CJI सूर्यकांत के कार्यक्रम में हंगामा, 'असहमति' के सवाल पर गरमागरम बहस; CJP प्रवक्ता ने शेयर किया वीडियो

Pramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, लंदन
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CJI सूर्यकांत ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) अब कोई काल्पनिक तकनीक नहीं बल्कि एक क्रियाशील वास्तविकता है और यह अंतरराष्ट्रीय कानून के लिए सबसे महत्वपूर्ण परीक्षाओं में से एक है।

CJI सूर्यकांत के कार्यक्रम में हंगामा, 'असहमति' के सवाल पर गरमागरम बहस; CJP प्रवक्ता ने शेयर किया वीडियो

देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत इस वक्त छह दिनों के लंदन दौरे पर हैं, जहां वह एक नामी यूनिवर्सिटी में आयोजित एक व्याख्यान कार्यक्रम में मुख्य वक्ता थे। कार्यक्रम में CJI सूर्य कांत के व्याख्यान के दौरान उस समय तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई, जब कुछ प्रतिभागियों ने भारत में असहमति (dissent) को दबाने के कथित आरोपों पर सवाल पूछने की कोशिश की। इसी बीच कार्यक्रम के एंकर ने कहा कि ये सवाल व्याख्यान के विषय से हटकर हैं।

AI पर था व्याख्यान, लेकिन उठा 'असहमति' का मुद्दा

दरअसल, CJI सूर्य कांत लंदन विश्वविद्यालय के बिर्कबेक कॉलेज में 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अंतर्राष्ट्रीय कानून' विषय पर अपना व्याख्यान दे रहे थे। कार्यक्रम के दौरान जब प्रश्नोत्तर सत्र शुरू हुआ, तो एक महिला प्रतिभागी ने भारत में लोकतंत्र के रिकॉर्ड और असहमति के प्रति बढ़ती शत्रुता को लेकर सवाल उठाना चाहा। महिला ने CJI के हालिया बयानों का संदर्भ देते हुए जैसे ही अपनी बात रखनी चाही, मंच पर मौजूद एंकर ने उन्हें यह कहते हुए रोक दिया कि यह सवाल विषय (AI) से संबंधित नहीं है। इस दौरान एक छात्र को मंच की ओर चिल्लाते हुए सुना गया, “कृपया हमें भी कुछ सम्मान दें!”

'कॉकरोच जनता पार्टी'के प्रवक्ता ने वीडियो किए वायरल

इस घटना के वीडियो क्लिप्स सोशल मीडिया पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास द्वारा साझा किए गए हैं। गौरतलब है कि इस आंदोलन का नाम CJI सूर्यकांत द्वारा पिछले महीने फर्जी डिग्री धारकों और कार्यकर्ताओं के लिए "कॉकरोच" और "परजीवी" जैसे शब्दों के इस्तेमाल के बाद रखा गया है। CJP फिलहाल CBSE OSM विवाद को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़े विरोध प्रदर्शन की तैयारी भी कर रहा है।

CJI ने AI की जवाबदेही पर दिया जोर

हंगामे के बीच, अपने मुख्य भाषण में CJI सूर्य कांत ने AI के भविष्य पर महत्वपूर्ण विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि तकनीक स्वयं न तो अच्छी होती है और न ही बुरी, इसका प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि हम इसे किस कानूनी और नैतिक ढांचे के भीतर लागू करते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि AI की शक्ति को संवैधानिक मूल्यों, लोकतांत्रिक वैधता और मानवीय गरिमा के प्रति जवाबदेह होना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर तकनीकी प्रगति में जवाबदेही तय नहीं की गई, तो न्याय की अवधारणा केवल एक भ्रम बनकर रह जाएगी।

AI अब वास्तविकता है

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता अब एक क्रियात्मक वास्तविकता है जो शासन, वाणिज्य, युद्ध, संचार, सार्वजनिक प्रशासन और तेजी से न्यायिक और संप्रभु शक्ति के प्रयोग को ही नया आकार दे रही है। उन्होंने कहा, “सरकारें अब कल्याणकारी लाभों के आवंटन, आव्रजन आवेदनों के मूल्यांकन, सीमाओं की निगरानी, ​​वित्तीय प्रणालियों के विनियमन और पुलिसिंग कार्यों में सहायता के लिए एल्गोरिदम प्रणालियों का उपयोग करती हैं। सेनाएं तेजी से स्वायत्त क्षमताओं का विकास कर रही हैं। विभिन्न न्याय क्षेत्रों की अदालतें कृत्रिम बुद्धिमत्ता से उत्पन्न साक्ष्य, स्वचालित निर्णय लेने और डिजिटल उचित प्रक्रिया से संबंधित प्रश्नों का सामना करना शुरू कर रही हैं। निजी निगमों के पास ऐसी तकनीकी क्षमताएं हैं जो संप्रभु राज्यों की सूचनात्मक पहुंच के बराबर हैं और कुछ मामलों में उससे भी अधिक हैं।”

उन्होंने कहा, "हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि बुद्धिमान मशीनों के युग में भी, मानवता अपने शासन के सिद्धांतों की रचना का अधिकार बरकरार रखे। यदि अंतरराष्ट्रीय कानून इस चुनौती का सामना करने में सक्षम हो जाता है, तो कृत्रिम बुद्धिमत्ता केवल एक तकनीकी क्रांति नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक सभ्यता की नींव रखने वाले मूल्यों को पुनः स्थापित करने का अवसर बन सकती है।"

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लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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