
गरीब के चेहरे पर मुस्कान ही असली कमाई; जब 23 साल बाद विधवा को मिला इंसाफ, क्या बोले CJI?
CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्य बागची की बेंच ने विधवा महिला को मिले इंसाफ पर खुशी जताई। पीठ ने बताया कि 23 बाद इस महिला को ढूंढना बेहद मुश्किल काम था।
देश के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने गुरुवार को एक विधवा महिला को मुआवजे की रकम दिलवाने के बाद कहा है कि अदालत का मकसद सिर्फ यही है कि एक गरीब व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान आए और न्यायालय को इससे ज्यादा कुछ नहीं चाहिए। दरअसल हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की पहल के बाद रेलवे ने लगभग 23 साल बाद बिहार की एक विधवा को ढूंढकर उसके बैंक खाते में 8.92 लाख रुपये का मुआवजा जमा किया है। उच्चतम न्यायालय ने इसपर खुशी जताई।
CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्य बागची की बेंच ने बताया कि इतने सालों बाद विधवा महिला को ढूंढना बेहद मुश्किल काम था क्योंकि वह बिहार के एक दूरदराज गांव में अपना ठिकाना बदल चुकी थीं और उनके स्थानीय वकील का निधन हो गया था जिसके बाद संपर्क पूरी तरह टूट गया था।
गरीब के चेहरे पर मुस्कान ही असली कमाई- CJI
हालांकि बेंच ने रेलवे की मेहनत और वकील फौज़िया शकील की तारीफ की, जिन्होंने विधवा का केस बिना किसी फीस के लड़ा और आखिरकार उन्हें न्याय दिलाया। CJI ने इस दौरान कहा, "इस युवा वकील ने 23 साल बाद विधवा को मुआवजा दिलवाया। हमें पुलिस और लोकल प्रशासन की मदद भी लेनी पड़ी। रेलवे ने आखिरकार भुगतान कर दिया है। गरीब के चेहरे पर मुस्कान ही हमारी असली कमाई है।"
20 साल तक कानूनी लड़ाई लड़ती रही महिला
जानकारी के मुताबिक महिला के पति विजय सिंह ने 21 मार्च 2002 को बख्तियारपुर से पटना जाने के लिए वैध टिकट खरीदा था और भगलपुर–दानापुर इंटरसिटी एक्सप्रेस में चढ़ रहे थे। तभी भीड़ की वजह से वह ट्रेन से गिर गए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। इसके बाद विधवा ने मुआवजे के लिए रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल और पटना हाईकोर्ट में गुहार लगाई, लेकिन दोनों जगह दावा यह कहकर खारिज कर दिया गया कि मृतक मानसिक रूप से अस्वस्थ था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने 2023 में इस तर्क को बेतुका, काल्पनिक और रिकॉर्ड के विपरीत बताया।
सुप्रीम कोर्ट ने दिलवाया मुआवजा
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए महिला को मुआवजा देने का आदेश दिया। SC ने कहा, "अगर मृतक मानसिक रूप से अस्वस्थ होता, तो वे खुद टिकट कैसे खरीदता और ट्रेन में चढ़ने की कोशिश कैसे करता?" सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे को 2 महीने में 4 लाख रुपये और 6 फीसदी ब्याज देने का आदेश दिया था। हालांकि स्थानीय वकील के निधन के कारण आदेश महिला तक पहुंच ही नहीं पाया।
रेलवे ने सुप्रीम कोर्ट से मदद मांगी
इसके बाद रेलवे ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वे महिला को ढूंढ नहीं पा रहे हैं और सही पता ना होने से आदेश का पालन नहीं हो पा रहा। तब सुप्रीम कोर्ट ने ईस्टर्न रेलवे को दो बड़े अखबारों में विज्ञापन देने का आदेश दिया। आखिरकार पुलिस और रेलवे ने गहन खोज के बाद महिला और उनके परिवार को ढूंढ निकाला और 13 नवंबर 2025 को उसके बैंक खाते में 8,92,953 रूपये जमा कर दिए।





