Hindi NewsIndia NewsCJI Suryakant Big order amid West Bengal SIR to publish 1.25 crore names with Logical discrepancies
समझना चाहिए, लोग कितने तनाव में हैं; बंगाल में चल रहे SIR के बीच CJI सूर्यकांत ने EC को दिया बड़ा आदेश

समझना चाहिए, लोग कितने तनाव में हैं; बंगाल में चल रहे SIR के बीच CJI सूर्यकांत ने EC को दिया बड़ा आदेश

संक्षेप:

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग को यह समझना चाहिए कि पश्चिम बंगाल में चल रहे SIR की वजह से लोग कितने तनाव में हैं। इसके साथ ही SC ने आयोग को निर्देश दिया कि वह उन वोटरों के नाम जारी करे जिन्हें तार्किक विसंगतियों के तहत नोटिस मिले हैं।

Jan 19, 2026 06:45 pm ISTPramod Praveen पीटीआई
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सुप्रीम कोर्ट ने आज (सोमवार,19 जनवरी को) भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को साफ निर्देश दिया कि पश्चिम बंगाल में चल रहे विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण (SIR) के दौरान जिन करीब 1.25 करोड़ लोगों के खिलाफ "तार्किक विसंगतियों" (logical discrepancy) की आपत्ति उठाई गई है, उन सभी के नाम पब्लिश किए जाएं। देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने ये आदेश दिया है। पीठ में CJI के अलावा, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस जॉयमाल्य बागची भी शामिल हैं। सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा कि दस्तावेजों के वेरिफिकेशन के लिए करीब दो करोड़ लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं।

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग को यह समझना चाहिए कि पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन की वजह से लोग कितने "तनाव" में हैं। बार एंड बेंच की रिपोर्ट में कहा गया है कि ये नोटिस मोटे तौर पर तीन कैटेगरी में बांटे गए हैं- मैप्ड, अनमैप्ड और लॉजिकल गड़बड़ी। कोर्ट ने आगे कहा कि 'लॉजिकल गड़बड़ी' कैटेगरी के तहत, अधिकारियों ने पिता के नाम में गड़बड़ी, माता-पिता की उम्र में गड़बड़ी और दादा-दादी की उम्र में अंतर देखा है। इसी दौरान अदालत ने गौर किया कि राज्य में 1.25 करोड़ मतदाता “तार्किक विसंगतियों” की सूची में शामिल हैं। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग को पश्चिम बंगाल के ग्राम पंचायत भवनों, तालुका प्रखंड कार्यालयों और वार्ड कार्यालयों में “तार्किक विसंगतियों” की सूची में शामिल लोगों के नाम प्रदर्शित करने का निर्देश दिया।

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तार्किक विसंगतियों में क्या-क्या?

बता दें कि SIR के दौरान मतदाताओं के विवरण में कई किस्म की विसंगतियां पाई गई हैं। राज्य में 2002 की मतदाता सूची से संतानों के संबंध में तार्किक विसंगतियों में माता-पिता के नाम का बेमेल होना और मतदाता और उनके माता-पिता के बीच आयु का अंतर 15 वर्ष से कम या 50 वर्ष से अधिक होना भी शामिल है। पीठ ने कहा कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के जारी विशेष गहन पुनरीक्षण से प्रभावित होने की संभावना वाले लोगों को अपने दस्तावेज या आपत्तियां प्रस्तुत करने की अनुमति दी जाए।

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पर्याप्त श्रमशक्ति उपलब्ध कराएं

उच्चतम न्यायालय ने निर्देश दिया कि दस्तावेज और आपत्तियां प्रस्तुत करने के लिए कार्यालय पंचायत भवनों या ब्लॉक कार्यालयों के भीतर स्थापित किए जाएंगे। पीठ ने कहा, “राज्य सरकार पंचायत भवनों और प्रखंड कार्यालयों में तैनाती के लिए राज्य निर्वाचन आयोग को पर्याप्त श्रमशक्ति उपलब्ध कराएगी।”

west Bengal SIR

न्यायालय ने कहा, “इस संबंध में, हम निर्देश देते हैं कि सुचारू कामकाज के लिए प्रत्येक जिला, ईसीआई या राज्य सरकार द्वारा कर्मचारियों के लिए जारी किए गए निर्देशों का सावधानीपूर्वक पालन करे।” उच्चतम न्यायालय ने निर्देश दिया कि पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) यह सुनिश्चित करने के लिए बाध्य होंगे कि कानून-व्यवस्था की कोई समस्या न हो और सभी गतिविधियां सुचारू रूप से पूरी हों। सर्वोच्च न्यायालय पश्चिम बंगाल में चल रही एसआईआर प्रक्रिया में मनमानेपन और प्रक्रियात्मक अनियमितताओं के आरोपों से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था।

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen
भूगोल में पीएचडी और पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर उपाधि धारक। ईटीवी से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार पत्रकारिता करियर की शुरुआत। कई हिंदी न्यूज़ चैनलों (इंडिया न्यूज, फोकस टीवी, साधना न्यूज) की लॉन्चिंग टीम का सदस्य और बतौर प्रोड्यूसर, सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में काम करने के बाद डिजिटल पत्रकारिता में एक दशक से लंबे समय का कार्यानुभव। जनसत्ता, एनडीटीवी के बाद संप्रति हिन्दुस्तान लाइव में कार्यरत। समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक जगत के अंदर की खबरों पर चिंतन-मंथन और लेखन समेत कुल डेढ़ दशक की पत्रकारिता में बहुआयामी भूमिका। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और संपादन। और पढ़ें
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