
किसे गेम चेंजर के रूप में देखना चाहते हैं CJI सूर्यकांत? 'डिजिटल अरेस्ट' पर कह दी बड़ी बात
हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट में बोलते हुए, CJI सूर्यकांत ने कहा कि न्यायपालिका को डिजिटल अरेस्ट, स्कैम और दूसरे साइबर क्राइम की नई चुनौतियों से निपटने के लिए खुद को बदलना होगा।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने शनिवार को 23वें हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट (HTLS) में कहा कि सुप्रीम कोर्ट केवल बड़े-बड़े लोगों या वीवीआईपी के लिए नहीं, बल्कि आम आदमी के लिए भी है। उन्होंने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा- मैं एक बहुत साफ और मजबूत संदेश देना चाहता हूं कि सुप्रीम कोर्ट आम आदमी के लिए भी बना है।
मध्यस्थता को बताया ‘गेम चेंजर’
सीजेआई ने न्यायपालिका में मौजूद संरचनात्मक कमजोरियों का जिक्र करते हुए कहा कि मुकदमेबाजी एक लंबी प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य कुछ खास तरह के मुकदमों को प्राथमिकता देना और मध्यस्थता (मीडिएशन) को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा- मैं वाकई मध्यस्थता को एक शक्तिशाली गेम चेंजर के रूप में देखना चाहता हूं। पिछले लगभग एक साल से, खासकर पिछले छह महीनों में मैंने ‘मीडिएशन फॉर द नेशन मिशन’ शुरू किया है।
मध्यस्थता के पक्ष में सीजेआई के प्रमुख तर्क
मुख्य न्यायाधीश ने मध्यस्थता को बढ़ावा देने के कई कारण गिनाए:
कम खर्चीला- मध्यस्थता अन्य वैकल्पिक विवाद निपटारा तंत्रों की तुलना में बहुत-बहुत कम खर्चीली है।
वकीलों की जरूरत नहीं- इसमें वकीलों की अलग श्रेणी की जरूरत नहीं पड़ती। इसमें कम समय लगता है और समाज के हर क्षेत्र का व्यक्ति मध्यस्थ बन सकता है। रिटायर्ड लोग भी मध्यस्थ के रूप में काम कर रहे हैं।
दोनों पक्षों के लिए जीत की स्थिति- यह एक दुर्लभ तरीका है जिसमें दोनों पक्ष मुस्कुराते हुए मध्यस्थता केंद्र से बाहर निकलते हैं। यह विन-विन स्थिति बनाता है।
सामाजिक सौहार्द बनाए रखता है- यह सामाजिक सद्भाव लाता है, सामाजिक ताने-बाने को मजबूत रखता है और आम आदमी की भाषा में बात करता है- यही सबसे बड़ी बात है।
सीजेआई ने चेतावनी भी दी कि मध्यस्थता तभी सफल होगी जब मध्यस्थ न्याय चाहने वाले आम व्यक्ति की भाषा बोलना शुरू करेंगे। उन्होंने कहा- हमारा उद्देश्य वहां तक पहुंचना है और उन्हें एक वैकल्पिक मंच उपलब्ध कराना है।
भारतीय लोकतंत्र और न्याय व्यवस्था के प्रति आशावादी
जब उनसे पूछा गया कि भारत के कानूनी और लोकतांत्रिक भविष्य को लेकर उन्हें उम्मीद कहां से मिलती है, तो सीजेआई ने कहा- मैं बहुत आशावादी व्यक्ति हूं और मुझे पूरा विश्वास है कि भारतीय लोकतंत्र और भारतीय न्याय वितरण प्रणाली दोनों का भविष्य बहुत उज्ज्वल है। उन्होंने इसके तीन मुख्य कारण बताए- भारतीय जनता का संवैधानिक सिद्धांतों के प्रति पूर्ण समर्पण, कानून के शासन के प्रति प्रतिबद्धता और लोकतंत्र के प्रति अटूट निष्ठा।
युवाओं पर भरोसा
