तेजी से होगी पुराने केसों के सुनवाई, CJI सूर्यकांत ने बनाई चार स्पेशल बेंच; कौन-कौन से जज हैं शामिल
सीजेआई सूर्यकांत ने पुराने मामलों की सुनवाई के लिए चार विशेष पीठ बनाई हैं। ये पीठ सप्ताह में तीन दिन पुराने आपराधिक और सिविल केसों की सुनवाई करेंगी। कुल 800 केसों को चिह्नित किया गया है।

लंबे समय से लंबित पड़े केसों की फास्ट-ट्रैक सुनवाई के लिए सीजेआई सूर्यकांत ने चार स्पेशल बेंच बना दी हैं। ये बेंच सुप्रीम कोर्ट के सबसे पुराने सिविल और क्रिमिल केसों की सुनवाई केरंगी। जानकारी के मुताबिक पहले 800 मामलों को प्राथमिकता में रखा गया है। गर्मी में आंशिक अवकाश के बाद अब सुप्रीम कोर्ट में फुल मोड में कार्यवाही शुरू हो गई है। ऐसे में सीजेआई सूर्यकांत को जोर है कि पुराने केसों को तेजी से निपटाया जाए ताकि न्याय सुनिश्चित किया जा सके।
हिन्दुस्तान टाइम्स से बात करते हुए चीफ जस्टिस ने कहा कि लोगों का न्याय व्यवस्था में भरोसा बना रहना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा, न्यायपालिका पर बड़ा आरोप लगता है कि मामलों की सुनवाई और फैसला जल्दी नहीं होता है। कई बार लोगों को दशकों तक इंतजार करना पड़ता है। हालांकि कोई केस कितने समय से चल रहा है इससे यह नहीं कहा जा सकता कि उसे नजरअंदाज किया जा रहा है। सीजेआई ने कहा कि प्रयास यही है कि पुराने केसों को जल्दी निपटा लिया जाए जिससे लोगों को न्याय भी मिले और न्यायपालिका का बोझ भी कम हो।
कौन-कौन से जज बेंच में शामिल
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि सभी पुराने केस लॉजिकल फैसले पर पहुंचाए जाएँगे। समय बीत जाने का मतलब यह नहीं कि न्याय नहीं होगा। नए रोस्टर के मुताबिक जस्टिस पीके मिश्रा और एसवीएन भट्टी की खंड पीठ पुराने सिविल केसों की सुनवाई करेगी। यह सुनवाई मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को होगी। दो अन्य खंड पीठ पुराने आपराधिक मामलों की सुनवाई करेंगी। इनमें जस्टिस मनोज मिश्रा और उज्ज्वल भुयान शामिल हैं।
कितने केस लंबित हैं
मामले के जानकारों लोगों का कहना है कि हर पीठ को 200 केस सौंपे गए हैं। 800 पुराने मामलों का ट्रांसलेशन शुरू कर दिया गया है। नेशनल जूडिशनल डेटा ग्रिड (NJDG) के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट में 95911 केस लंबित हैं जिनमें से 74,145 सिविल केस और 21,766 क्रिमिल केस हैं। इनमें से 37,826 केस यानी करीब 40 फीसदी केस एक साल ही पुराने हैं। इन तीन खंड पीठ से कहा गया है कि सप्ताह के तीन दिन पूराने मामलों की सुनवाई करें।
सीजेआई ने रविवार को उत्तर प्रदेश की तर्ज़ पर पूरे हरियाणा में एकीकृत ज़िला अदालत परिसर बनाने की भी वकालत की। उन्होंने कहा कि अधिक अदालतें होने से न्यायिक क्षमता बढ़ेगी, खासकर वाणिज्यिक विवादों और परक्राम्य लिखत अधिनियम के तहत आने वाले मामलों में। इस संबंध में जारी बयान के अनुसार, नए प्रतिष्ठान में 55 आधुनिक अदालत कक्ष हैं, जबकि पहले वाले में 45 थे। साथ ही, इस परिसर में वीडियो-कॉन्फ्रेंस और न्यायिक रिकॉर्ड रूम जैसी सुविधाएं भी हैं तथा उच्च न्यायालय की देखरेख में एक अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र भी प्रस्तावित है।
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अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।
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