गए कदमों पर निर्भर करेगा। उन्होंने दोहराया कि आंदोलन को रोकने का पार्टी का फैसला इस उम्मीद पर आधारित था कि देश के सामने किये गये वादों को पूरा किया जाएगा।
20 जुलाई की है घटना
सीजेपी ने 20 जुलाई को संसद मार्च आयोजित किया गया था। यह मार्च जंतर-मंतर पर कई सप्ताह तक चले प्रदर्शन और भूख हड़ताल के बाद आयोजित किया गया था। इसमें हजारों छात्रों ने हिस्सा लिया और संसद की ओर मार्च करने का प्रयास किया। प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रश्नपत्र लीक होने के मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग कर रहे थे। संसद की ओर बढ़ते हुए प्रदर्शनकारियों के एक हिस्से ने मध्य दिल्ली में पुलिस बैरिकेड तोड़ने का प्रयास किया, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया।
सोशल मीडिया पर साझा किये गये कई वीडियो में कथित तौर पर पुलिसकर्मियों द्वारा प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट किये जाने के दृश्य सामने आये, हालांकि दिल्ली पुलिस ने अपनी कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि भीड़ के एक हिस्से के हिंसक होने और कथित तौर पर पथराव करने के बाद ही बल प्रयोग किया गया था।


