'यूपी में होगा टेस्ट', CJP प्रोटेस्ट पर क्या बोली विदेशी मीडिया; पाकिस्तान से अमेरिका तक चर्चा
दिल्ली में CJP के संसद मार्च पर विदेशी मीडिया की कवरेज। NYT, BBC, और द गार्डियन ने मोदी सरकार के खिलाफ इसे सबसे बड़ा 'Gen Z' विद्रोह बताया। पुलिस की लाठियों और मुस्कुराते पीएम मोदी पर क्या छपा?

भारत में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले चल रहे विरोध प्रदर्शनों की गूंज भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी सुनाई दे रही है। पाकिस्तान की मीडिया ने सोमवार को सीजेपी के संसद मार्च को प्रमुखता से कवर किया है। इसके अलावा, अमेरिका और यूरोप के कई प्रतिष्ठित समाचार पत्रों और टीवी चैनलों ने इस विरोध प्रदर्शन को कवर किया है।
विदेशी मीडिया ने क्या-क्या लिखा?
विदेशी अखबारों और न्यूज वेबसाइट्स ने इस प्रदर्शन को हाल के वर्षों में नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ सबसे बड़े विरोध के रूप में पेश किया है। विदेशी मीडिया ने अपनी रिपोर्ट्स में पुलिस की सख्ती, राजधानी के बीचों-बीच इंटरनेट शटडाउन और पड़ोसी देशों (बांग्लादेश-नेपाल) में हुए 'जेन-जी' प्रोटेस्ट से इसकी तुलना की है।
पाकिस्तानी मीडिया क्या बोली?
पाकिस्तान के प्रतिष्ठित अखबार 'द डॉन' ने अपनी रिपोर्ट में इस प्रदर्शन को भारत में पीएम मोदी के खिलाफ युवाओं का एक बड़ा विद्रोह करार दिया है। अखबार के मुताबिक, यह पहली बार है जब कोई 'वायरल ऑनलाइन यूथ मूवमेंट' सोशल मीडिया से निकलकर सीधे सड़कों पर आ गया है। 'द डॉन' ने CJP संस्थापक अभिजीत दिपके के अमेरिका से भारत लौटने और हाथ में 'भारत का संविधान' लेकर सीधे जंतर-मंतर पहुंचने का विशेष रूप से उल्लेख किया है। अखबार ने उनके 2.2 करोड़ इंस्टाग्राम फॉलोअर्स और युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता को भी हाईलाइट किया है।
इसके अलावा, पाकिस्तान के जियो.टीवी ने लिखा कि- 'भारत के 'कॉकरोच' आंदोलन ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक विरोध जारी रखने का संकल्प लिया है।' चैनल ने एएफपी की खबर छापते हुए लिखा- नई दिल्ली में विरोध प्रदर्शन में कम से कम 180 लोगों के घायल होने के एक दिन बाद, भारत के "कॉकरोच" पार्टी आंदोलन ने मंगलवार को शिक्षा मंत्री के इस्तीफा देने तक अपने अभियान को आगे बढ़ाने की कसम खाई। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ऑनलाइन आंदोलन द्वारा शक्ति प्रदर्शन करते हुए, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और व्यापक परीक्षा सुधारों की मांग करते हुए, हजारों प्रदर्शनकारी सोमवार को भारतीय राजधानी के मध्य में एकत्र हुए। मई में लॉन्च होने के बाद से सीजेपी ने सोशल मीडिया पर लाखों फॉलोअर्स हासिल कर लिए हैं, जिससे 2024 में अपना तीसरा कार्यकाल जीतने के बाद से हिंदू-राष्ट्रवादी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक को बढ़ावा मिला है। सीजेपी के आशुतोष रांका ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, "हम नहीं रुकेंगे। प्रधान को बर्खास्त करना होगा।"
द न्यूयॉर्क टाइम्स (NYT): 'मोदी की मजबूत छवि में दरार'
