कॉकरोच शांत, लेकिन जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों का जोश हाई, प्रोटेस्ट का आंखों देखा हाल

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इस कतार में खड़े लोग प्रदर्शन स्थल के भीतर से आ रही नारेबाजी के सुर में अपने सुर मिला रहे हैं। मेटल डिटेक्टर गेट से गुजर कर जब प्रदर्शन स्थल पर पहुंचेंगे, तो सड़क के ठीक सामने आपको कॉकरोच जनता पार्ट का स्टेज दिखेगा, जो अब पहले जितना जीवंत नहीं दिखता।

कॉकरोच जनता पार्टी के 20 जुलाई के 'चलो संसद मार्च' के अगले दिन भी जंतर-मंतर पहुंचने वालों की तदाद लगातार बढ़ती रही। जनपथ मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 2 से जंतर-मंतर जाने वाले रास्ते से लगातार लोग प्रदर्शन स्थल पर पहुंच रहे थे। इसी रास्ते पर जब थोड़ा आगे चलेंगे तो आपको दूर से नारों की गूंज सुनाई पड़ेगी। थोड़ा और आगे बढ़ने पर आपको एक लंबी लाइन दिखेगी, जो प्रदर्शन स्थल में एंट्री के लिए लगी है।

इस कतार में खड़े लोग प्रदर्शन स्थल के भीतर से आ रही नारेबाजी के सुर में अपने सुर मिला रहे हैं। मेटल डिटेक्टर गेट से गुजर कर जब प्रदर्शन स्थल पर पहुंचेंगे, तो सड़क के ठीक सामने आपको कॉकरोच जनता पार्ट का स्टेज दिखेगा, जो अब पहले जितना जीवंत नहीं दिखता। क्योंकि 20 जुलाई की शाम को पुलिस ने इस स्टेज को तोड़ दिया था, लेकिन वालंटियर ने इसे फिर से खड़ा कर दिया।

पहले जैसा जीवंत नहीं CJP का मंच

सीजेपी के मंच से पहले जिस तरह लगातार नारेबाजी या हौसला अफजाई हो रही थी, वो अब कहीं गायब नजर आती है। कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके मंच पर नजर तो आते हैं, लेकिन थोड़े शांत। लेकिन नीचे खड़े युवा प्रदर्शनकारी अभिजीत दिपके को देख कर जोर-जोर से नारे लगाते हैं और उनके लिए अपनी जान तक देने की बात कहते हैं। इस पर दीपके उन्हें हाथ दिखा कर शांत करते हैं।

जंतर-मंतर पर CJP का स्टेज

इसके कुछ देर बाद अभिजीत दीपके खुद भी मंच से उतर कर प्रदर्शन कर रहे लोगों से मिलते हैं। उन्हें कोई संविधान की किताब, कोई फूल, कोई खाना देता है, लेकिन वह नहीं लेते।

घायलों का अलग मंच

इस मंच के ठीक नीचे एक और छोटा सा स्टेज बनाया गया है। यहां पर 20 जुलाई को पुलिस एक्शन में घायल हुए प्रदर्शनकारियों को बैठाया गया है और मीडिया वाले लगातार इनसे बात कर रहे हैं। किसी के सिर पर पट्टी और हाथ पर पट्टी बंधी है। एक छात्रा अपनी फटी हुई शर्ट दिखा रही है, जिसका कहना है कि पुलिस ने उसकी ये शर्ट संसद मार्च के दौरान फाड़ दी और उसके पैर में चोट भी लगी है।

जंतर-मंतर पर अपने हाथ की चोट दिखाती छात्रा

इसी मंच पर असम से आए एक छात्र अब्दुल रहमान हैं, जो बताते हैं बैरिकेड में करंट छोड़ा हुआ था और मुझे भी करंट लगा था। बिना नेम प्लेट के पुलिस की वर्दी में कुछ लोग आए और लाठी बजाने लगे। मेरी कमर पर चोट आई है।

उनके बराबर में पंजाब से आए जॉनी बैठे हैं। सिर पर पट्टी बंधी है और कहते हैं कि पुलिस वालों ने मेरे सिर पर लाठी मारी। जॉनी के हाथ में भी चोट लगी है। उनका आरोप है कि हमारे साथ की 6 लड़कियां अब भी लापता हैं।

इन सब के आगे एक और शख्स बुरी तरह घायल होकर बैठे थे। जब उनसे हमने बात करनी चाही, तो उन्होंने कहा कि वे बोलने की हालत में नहीं हैं। लेकिन उनके हाथ पैर घुटनों पर गंभीर चोट हैं। पेट और पीठ पर भी चोट के निशान हैं।

स्टेज शांत लेकिन प्रदर्शनकारियों का जोश हाई

मंच और उसके एरिया से बाहर निकलेंगे तो वहां माहौल एकदम अलग है। अलग-अलग गुट में छात्र नारेबाजी और प्रदर्शन कर रहे हैं। कहीं AISA, कहीं SFI, कहीं KYS, तो कहीं बिना किसी बैनर के अलग-अलग युवा-युवा लगातार गाने गाकर कर या नारे लगा कर इस पूरे प्रदर्शन को अब जिंदा रखे हुए हैं।

जाहिर है यह प्रदर्शन युवाओं और Gen-z का है, तो हर कोई अपने नए-नए तरीकों से प्रोटेस्ट कर रहा है। कहीं आपको इंस्टाग्राम के मीम के जरिये सरकार पर तंज कसते हुए बैनर पोस्टर दिखेंगे, तो कहीं आपको भगत सिंह और आंबेडकर से जुड़े पोस्टर बैनर हाथ में लिए युवा दिखेंगे।

20 जुलाई से पहले यहां शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग गूंज रही थी, लेकिन संसद मार्च में पुलिसिया एक्शन के बाद अब युवाओं का गुस्सा केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ भी फूट पड़ा है।

क्या कमजोर हो रही CJP की लीडरशिप?

पूरे प्रदर्शन स्थल और CJP के मंच के माहौल में जमीन-आसमान का फर्क नजर आता है। भले ही मंच से लगातार कोई नारेबाजी या जोशीले नारे न लगाए जा रहे हों और लेकिन प्रदर्शन स्थल पर पहुंच रहे युवाओं के अंदर का अक्रोश ही अब भी इस प्रदर्शन को जिंदा रखे हुए है।

हालांकि, सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या कॉकरोच जनता पार्टी की लीडरशिप कहीं कमजोरी पड़ रही है या वे कोई रणनीति तय नहीं कर पा रहे हैं? क्योंकि भीड़ लगातार बढ़ रही है और वहां पहुंच रहे लोगों के भीतर 20 जुलाई की घटना का अक्रोश है और इस भीड़ को एक सही नेतृत्व देना इस प्रदर्शन के लिए काफी जरूरी है।

Shubham Sharma

लेखक के बारे में

Shubham Sharma
शुभम शर्मा साल 2017 से पत्रकारिता और मीडिया जगत में काम कर रहे हैं। टीवी में इनपुट असाइनमेंट से शुरुआत करते हुए डिजिटल मीडिया की दुनिया में कदम रखा। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक का अनुभव। TV9 भारतवर्ष और मनीकंट्रोल हिंदी (Network 18) जैसे बड़े संस्थानों के बाद अब लाइव हिंदुस्तान में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर खबरों को आप तक पहुंचाने के काम कर रहे हैं। और पढ़ें
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