'प्रोटेस्ट करना हक है', NEET टॉपर्स आर्यन और पांशुल ने किया सपोर्ट; 3 सुझाव दिए

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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सीजेपी प्रोटेस्ट के बीच नीट-यूजी टॉपर्स आर्यन गुप्ता (AIR 1) और पांशुल बंसल (AIR 2) ने छात्रों के विरोध को जायज बताया। जानिए उन्होंने परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए कौन-से 3 बड़े सुझाव दिए।

720 में से 715 अंक लाकर टॉपर बने आर्यन और पांशुल का बड़ा खुलासा
720 में से 715 अंक लाकर टॉपर बने आर्यन और पांशुल का बड़ा खुलासा

नीट पेपर के बाद कई छात्रों ने आत्महत्या कर ली थी। इसको लेकर खूब बवाल हुआ। अब शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर बड़ी संख्या में लोग दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। लीक विवाद से लाखों छात्रों की तरह आर्यन गुप्ता और पांशुल बंसल ने भी गुस्सा और अन्याय महसूस किया था। आर्यन गुप्ता और पंशुल बंसल ने कहा कि "विरोध हमारा हक है, लोकतंत्र का हिस्सा है"। उन्होंने जोर दिया कि छात्रों के पास शिकायतें उठाने का पूरा अधिकार है, लेकिन सुधार लाना सरकार की जिम्मेदारी है। हालांकि इन दोनों होनहारों ने खुद को सड़क पर उतरे प्रदर्शनकारियों की भीड़ और शोर-शराबे से दूर रखा। उन्होंने अपनी इच्छाशक्ति को दोबारा बटोरा और 21 जून को हुई दोबारा परीक्षा के लिए जी-जान से जुट गए।

720 में से 715 अंक हासिल कर बने टॉपर

दोबारा आयोजित हुई इस परीक्षा में दोनों छात्रों ने 720 में से 715 का शानदार स्कोर किया। आर्यन गुप्ता ने ऑल इंडिया रैंक (AIR) 1 हासिल की, जबकि टाई-ब्रेकिंग नियम के आधार पर हरियाणा के पांशुल बंसल को दूसरा स्थान (AIR 2) मिला।

सिस्टम में सुधार के लिए टॉपर्स ने दिए ये 3 सुझाव

नीट परीक्षा के मौजूदा सिस्टम में सुधार के लिए आर्यन और पांशुल ने कई अहम सुझाव दिए हैं, ताकि भविष्य में किसी भी परीक्षार्थी को इस साल जैसी मानसिक परेशानी का सामना न करना पड़े:

कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT): नीट की परीक्षा पूरी तरह से कंप्यूटर आधारित होनी चाहिए।

सख्त सुरक्षा व्यवस्था: पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए परीक्षा की सुरक्षा को और भी ज्यादा कड़ा किया जाना चाहिए।

साल में दो मौके: अत्यधिक दबाव कम करने के लिए नीट परीक्षा को साल में दो बार आयोजित किया जाना चाहिए।

'विरोध प्रदर्शन और असहमति लोकतंत्र के लिए जरूरी'

प्रदर्शन कर रहे छात्रों के अधिकार का बचाव करते हुए आर्यन गुप्ता ने कहा, "विरोध और असहमति जताना किसी भी नागरिक का बुनियादी अधिकार है। लोकतंत्र के लिए ये बहुत जरूरी हैं।"

हालांकि, परीक्षा रद्द होने के अन्याय पर उन्होंने बहुत सकारात्मक नजरिया अपनाया। आर्यन का मानना था, "भले ही यह अनुचित था, लेकिन यह केवल मेरे साथ नहीं बल्कि सभी के साथ हुआ अन्याय था।" उन्होंने दोबारा हुई परीक्षा को अपनी कमियों को सुधारने और बेहतर प्रदर्शन करने के एक शानदार मौके के रूप में देखा।

पांशुल ने दो महीने तक खबरों से बना ली थी दूरी

AIR 2 हासिल करने वाले पांशुल बंसल ने पेपर लीक और उससे जुड़े विरोध प्रदर्शनों की बढ़ती खबरों के बीच खुद को नकारात्मकता से बचाने का फैसला किया। करीब दो महीने तक उन्होंने खबरें देखना बिल्कुल बंद कर दिया था क्योंकि इससे उनके मन में 'नकारात्मक विचार' आ रहे थे। पांशुल का साफ तौर पर मानना था कि एक छात्र के रूप में उनका काम केवल अपनी 'तैयारी करना' है, जबकि व्यवस्था की खामियों को सुधारना 'सरकार की जिम्मेदारी' है।

Amit Kumar

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डिजिटल पत्रकारिता की बदलती लहरों के बीच समाचारों की तह तक जाने की ललक अमित कुमार को इस क्षेत्र में खींच लाई। समकालीन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पैनी नजर रखने के साथ-साथ अमित को जटिल विषयों के गूढ़ विश्लेषण में गहरी रुचि है। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले अमित को मीडिया जगत में एक दशक का अनुभव है। वे पिछले 4 वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।


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अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।

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