मैं कभी उनका मुकाबला नहीं कर सकता, रिकॉर्ड क्या तोड़ेंगे; CJI सूर्यकांत ने की किस जज की तारीफ

Nisarg Dixit लाइव हिन्दुस्तान
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मुख्य न्यायाधीश ने कहा, 'जैसा कि अटॉर्नी जनरल ने सही कहा हम दोनों ही केसों को तेजी से निपटाने के लिए जाने जाते थे, लेकिन मैं कभी उनका मुकाबला नहीं कर सका और उनका रिकॉर्ड तोड़ना तो दूर की बात थी। वे बहुत ही जल्द केस निपटान के लिए जाने जाते थे।'

मैं कभी उनका मुकाबला नहीं कर सकता, रिकॉर्ड क्या तोड़ेंगे; CJI सूर्यकांत ने की किस जज की तारीफ

सुप्रीम कोर्ट जस्टिस राजेश बिंदल बुधवार को रिटायर हो रहे हैं। इस मौके पर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, एटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी समेत कई लोगों ने उनके कामों को याद किया। सीजेआई ने यह तक कह दिया कि वह कभी भी जस्टिस बिंदल का मुकाबला नहीं कर सकते। जस्टिस बिंदल ने साल 2023 में सुप्रीम कोर्ट की पारी की शुरुआत की थी।

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, 'जैसा कि रिकॉर्ड से पता चलता है, हमने एक साथ काफी समय बिताया है। मुझे उन्हें बहुत करीब से जानने का मौका मिला है, यहाँ तक कि अपने पुराने कामकाजी दिनों के दौरान भी।' उन्होंने कहा, 'समय के साथ हम दोनों कई बार टैक्स से जुड़े मामलों में लगे रहते थे। बाद में जब मैं दूसरे कानूनी क्षेत्रों का काम देख रहा था तब हमारा ध्यान कुछ खास और जरूरी मुद्दों पर ज्यादा रहा।'

पुराने दिनों को किया याद, अपना भाई बताया

सीजेआई ने कहा, 'मुझे याद है कि उस मुश्किल समय के दौरान जब मेरे भाई की तबीयत ठीक नहीं थी और वे पूरी तरह से काम करने की स्थिति में नहीं थे, तब सरकारी कंपनियों से जुड़े बड़े और विवादित मामलों में लोग उन्हें ही काम देना पसंद करते थे। वो उनकी काबिलियत को जानते थे और उनकी बारीकियों को समझने की आदत पर पूरा भरोसा करते थे। वे अपनी ईमानदारी और कड़ी मेहनत के लिए मशहूर थे।'

बराबरी से इनकार किया

मुख्य न्यायाधीश ने कहा, 'जैसा कि अटॉर्नी जनरल ने सही कहा हम दोनों ही केसों को तेजी से निपटाने के लिए जाने जाते थे, लेकिन मैं कभी उनका मुकाबला नहीं कर सका, और उनका रिकॉर्ड तोड़ना तो दूर की बात थी। वे बहुत ही जल्द केस निपटान के लिए जाने जाते थे।'

उन्होंने कहा, '...जब वे पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में थे, तब उन्होंने ही मेडिको लीगल और पोस्टमार्टम रिपोर्ट को कंप्यूटर से जोड़ने के लिए एक ऐप बनाया था। इसका इस्तेमाल पहली बार पंजाब में हुआ और बाद में इसे सभी जिलों में जरूरी कर दिया गया। आज यह पूरी तरह से क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम (CCTNS) से जुड़ा हुआ है। मेरे हिसाब से यह एक बेहतरीन मिसाल है कि कैसे एक व्यक्ति की कोशिश पूरी व्यवस्था के लिए बड़ा बदलाव ला सकती है।'

उन्होंने कहा, 'वह बहुत ही अहम सहकर्मी रहे हैं। मैं यह जरूर कहूंगा हमने जो भी प्रशासनिक सुधार किए हैं, उनमें वह काफी मददगार रहे हैं।'

जस्टिस बिंदल का सफर

16 अप्रैल 1961 को हरियाणा के अंबाला में जन्मे जस्टिस बिंदल ने कानूनी पारी की शुरुआत पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट से सितंबर 1985 में की थी। वह 22 मार्च 2006 को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के जज बने। एजी वेंकटरमणी ने बताया है कि जस्टिस बिंदल ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में 12 साल के लंबे करियर में 80 हजार मामलों की सुनवाई की है।

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लेखक के बारे में

Nisarg Dixit

निसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।

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