'प्रीति गुप्ता कहां हैं? आपका बच्चा यहां है' जब CJP आंदोलन में लगने लगा ये नारा, क्या है इसकी कहानी?
वायरल क्लिप में दिखाया गया है कि कैसे प्रदर्शन के दौरान एक छोटा बच्चा अपनी मां से बिछड़ जाता है। घबराए हुए बच्चे को देखकर वहां मौजूद अजनबी युवा और प्रदर्शनकारी तुरंत मदद के लिए आगे आते हैं।

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के हालिया आंदोलन का एक बेहद भावुक कर देने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। लाखों की भीड़ और हंगामे के बीच इस वीडियो ने साबित कर दिया कि आंदोलन चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, इंसानियत और संवेदनशीलता सबसे ऊपर होती है।
वायरल क्लिप में दिखाया गया है कि कैसे प्रदर्शन के दौरान एक छोटा बच्चा अपनी मां से बिछड़ जाता है। घबराए हुए बच्चे को देखकर वहां मौजूद अजनबी युवा और प्रदर्शनकारी तुरंत मदद के लिए आगे आते हैं।
"प्रीति गुप्ता कहां हैं, आपका बच्चा यहां है!"
एक इंस्टाग्राम पेज पर शेयर किए गए इस वीडियो में देखा जा सकता है कि भीड़ ने बच्चे की मां को ढूंढने का एक अनोखा और असरदार तरीका निकाला।
युवाओं ने किसी विरोध-प्रदर्शन के नारे की तरह एक सुर में चिल्लाना शुरू कर दिया- "प्रीति गुप्ता कहां हैं, आपका बच्चा यहां है!"
देखते ही देखते जंतर-मंतर की विशाल भीड़ में यह आवाज एक कोने से दूसरे कोने तक गूंजने लगी।
कुछ ही मिनटों में भीड़ के जरिए मां तक यह संदेश पहुंच गया। जैसे ही मां दौड़ती हुई पहुंची, बच्चा भागकर उसके गले लग गया। इस रोते-बिलखते और फिर मुस्कुराते हुए मिलन को देखकर आसपास मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं।
सोशल मीडिया पर लोगों का रिएक्शन
वीडियो के सामने आने के बाद इंटरनेट पर युवाओं और प्रदर्शनकारियों के इस व्यवहार की जमकर तारीफ हो रही है।
एक यूजर ने लिखा, "यह अब तक का सबसे सुरक्षित प्रदर्शन है।"
एक दूसरे यूजर ने कमेंट किया, "यह मेरा भारत है- बिना धर्म, बिना जाति और नफरत के, सिर्फ शुद्ध प्यार।"
एक व्यूअर ने लिखा, "यह सिर्फ एक प्रोटेस्ट नहीं था। यह कविता थी, सिनेमा था, कला थी। भीड़ एक पल के लिए पूरा परिवार बन गई।"
पाकिस्तान से भी एक यूजर ने लिखा, "प्रदर्शन से जुड़ी कितनी खूबसूरत कहानी है। भारतीय युवाओं को सलाम, सरहद पार से शुभकामनाएं।"
सोशल मीडिया पर लोग इस बात की भी सराहना कर रहे हैं कि कैसे आज की युवा पीढ़ी (Gen-Z) ने इतने संवेदनशील माहौल में भी सूझबूझ और भाईचारे का परिचय दिया। कई लोगों ने सलाह दी कि बड़ी जनसभाओं या मेलों में बच्चों को अपनों से मिलाने का यही आधिकारिक तरीका अपनाया जाना चाहिए।


