CJI के 'कॉकरोच' वाले बयान का गलत इस्तेमाल हुआ! सुप्रीम कोर्ट ने अब केंद्र और CBI से मांगा जवाब

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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CJI सूर्यकांत की 'कॉकरोच' टिप्पणी को तोड़-मरोड़कर प्रसारित करने और CJP की गतिविधियों पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र व CBI से जवाब मांगा है। याचिका में कोर्ट की कार्यवाही के दुरुपयोग पर एक्शन की मांग हुई।

'कॉकरोच' टिप्पणी को तोड़-मरोड़कर वीडियो फैलाया: सुप्रीम कोर्ट ने CBI से पूछा- क्या एक्शन होगा?
'कॉकरोच' टिप्पणी को तोड़-मरोड़कर वीडियो फैलाया: सुप्रीम कोर्ट ने CBI से पूछा- क्या एक्शन होगा?

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक अहम जनहित याचिका पर केंद्र सरकार और सीबीआई से जवाब तलब किया है। यह मामला चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत की तीन महीने पुरानी 'कॉकरोच' वाली टिप्पणी से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि वर्चुअल कोर्ट की कार्यवाही के वीडियो को चालाकी से एडिट करके इस टिप्पणी का व्यावसायिक फायदा उठाया गया और इसे ऐसा मतलब दे दिया गया जो कभी कहा ही नहीं गया था।

क्या है पूरा मामला?

15 मई को CJI के नेतृत्व वाली बेंच 'संजय दुबे बनाम रजिस्ट्रार जनरल, दिल्ली हाईकोर्ट' याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इसी दौरान CJI ने अदालती प्रक्रिया के दुरुपयोग और वकालत के गिरते मानकों पर चिंता जताते हुए, खास तौर पर फर्जी वकीलों के संदर्भ में 'कॉकरोच' शब्द का इस्तेमाल किया था।

विवाद और CJP का जन्म

CJI की इस टिप्पणी के बाद खासा बवाल खड़ा हुआ और इसी बीच 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) वजूद में आई। इस पार्टी ने NEET-UG पेपर लीक के खिलाफ जेन-जी के विरोध-प्रदर्शन का नेतृत्व किया।

मीम्स बनाकर मुनाफा कमाने का आरोप

याचिकाकर्ता और पेशे से वकील राजा चौधरी ने CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच के सामने अपनी दलीलें रखीं। करीब आधे घंटे चली बहस के दौरान उन्होंने कोर्ट को बताया कि 15 मई की घटना के बाद से अदालती कार्यवाही के चुनिंदा और एडिटेड क्लिप्स शेयर करने के मामलों में भारी बढ़ोतरी हुई है।

अदालती टिप्पणियों के अर्थ को तोड़-मरोड़ कर मीम्स में बदला जा रहा है और सोशल मीडिया पर मुनाफे के लिए इसे सर्कुलेट किया जा रहा है। याचिकाकर्ता ने शिकायत की कि जजों की छवि खराब करने और न्यायपालिका से जनता का भरोसा कम करने वाली इन साजिशों को रोकने के लिए फिलहाल कोई तंत्र मौजूद नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट से क्या की गई है मांग?

याचिकाकर्ता ने इस बात की गहरी जांच की मांग की है कि कैसे एक अलग संदर्भ में इस्तेमाल किए गए शब्द को चुनकर, एडिट करके संस्थागत गरिमा को ठेस पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किया गया। PIL में मुख्य रूप से कई मांगें रखी गई हैं, जैसे-

अधिकारियों को उन व्यक्तियों और संस्थाओं पर कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया जाए, जो अदालती टिप्पणियों का अनधिकृत व्यावसायिक इस्तेमाल और कमाई कर रहे हैं। याचिका में CJP की गतिविधियों सहित ऐसे शब्दों के ट्रेडमार्क के तौर पर इस्तेमाल पर भी एक्शन की मांग की गई है।

Amit Kumar

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Amit Kumar

डिजिटल पत्रकारिता की बदलती लहरों के बीच समाचारों की तह तक जाने की ललक अमित कुमार को इस क्षेत्र में खींच लाई। समकालीन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पैनी नजर रखने के साथ-साथ अमित को जटिल विषयों के गूढ़ विश्लेषण में गहरी रुचि है। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले अमित को मीडिया जगत में एक दशक का अनुभव है। वे पिछले 4 वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।


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अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।

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