ये बदतमीजी वाली भाषा, याचिका देख CJI सूर्यकांत हुए नाराज; भरी अदालत में ही सुनाया
सीजेआई ने याचिका पर जमकर नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने व्यक्तिगत रूप से पहुंचे याचिकाकर्ता से कहा, 'इस पिटीशन में जिस भाषा का इस्तेमाल हुआ है, उसे आपने कहा से सीखा है? ये बदतमीजी की भाषा कहां से लेकर आते हैं आप लोग? कैसे याचिका लिखते हैं आप लोग।'

जाति जनगणना रुकवाने की मांग करने वाले याचिकाकर्ता को सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई है। साथ ही याचिका को खारिज भी कर दिया है। इसमें जाति जनगणना रोकने समेत की मांगें की गईं थीं। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने याचिका को लिखने के तरीके और भाषा के इस्तेमाल पर भी कड़ी आपत्ति जताई है।
CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाला बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच के सामने याचिका पेश हुई थी। इसे चिराग हरिवंदन मोदी ने दाखिल किया था। लाइव लॉ के अनुसार, इसमें मांग की गई थी कि केंद्र को जाति जनगणना रोकने के आदेश जारी किए जाएं। साथ ही अनुरोध किया गया था कि ऐसे परिवारों को आर्थिक फायदा देने के लिए नीति बनाई जाए, जिनका एक ही बच्चा है।
भड़क गए सीजेआई
रिपोर्ट के अनुसार, सीजेआई ने याचिका पर जमकर नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने व्यक्तिगत रूप से पहुंच याचिकाकर्ता से कहा, 'इस पिटीशन में जिस भाषा का इस्तेमाल हुआ है, उसे आपने कहा से सीखा है? ये बदतमीजी की भाषा कहां से लेकर आते हैं आप लोग? कैसे याचिका लिखते हैं आप लोग।'
दूसरे चरण में होगी जाति जनगणना
जनवरी में गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देश में होने वाली जनगणना का काम दो हिस्सों में बांटा गया है। जाति जनगणना दूसरे चरण के दौरान की जाएगी। सरकार ने कहा है कि पहले चरण में मकानों की सूची बनाना और उनकी गणना करना शामिल होगा। दूसरे चरण के दौरान जाति जनगणना का काम किया जाएगा। सरकार ने 22 जनवरी को पहले चरण के दौरान पूछे जाने वाले 33 प्रश्नों को अधिसूचित किया था।
इस दौरान घर में इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री, घर में रहने वाले विवाहित जोड़ों की संख्या, घर के मुखिया का लिंग, उपभोग किए जाने वाले अनाज का प्रकार, बुनियादी और आधुनिक आवश्यकताओं तक पहुंच, वाहनों के प्रकार सहित अन्य प्रश्न सूचीबद्ध किए हैं जो पहले चरण के दौरान पूछे जाएंगे।
एक ही वकील ने दाखिल कर दीं 25 याचिकाएं
शुक्रवार को ही सुप्रीम कोर्ट ने एडवोकेट सचिन गुप्ता की तरफ से दाखिल 25 जनहित याचिकाओं को सुनने से इनकार कर दिया है। सीजेआई ने कहा, 'अभी अपना पूरा ध्यान अपने पेशे पर लगाइए। जब सही समय आएगा, तब हम इन मामलों पर भी विचार करेंगे। लेकिन सबसे पहले लोगों को जागरूक करने और असल मुद्दों को सुलझाने की कोशिश करें।'
इसके बाद वकील ने याचिकाओं को वापस लेने की अनुमति मांगी थी, जो उन्हें कोर्ट ने दे दी। इन याचिकाओं में बंदूक के इस्तेमाल पर नीति, कानून की जागरूकता से जुड़े टीवी कार्यक्रम के लिए नीति समेत कई अनुरोध किए गए थे।
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Nisarg Dixitनिसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।
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