अमेरिकी अखबार 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' ने लिखा है कि एक तरफ दिल्ली की सड़कों पर अफरा-तफरी का माहौल था, तो दूसरी तरफ संसद में 'मुस्कुराते हुए मिस्टर मोदी' शांति की छवि पेश करने की कोशिश कर रहे थे और उन्होंने प्रदर्शनकारियों की मांगों को संबोधित नहीं किया। अखबार ने लिखा है कि सत्ताधारी बीजेपी ने भारत के युवाओं के भारी गुस्से को कमतर आंकने की गलती की है। साथ ही रिपोर्ट में कहा गया है कि पीएम मोदी की एक 'स्ट्रॉन्गमैन' वाली छवि में भी अब दरारें दिख रही हैं। NYT ने सरकार समर्थक टीवी चैनलों पर भी तंज कसा कि जिन्होंने पहले इस प्रदर्शन को नजरअंदाज किया, वे बाद में संसद के आसपास दहशत का माहौल दिखाते नजर आए।
बीबीसी: खून से लथपथ और लंगड़ाते प्रदर्शनकारी
बीबीसी की रिपोर्ट में जंतर-मंतर पर तिरंगा और तख्तियां लिए प्रदर्शनकारियों और संसद की ओर जाने वाले रास्तों पर पुलिस की भारी घेराबंदी के बीच के सीधे टकराव को दिखाया गया है। रिपोर्ट में जिक्र है कि पुलिस के पीछे धकेलने पर कई प्रदर्शनकारी सिर से खून बहते या लंगड़ाते हुए जंतर-मंतर की तरफ लौटे। बीबीसी के मुताबिक, यह आंदोलन पीएम मोदी के खिलाफ हाल के वर्षों में असंतोष का सबसे बड़ा चेहरा बन गया है।
फाइनेंशियल टाइम्स (FT): 'जब मोदी डरता है...' के गूंजे नारे
फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने भीड़ पर आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठियां बरसाईं। रिपोर्ट में मई में हुए असम और पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणामों का भी जिक्र है, जिसमें बीजेपी ने बंगाल में क्लीन स्वीप किया और असम में सत्ता बरकरार रखी। हालांकि, अखबार का मानना है कि यह प्रदर्शन मोदी सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती बन सकता है। रिपोर्ट में प्रदर्शनकारियों के उस नारे का विशेष जिक्र है, जिसमें वे चिल्ला रहे थे- "जब भी मोदी डरता है, पुलिस को आगे करता है।"
ब्लूमबर्ग और वॉल स्ट्रीट जर्नल: यूपी चुनाव पर पड़ सकता है असर
बिजनेस न्यूज पब्लिकेशन 'ब्लूमबर्ग' के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने पीछे हटने से इनकार कर दिया है, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ गया है। ब्लूमबर्ग ने चेताया है कि यह बढ़ता असंतोष अगले साल मई तक होने वाले उत्तर प्रदेश (भारत का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य) के विधानसभा चुनावों में बीजेपी के लिए एक बड़ा टेस्ट साबित होगा। वहीं, वॉल स्ट्रीट जर्नल ने भी इसे पीएम मोदी के सामने सालों की सबसे बड़ी चुनौती करार दिया है।
द गार्डियन: युवाओं का गुस्सा और पुलिस की सख्ती
ब्रिटिश अखबार 'द गार्डियन' ने अपनी हेडलाइन में लिखा- "हजारों CJP प्रदर्शनकारियों ने पुलिस को चुनौती देते हुए दिल्ली में मार्च किया।" रिपोर्ट में बताया गया है कि इस भीड़ में मुख्य रूप से छात्र और 'जेन-जी' युवा शामिल थे, जो मोदी सरकार से इस बात को लेकर बेहद नाराज हैं कि सरकार ने युवाओं को निराश किया है। द गार्डियन ने नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे देशों में युवाओं द्वारा सरकारें गिराए जाने का हवाला देते हुए लिखा कि भारत में इस स्तर का विरोध प्रदर्शन हाल के वर्षों में एक असामान्य घटना है।
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अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।
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