न्यायपालिका के भविष्य को लेकर अपना भरोसा जताते हुए सीजेआई ने कहा- जब मैं इस देश के युवाओं को देखता हूं- उनके पास ज्ञान का खजाना है, दुनिया भर में हो रही घटनाओं की सूचना है, प्रतिक्रिया की त्वरित क्षमता है, नवोन्मेषी न्यायिक न्यायशास्त्र विकसित करने की चमक है। मुझे पूरा विश्वास है कि आने वाले समय में भारतीय न्यायपालिका बहुत सुरक्षित हाथों में रहेगी। सीजेआई जस्टिस सूर्य कांत का यह संबोधन न्यायिक सुधारों, खासकर मध्यस्थता को मुख्यधारा में लाने की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है।
डिजिटल अरेस्ट को न्यायपालिका के समक्ष उभरती नई चुनौतियां
भारत के मुख्य न्यायाधीश ने डिजिटल अरेस्ट को न्यायपालिका के समक्ष उभरती नई चुनौतियां बताया है। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधों का यह नया रूप, जहां धोखेबाज वीडियो कॉल के जरिए लोगों को डराकर पैसे ऐंठते हैं, यह न केवल आम नागरिकों को प्रभावित कर रहा है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया को भी जटिल बना रहा है। सीजेआई ने जोर देकर कहा कि सुप्रीम कोर्ट आम आदमी के लिए भी है और उनकी प्राथमिकता लंबित मामलों को कम करना तथा मध्यस्थता को बढ़ावा देना है।
हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट (एचटीएलएस) 2025 के तीसरे और अंतिम दिन बोलते हुए, CJI सूर्यकांत ने कहा कि न्यायपालिका को डिजिटल अरेस्ट, स्कैम और दूसरे साइबर क्राइम की नई चुनौतियों से निपटने के लिए खुद को बदलना होगा। CJI ने कहा- ऐसे मामलों में, पीड़ित भारत में हो सकता है लेकिन अपराधी भारत से बाहर। वह किसी आइलैंड पर हो सकता है, हमें नहीं पता कि वह कहां है। उन्होंने लीडरशिप समिट में बोलते हुए आगे कहा कि जब तक हम यह पता नहीं लगा लेते और समझ नहीं लेते कि इस तरह का अपराध कैसे किया जाता है, तब तक न्यायपालिका ऐसे मामलों से निपट नहीं पाएगी और न्याय नहीं दे पाएगी। इसके लिए न्यायपालिका का खुद को बदलना और सीखना जरूरी है। CJI ने कहा- किसी ने नहीं सोचा था कि डिजिटल अरेस्ट के मामले भी होंगे। हमें रेगुलर ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाने होंगे, और अपने ज्यूडिशियल अधिकारियों को नई चुनौतियों और उनसे सही तरीके से निपटने के तरीकों के बारे में अपडेट करना होगा।
CJI के तौर पर अपनी मुख्य प्राथमिकताओं में से एक के बारे में बात करते हुए, जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि वह सिस्टम में टाइमलाइन और प्रेडिक्टेबिलिटी को बेहतर बनाने के लिए डिस्ट्रिक्ट ज्यूडिशियरी को सेंसिटाइज करने की दिशा में काम करेंगे। CJI ने कहा- इसके लिए, हम ज्यूडिशियल एकेडमी प्लेटफॉर्म और हाई कोर्ट प्लेटफॉर्म के जरिए ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू करने का प्लान बना रहे हैं।
CJI सूर्यकांत ने कहा कि जब वह वकील बनने की तैयारी कर रहे थे, तो उन्हें एहसास हुआ कि ग्रोथ में अपना समय लगता है। उन्होंने HTLS 2025 में कहा- एक गांव में पले-बढ़े होने के नाते, मैंने सीखा कि ग्रोथ में अपना समय लगता है। यह संघर्षों से भरी एक लंबी यात्रा थी, और मैंने जो सबक सीखा वह यह था कि मुझे धैर्य रखना चाहिए और अपनी बारी का इंतजार करना चाहिए। मैं कहूंगा कि इसी से मुझे धैर्य का सबक मिला।

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अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।
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