विपक्ष में 'ऑल इज वेल' कराएंगे उद्धव ठाकरे? CJP के प्रदर्शन पर AAP और कांग्रेस को दी एक नसीहत

पीटीआई, नई दिल्ली
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उद्धव ठाकरे ने कहा कि अगर सरकार पाकिस्तान पर आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाने के बावजूद उससे बातचीत के रास्ते खुले रख सकती है, तो उसे प्रदर्शन कर रहे छात्रों से बातचीत करने में कोई हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए।

Uddhav Thackeray
उद्धव ठाकरे

शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने बुधवार (22 जुलाई) को इंडिया गठबंधन में बड़ी सुलह की कोशिश की है और कहा है कि जिस तरह सरकार को प्रदर्शनकारी छात्रों से संवाद करना चाहिए, उसी तरह विपक्षी दलों को भी इस मुद्दे पर आपस में बातचीत करनी चाहिए। उनकी यह टिप्पणी आम आदमी पार्टी (AAP) के उस आरोप के जवाब में आई है, जिसमें कहा गया था कि कांग्रेस पार्टी भाजपा की 'बी-टीम' है और उसने 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के आंदोलन को दबाने के लिए मंगलवार को प्रधानमंत्री आवास के सामने विरोध प्रदर्शन किया था। इससे छात्रों के चल रहे विरोध प्रदर्शन को लेकर विपक्ष के भीतर मतभेद उभरकर सामने आ गए थे।

ठाकरे ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ''हमें युवाओं के साथ खड़ा होना चाहिए। मैं युवाओं के साथ हूं, इसीलिए मैं अभिजीत (दीपके) से मिला। जिस तरह सरकार को युवाओं से संवाद करना चाहिए, उसी तरह विपक्ष को भी आपस में बातचीत करनी चाहिए।'' ठाकरे मंगलवार शाम दिल्ली पहुंचकर CJP संस्थापक से मिलने जंतर-मंतर गए थे। ठाकरे के संवाददाता सम्मेलन के कुछ घंटों बाद आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने शिवसेना (UBT) के राज्यसभा सांसद संजय राउत के आवास पर ठाकरे से मुलाकात की।

शुरू से ही छात्रों के आंदोलन का समर्थन

ठाकरे ने कहा कि उन्होंने शुरू से ही छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया है और केंद्र पर आरोप लगाया कि एक महीने से अधिक समय से विरोध प्रदर्शन जारी रहने के बावजूद सरकार ने उनसे बातचीत करने से इनकार कर दिया है। ठाकरे ने कहा, ''मैंने पहले दिन से ही इस विरोध-प्रदर्शन का समर्थन किया है। युवा देश का भविष्य हैं। अगर आप उन्हें दबाने की कोशिश करेंगे, तो वे इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। जब आप उन्हें कॉकरोच कहते हैं, तो यह बर्दाश्त की सारी हदें पार कर जाता है। अगर देश में तानाशाही थोपी गई, तो युवा चुप नहीं बैठेंगे।''

बातचीत लोकतंत्र की बुनियाद

आंदोलन से निपटने के सरकार के तरीके पर सवाल उठाते हुए महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि बातचीत लोकतंत्र की बुनियाद है। उन्होंने कहा, ''युवाओं से बातचीत करने में क्या खराबी है? वे एक महीने से अधिक समय से विरोध कर रहे हैं। अगर सरकार ने उनसे बात की होती, तो यह मामला सुलझ गया होता।'' सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत के पुराने घटनाक्रम का जिक्र करते हुए ठाकरे ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी लेह में भूख हड़ताल के दौरान सोनम वांगचुक के पिता से खुद मिली थीं, जबकि UPA सरकार ने अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार-विरोधी आंदोलन के समय बातचीत के लिए तत्कालीन केंद्रीय मंत्री विलासराव देशमुख को भेजा था।

अगर पाकिस्तान के लिए रास्ते खुले तो…

ठाकरे ने कहा कि अगर सरकार पाकिस्तान पर आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाने के बावजूद उससे बातचीत के रास्ते खुले रख सकती है, तो उसे प्रदर्शन कर रहे छात्रों से बातचीत करने में कोई हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए। उन्होंने मई में दिए गए एक साक्षात्कार में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले के उस बयान का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत और पाकिस्तान के नागरिक समाजों के बीच बातचीत की गुंजाइश हमेशा बनी रहनी चाहिए।

पुलिस कार्रवाई की निंदा

ठाकरे ने सोमवार को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई की निंदा करते हुए आरोप लगाया कि महिलाओं और यहां तक कि कम उम्र की लड़कियों के साथ भी मारपीट की गई। उन्होंने कहा, ''मैंने कम उम्र की लड़कियों (मुश्किल से नौ या 10 साल की) और कई महिलाओं को देखा... उनके साथ जैसा बर्ताव किया गया, मुझे नहीं लगता कि हिंदू संस्कृति महिलाओं के प्रति ऐसे व्यवहार की इजाजत देती है। एक लड़की के कपड़े फाड़ दिए गए। क्या यह हिंदू संस्कृति है? यह तो रावण संस्कृति है।''

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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