बिखरे सपने, रोते छात्र और सड़कों पर छूटी चप्पलें: जंतर-मंतर पर न्याय की दर्दनाक कहानी

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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दिल्ली में NEET पेपर लीक के खिलाफ CJP का संसद मार्च हिंसक हुआ। लाठीचार्ज और सोनम वांगचुक के अस्पताल में भर्ती होने के बाद जंतर-मंतर पर हालात तनावपूर्ण हैं। जानिए इस महाआंदोलन की पूरी इनसाइड स्टोरी।

बिखरी चप्पलें, रोते छात्र और कटे तार: दिल्ली के संसद मार्च में 'कॉकरोच आंदोलन' का दर्दनाक सच
बिखरी चप्पलें, रोते छात्र और कटे तार: दिल्ली के संसद मार्च में 'कॉकरोच आंदोलन' का दर्दनाक सच

दिल्ली की सड़कें कल उन युवाओं की निराशा और गुस्से की गवाह बनीं, जो अपने भविष्य की लड़ाई लड़ने के लिए सड़कों पर उतरे थे। नीट पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू हुआ 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) का यह आंदोलन तब और उग्र हो गया, जब हजारों छात्रों ने जंतर-मंतर से संसद की ओर कूच करने की कोशिश की। पुलिस के बैरिकेड्स, आंसू गैस के गोले और लाठीचार्ज के बाद जो मंजर दिखा, वो दिल दहला देने वाला था- सड़क पर बिखरी चप्पलें...... रोते हुए छात्र-छात्राएं... भीड़ के बीच बेहोश पड़ा एक प्रदर्शनकारी... और अपने बेटे के भविष्य की चिंता में संसद मार्च में शामिल हुई एक मां। सोमवार को संसद की ओर बढ़े प्रदर्शनकारियों की कहानी सिर्फ नारों तक सीमित नहीं रही। दिन ढलते-ढलते यह आंदोलन कई ऐसे चेहरों और दृश्यों को पीछे छोड़ गया, जो दिनभर की उथल-पुथल की गवाही देते नजर आए।

"मुझे समझ नहीं आ रहा.. मेरी गलती क्या थी"

सोशल मीडिया पर प्रदर्शनकारी पुलिस कार्रवाई के दौरान अपने अनुभव साझा करते हुए नजर आए। सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किए जा रहे एक वीडियो में 16 वर्षीय एक प्रदर्शनकारी कहता है, "वह मार्च के दौरान सबसे आगे चल रहा था और अचानक लाठीचार्ज शुरू हो गया। मुझे बुरी तरह पीटा गया। मुझे समझ नहीं आ रहा.. मेरी गलती क्या थी।"

एक अन्य वीडियो में एक प्रदर्शनकारी अचेत अवस्था में दिखाई देता है। उसके आसपास मौजूद लोग उसे संभालने और प्राथमिक सहायता देने की कोशिश करते नजर आते हैं। एक वीडियो के अनुसार, एक छात्रा रोते हुए कहती है कि वह सुबह से प्रदर्शन में मौजूद थी और पुलिस कार्रवाई के दौरान बाहर निकलने का रास्ता तलाश रही थी। उसका आरोप है कि इसी दौरान उन पर लाठीचार्ज हुआ और कई छात्रों को पीटा गया।

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सड़क पर बिखरी चप्पलें भी बहुत कुछ कह रही थीं

दिनभर की अफरातफरी के बाद सड़क पर बिखरी चप्पलें भी बहुत कुछ कह रही थीं। यह स्पष्ट नहीं है कि वे किसकी थीं, लेकिन वे उस भागदौड़ और अव्यवस्था की मूक गवाह बन गईं, जिसने कुछ देर के लिए पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया। इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक मां की आवाज भी सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींचती रही। वीडियो में वह कहती है कि उसके पति दिल्ली पुलिस में हैं, लेकिन वह अपने बेटे के भविष्य की चिंता में प्रदर्शन में शामिल होने आई है।

सोशल मीडिया पर सामने आए ये वीडियो दिनभर की घटनाओं के अलग-अलग मानवीय पहलुओं को सामने लाते हैं। इनमें आंसू हैं, चोट के दावे हैं, अपनों की चिंता है और अपने भविष्य को लेकर सड़क पर उतरे युवाओं की बेचैनी हैं।

हालांकि, इन वीडियो में किए गए दावों की हम स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करते हैं। सोमवार को हजारों प्रदर्शनकारी संसद मार्ग के निकट एकत्र हुए और परीक्षा में कथित अनियमितताओं पर जवाबदेही तय करने तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद की ओर मार्च करने का प्रयास किया। सुरक्षा बलों ने उन्हें रोक दिया, जिसके बाद झड़प हुई और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया गया।

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ताजा अपडेट: लाठीचार्ज के बाद रात के अंधेरे में भी डटे छात्र

सोमवार (20 जुलाई 2026) को हुए इस भारी बवाल के बाद नई दिल्ली में हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। दिन भर चले लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के बावजूद युवा पीछे नहीं हटे। शाम ढलते ही सैकड़ों प्रदर्शनकारी फिर से जंतर-मंतर पर जुट गए। वहां की बिजली काट दी गई है, लेकिन रात के अंधेरे में भी ये छात्र धरने पर बैठे हैं।

छात्रों के समर्थन में कई दिनों से भूख हड़ताल कर रहे मशहूर शिक्षाविद् सोनम वांगचुक को पुलिस ने शनिवार को जबरन उठाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया है। सीजेपी के प्रतिनिधिमंडल (सौरव दास और आशुतोष रांका) ने केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा से मुलाकात कर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और वांगचुक की रिहाई की मांग उठाई है, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस आश्वासन या समाधान नहीं निकला है।

क्या है 'कॉकरोच' आंदोलन?

यह आंदोलन उस वक्त शुरू हुआ जब कथित तौर पर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने बेरोजगार युवाओं को 'कॉकरोच' कह दिया था। इसके बाद छात्र अभिजीत दिपके ने व्यंग्य के तौर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' बनाई, जो नीट धांधली के बाद आज देश के युवाओं की एक बड़ी आवाज बनकर सड़कों पर उतर आई है। भविष्य के डॉक्टर, इंजीनियर और शिक्षक आज सड़कों पर न्याय मांग रहे हैं। यह सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं है, बल्कि उस युवा पीढ़ी की चीख है जिसे लगता है कि सिस्टम ने उनके सपनों को कुचल दिया है।

(इनपुट भाषा)

Amit Kumar

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