वांगचुक पर संजय राउत का बड़ा सवाल- जिन्होंने लाठियां भांजी, उनके हाथों अनशन खत्म किया
शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने सोनम वांगचुक के 26 दिन का अनशन तोड़ने पर सवाल उठाए हैं। राउत ने पूछा कि जिस सरकार ने युवाओं पर लाठियां चलाईं, वांगचुक ने उसी के मंत्रियों के हाथों जूस क्यों पिया?
नीट परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ पिछले 26 दिनों से अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक ने गुरुवार देर रात सरकार से बातचीत के बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया। उन्होंने केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह के हाथों एक कप से कुछ पीकर अनशन तोड़ा। हालांकि, उनके इस कदम से शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत हैरान और नाराज नजर आए।
संजय राउत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या कहा?
मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए संजय राउत ने वांगचुक के योगदान की सराहना की, लेकिन उनके अनशन तोड़ने के तरीके पर गहरी आपत्ति जताई। राउत ने कहा, "26 दिन तक अनशन करना कोई आसान काम नहीं है। देश के लिए वांगचुक का स्वास्थ्य और जीवन बेहद अहम है क्योंकि शिक्षा और समाज सेवा में उनका बड़ा योगदान है। लेकिन, जिन सरकारी प्रतिनिधियों (दो मंत्रियों) के हाथों उन्होंने अनशन तोड़ा, वह चिंता का विषय है।"
बर्बर पुलिसिया कार्रवाई की दिलाई याद
सरकार पर हमलावर होते हुए राउत ने कहा कि यह वही सरकार है जिसने वांगचुक के समर्थन में जुटे युवाओं और छोटे बच्चों के आंदोलन को बर्बरता से कुचला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर लाठियां बरसाईं, पैलेट गन का इस्तेमाल किया, हड्डियां तोड़ीं और लोगों के सिर फोड़े।
राउत ने सीधे तौर पर पूछा कि इस आंदोलन की मुख्य मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इस्तीफा थी। उन्होंने सवाल किया, "क्या वांगचुक अब इन मंत्रियों के हाथों अनशन तोड़ने के बाद ये मांगें कर पाएंगे? वांगचुक जी ऐसे दो मंत्रियों के हाथों से अपना अनशन कैसे तोड़ सकते हैं, विपक्ष के साथ तोड़ते। किसी एक का आंदोलन नहीं है यह।"
राउत ने वांगचुक के जीवन और उनके सामाजिक व शैक्षिक योगदान को देश के लिए महत्वपूर्ण बताया। हालांकि, उन्होंने इस बात पर गहरी चिंता और आश्चर्य जताया कि जिस सरकार ने आंदोलनकारियों के साथ 'दुश्मन' जैसा व्यवहार किया, उसी के दो मंत्रियों के हाथों से वांगचुक ने जूस पीकर अपना अनशन क्यों तोड़ा।
राउत ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर वांगचुक के समर्थन में आए बच्चों और युवाओं के आंदोलन को बर्बरता से कुचला गया। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों पर लाठियां और छर्रे वाली बंदूकें चलाई गईं, जिससे कई लोगों की हड्डियां टूटीं और खून बहा।
उन्होंने कहा कि पुलिस वांगचुक को बिना स्ट्रेचर के जबरन घसीटते हुए ले गई। राउत के अनुसार, यदि अनशन तोड़ना ही था, तो इसे उन हजारों समर्थक बच्चों के सामने उसी स्थान पर तोड़ा जाना चाहिए था, जहां से उन्हें उठाया गया था। राउत ने स्पष्ट किया कि यह किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि लाखों लोगों का आंदोलन बन चुका था। उन्होंने याद दिलाया कि इस आंदोलन को ताकत देने के लिए राहुल गांधी, उद्धव व आदित्य ठाकरे, अखिलेश यादव और डिंपल यादव समेत पूरे विपक्ष ने अपना समर्थन दिया था। उन्होंने कहा कि इस मोर्चे पर विपक्ष की मुख्य मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और प्रधानमंत्री का इस्तीफा थी। राउत ने सवाल उठाया कि इस तरह सरकार के साथ अनशन समाप्त करने के बाद क्या वांगचुक अब सरकार से ये कठोर मांगें कर पाएंगे।
क्यों हो रहा है यह आंदोलन?
देश भर में 'नीट' परीक्षा के पेपर लीक और रोजगार के मुद्दे पर 'कॉकक्रोच जनता पार्टी' (CJP) नामक समूह के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर भारी विरोध प्रदर्शन चल रहा है। हाल ही में जब छात्रों ने संसद की ओर मार्च निकालने की कोशिश की, तो पुलिस ने भारी बल प्रयोग करते हुए आंसू गैस और लाठियों का इस्तेमाल किया, जिसमें कई युवा घायल हुए थे।
वांगचुक के अनशन तोड़ने के बावजूद, CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया है कि जंतर-मंतर पर उनका आंदोलन तब तक खत्म नहीं होगा, जब तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपना इस्तीफा नहीं दे देते।
इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक वीडियो संदेश के जरिए पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने और सख्त कानून लाने की बात कही है। हालांकि, प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि यह केवल ध्यान भटकाने की कोशिश है और वे जवाबदेही से कम पर समझौता नहीं करेंगे।


